नई दिल्ली: भारत ने शनिवार को पाकिस्तान द्वारा 7 जून को ‘गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा’ के चुनाव कराने की योजना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान में ‘जनरल असेंबली’ और ‘गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा’ शब्दों को कोट में लिखा. यह विधानसभा पाकिस्तान के नियंत्रण वाले गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र की एक सदनीय (यूनिकैमरल) विधायिका है.
भारत पूरे जम्मू-कश्मीर पर अपने दावे के तहत इस क्षेत्र को भी अपना हिस्सा मानता है. 2019 में जारी नक्शों में गृह मंत्रालय ने गिलगित-बाल्टिस्तान को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का हिस्सा दिखाया था.
विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये चुनाव ‘भारत के उन क्षेत्रों में कराए जा रहे हैं, जिन पर पाकिस्तान ने अवैध और जबरन कब्जा कर रखा है’ और दोहराया कि यह क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है.
बयान में कहा गया, ‘भारत सरकार ने अपना चिर-परिचित रुख दोहराया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश, जिनमें तथाकथित ‘गिलगित-बाल्टिस्तान’ भी शामिल है, 1947 में जम्मू-कश्मीर के भारत में पूर्ण, वैध और अपरिवर्तनीय विलय के परिणामस्वरूप भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं.’
विदेश मंत्रालय ने कहा कि चुनाव जैसे कदमों के जरिये पाकिस्तान ‘अवैध रूप से कब्जे वाले क्षेत्रों में हो रहे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों, राजनीतिक दमन, आर्थिक शोषण और स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित किए जाने’ जैसे मूल मुद्दों को छिपा नहीं सकता.
नई दिल्ली ने यह भी कहा कि वह पाकिस्तान द्वारा अपने अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का भौतिक बदलाव लाने की कोशिशों को स्पष्ट रूप से खारिज करती है. भारत ने जोर देकर कहा कि ऐसे कदम इस तथ्य को नहीं छिपा सकते कि पाकिस्तान अब भी भारतीय क्षेत्रों पर अवैध कब्जा बनाए हुए है, जिन्हें उसे खाली करना चाहिए.
गिलगित-बाल्टिस्तान में होने वाली राजनीतिक गतिविधियों को लेकर भारत पहले भी आपत्ति जताता रहा है.
2023 में भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि उसने पाकिस्तान में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत डोनाल्ड ब्लोम की गिलगित-बाल्टिस्तान यात्रा को लेकर अपनी ‘चिंताएं’ जताई थीं. भारत ने उस समय भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी द्वारा गिलगित-बाल्टिस्तान की यात्रा की तुलना जी-20 कार्यक्रम के लिए श्रीनगर पहुंचे अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से किए जाने पर भी आपत्ति दर्ज कराई थी. यह प्रतिक्रिया यात्रा के लगभग 10 दिन बाद आई थी.
वर्ष 2020 में भारत ने पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी विरोध किया था, जिसमें गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव कराने की अनुमति दी गई थी. तब भारत ने कहा था कि पाकिस्तान की संस्थाओं का उन क्षेत्रों पर कोई अधिकार नहीं है, जिन पर उसने ‘अवैध और जबरन कब्जा’ कर रखा है.
जनवरी 2019 में पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने गिलगित-बाल्टिस्तान की संवैधानिक स्थिति से जुड़े एक लिखित आदेश में स्पष्ट रूप से अपने अधिकार क्षेत्र का विस्तार इस क्षेत्र तक कर दिया था. उस समय भी भारत ने इसका विरोध किया था.
