नई दिल्ली: हरियाणा सरकार ने मंगलवार (26 मई) को रोहतक की सुनारिया जेल में बंद बलात्कार के दोषी डेरा सच्चा सौदा (सिरसा) प्रमुख गुरमीत राम रहीम को फिर से 30 दिन की पैरोल पर रिहा कर दिया है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के मुताबिक, इस साल में यह दूसरी बार है जब राज्य सरकार ने डेरा प्रमुख को पैरोल पर रिहा किया है. इससे पहले जनवरी में सरकार ने उन्हें 40 दिन की पैरोल दी थी.
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को 30 दिन की पैरोल पर रिहा होने के साथ ही डेरा प्रमुख ने इस साल की अपनी पैरोल की पूरी अवधि का इस्तेमाल कर लिया है, और अब उनके पास सिर्फ़ 21 दिन की फरलो बची है.
जेल नियमावली के अनुसार, एक दोषी एक कैलेंडर वर्ष में 70 दिन की पैरोल और 21 दिन की फरलो का हकदार होता है. ये विशेषाधिकार कई कारकों की जांच करने के बाद राज्य सरकार के विवेक पर निर्भर करते हैं.
हालांकि, डेरा के प्रवक्ता और अधिवक्ता जितेंद्र खुराना ने अखबार को बताया कि गुरमीत राम रहीम को उनके कानूनी अधिकारों के अनुसार पैरोल पर रिहा किया गया है और वे परोल अवधि के दौरान अपने सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में रहेंगे.
मालूम हो कि यह 2020 के बाद से जेल से उनकी 16वीं अस्थायी रिहाई है. वे बीते साल 2025 में तीन बार जेल से बाहर आए थे.
अगस्त 2025 से पहले अप्रैल में राज्य सरकार ने उन्हें 21 दिन की फरलो पर रिहा किया था. गुरमीत राम रहीम को 2025 में ही जनवरी में दिल्ली विधानसभा चुनाव से एक सप्ताह पहले भी 30 दिन की पैरोल पर रिहा किया गया था और वे सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में रुके थे.
बता दें कि गुरमीत राम रहीम को ज्यादातर राज्य या अन्य चुनावों के दौरान पैरोल और फरलो मिलते आए हैं. बताया जाता है कि हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई निर्वाचन क्षेत्रों में डेरा के अनुयायियों की अच्छी खासी संख्या है.
गौरतलब है कि 2017 में पंचकुला की एक अदालत ने गुरमीत राम रहीम को अपनी दो शिष्याओं से बलात्कार के लिए 20 साल की सजा सुनाई थी. वह 2017 से हरियाणा के रोहतक की सुनारिया जेल में बंद हैं. जज ने उन्हें प्रत्येक पीड़िता को 15 लाख रुपये का जुर्माना भरने का भी आदेश दिया था.
डेरा प्रमुख को पूर्व मैनेजर रंजीत सिंह और पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के मामलों में भी भी 2019 में दोषी ठहराया गया था, लेकिन इन दोनों ही मामलों में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है.
मालूम हो कि रामचंद्र छत्रपति सिरसा के सांध्य दैनिक ‘पूरा सच’ के संपादक थे. एक साध्वी के साथ हुए रेप की खबर प्रकाशित करने के कुछ महीने बाद ही छत्रपति को अक्तूबर 2002 में गोली मार दी गई थी.
छत्रपति के परिवार ने 2003 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का रुख़ कर यह मामला सीबीआई को सौंपने की मांग की थी. इसकी जांच बाद में सीबीआई को सौंप दी गई. जांच एजेंसी ने जुलाई, 2007 में आरोपपत्र दाखिल किया था और 2019 में गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिया था, जिसे इस साल मार्च में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आंशिक संशोधन करते हत्या मामले में राम रहीम को बरी कर दिया.
हाईकोर्ट के फैसले को राम चंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने ‘बड़ा झटका’ बताते हुए कहा था कि वे इसके ख़िलाफ़ सर्वोच्च न्यायालय का रुख़ करेंगे.
