नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में लगातार खामियां सामने आने के बाद सोमवार (1 जून) को छात्र संगठनों ने दिल्ली स्थित शिक्षा मंत्रालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया.
इस दौरान छात्र संगठनों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को भंग करने और परीक्षा संबंधी तमाम गड़बड़ियों की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में करवाने की मांग भी की.
मालूम हो कि बीते दिनों नीट परीक्षा पेपर लीक के तुरंत बाद सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) गड़बड़ी का मामला सामने आया था. ये दोनों विवाद अभी थमे ही नहीं थे कि स्नातक कॉलेज में दाखिले के लिए होने वाली सीयूईटी की परीक्षा में देरी और अव्यवस्था का माहौल देखने को मिला.
प्रदर्शन के दौरान कई छात्र कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया गया, जिन्हें कापसहेड़ा थाने में घंटों बिना किसी जानकारी के रखा गया.
इस संबंध में द वायर से फोन पर बात करते हुए कई प्रदर्शनकारियों ने बताया, ‘हम शिक्षा मंत्रालय के कार्यालय पर पेपर लीक और तमाम परीक्षाओं में कुप्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन करने गए थे. लेकिन सरकार ने अपनी आदत के मुताबिक भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर गलत करने वाले को छोड़कर, गलत के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों को हिरासत में ले लिया. हमें बाहर ही रोक दिया गया और जबरन हमारे कई साथियों को बिना जानकारी गाड़ियों में भरकर ले गए.’
प्रदर्शनकारी छात्रों ने आगे सवाल उठाया, ‘सरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा क्यों नहीं मांग रही है? क्या लाखों-करोड़ों बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले लोगों की कोई जवाबदेही नहीं तय होगी. या सरकार सिर्फ प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ ही कार्रवाई कर के अपनी पीठ थपथपा कर खुश हो जाएगी.’
इस प्रदर्शन को लेकर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा ने कहा, ‘एनटीए आज शिक्षा के क्षेत्र में व्याप्त लापरवाही और भ्रष्टाचार का सबसे बुरा प्रतीक बन गया है, जिसमें मोदी सरकार की शिक्षा नीति की सबसे स्पष्ट झलक दिखाई देती है.’
नेहा ने आगे कहा कि परीक्षा में लगातार सामने आ रही समस्याओं ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है, उनके मनोबल को गिराने का काम किया. साथ ही पढ़ाई के लिए उन पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को भी बढ़ाया है, जिसके चलते छात्रों में निराशा और हताशा फैल गई है. और इसलिए आइसा देशभर के सभी युवाओं और छात्रों से अपील करता है कि वे अपने भविष्य की रक्षा और उसे सुरक्षित करने के लिए इन अनियमितताओं के खिलाफ खड़े हों.

वहीं, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष नीतीश ने कहा, ‘अगर हमें पेपर लीक को रोकना है, तो एनटीए को पूरी तरह से भंग कर देना चाहिए!’
इस प्रदर्शन के दौरान परीक्षाओं में लगातार हो रही अनियमितताओं के लिए शिक्षा मंत्रालय की जवाबदेही, प्रभावित छात्रों के लिए न्याय और देश की परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधारों की मांग की गई.
प्रदर्शन में शामिल क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) ने एक बयान जारी कर कहा, ‘लाखों छात्रों के भविष्य को अंधकार में धकेलने वाली गड़बड़ियां सामने आने के बावजूद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय एनटीए अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय इस मुद्दे को दबाने की कोशिश करता रहा है. इससे इन परीक्षाओं में बैठने वाले लाखों छात्रों के प्रति उसकी उदासीनता स्पष्ट रूप से उजागर होती है.’
इस मामले को लेकर संगठन के सदस्य भीम कुमार बताते हैं, ‘यह पहली बार नहीं है, जब एनटीए पर सवाल उठे हैं, इससे पहले भी इसकी कार्यप्रणाली लगातार गंभीर सवालों के घेरे में रही है. नीट 2024 भला कौन भूल सकता है. इसके अलावा यूजीसी-नेट, सीयूईटी तथा अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में भी समय-समय पर अनियमितताओं और कुप्रबंधन की घटनाएं सामने आती रही हैं. इसके बावजूद केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय एनटीए की जवाबदेही तय करने में विफल रहे हैं.’
विपक्ष के सवाल
गौरतलब है कि छात्रों के साथ-साथ विपक्ष ने भी एनटीए और सरकार के खिलाफ हमला बोला है.
एक वीडियो बयान में आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘पहले नीट, फिर सीबीएसई, फिर एसएससी, फिर यूपीएसई, और अब सीयूईटी. इस देश का हर बच्चा अब यह महसूस करने लगा है कि यह सरकार एक भी पेपर ठीक से नहीं करवा सकती. एक के बाद एक पेपर में गड़बड़ियां हो रही हैं, और प्रधानमंत्री चुप हैं. उन्हें ज़रा भी फिक्र नहीं है. असल में इस सरकार को शिक्षा का महत्व ही नहीं पता. क्या आप भी इस बात से सहमत हैं कि अब देश को एक पढ़े-लिखे प्रधानमंत्री की सख्त ज़रूरत है?’
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) नेता बृंदा करात ने भी परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर छात्रों के भविष्य पर पड़ने वाले असर पर चिंता जताई और परीक्षाओं के डिजिटल पहलुओं के लिए निजी कंपनियों पर निर्भरता की आलोचना की.
उन्होंने मीडिया से कहा, ‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. जब नतीजों पर ही सवालिया निशान लग जाता है, तो उस बच्चे के भविष्य का क्या होगा? आप पूरा डिजिटल पहलू निजी कंपनियों को सौंप रहे हैं.’
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने सोमवार को परीक्षाओं और एनटीए से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए बैठक की.
इस समिति के अध्यक्ष कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि सभी पार्टियों के सदस्य परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के अपने दृष्टिकोण पर एकमत थे.
उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की ‘अक्षमता’ के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद कमान संभालनी पड़ी है.
सिंह ने मीडिया से कहा, ‘धर्मेंद्र प्रधान की अक्षमता के कारण प्रधानमंत्री को स्वयं ही इस मामले की बागडोर अपने हाथों में लेनी पड़ी है. केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को या तो अपना इस्तीफा दे देना चाहिए, या फिर उन्हें पद से हटा दिया जाना चाहिए. हमें पूरा विश्वास है कि चूंकि प्रधानमंत्री ने स्वयं इस मामले की कमान संभाली है, इसलिए यह हर दृष्टि से सफलतापूर्वक संपन्न होगा.’
इस बीच यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट के प्रतिनिधियों ने बताया कि उन्होंने नीट और एनटीए में सुधारों को लेकर कुछ सुझाव तैयार किए हैं, और उन्हें शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति के सामने इन सुझावों को पेश करने के लिए आमंत्रित किया गया था. लेकिन बाद में उन्हें समिति के समक्ष जाने नहीं दिया गया.
यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट के चेयरपर्सन डॉ. लक्ष्य मित्तल ने आरोप लगाया कि आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किए जाने के बावजूद उन्हें बैठक स्थल में प्रवेश करने से रोक दिया गया.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा सांसदों के विरोध के बाद यूडीएफ को संसदीय स्थायी समिति के सामने अपनी बात रखने की अनुमति नहीं दी गई थी.
