नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. उन पर आरोप है कि उन्होंने हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान एक राजनीतिक रैली में धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाला भाषण दिया.
उन पर समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने, आपराधिक धमकी देने और शांति भंग करने के लिए उकसाने जैसे आरोप लगाए गए हैं. अगर अदालत में ये आरोप साबित हो जाते हैं, तो इन अपराधों के लिए अधिकतम तीन साल की जेल की सज़ा हो सकती है.
पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ यह शिकायत नेताजी नगर के रहने वाले तुषार कांति दास ने दर्ज कराई है. उनका आरोप है कि रैली में ममता बनर्जी के भाषण में भ्रामक बातें थीं. इसमें स्पष्टता और संदर्भ की कमी थी.
इस शिकायत में दावा किया गया है कि इन बातों का मकसद शांति भंग करना, सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ना और सांप्रदायिक सद्भाव को प्रभावित करना था.
द टेलीग्राफ के अनुसार, दास की शिकायत में कहा गया है, ‘ममता बनर्जी ने… कथित तौर पर एक राजनीतिक रैली को संबोधित करते हुए जनता को भारतीय जनता पार्टी के कथित ‘गुमराह करने वाले प्रचार’ से सावधान रहने को कहा. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यहां किस खास गलत जानकारी या गुमराह करने वाले प्रचार की बात की जा रही थी.’
उन्होंने आगे कहा, ‘उस समय वे मुख्यमंत्री थीं. इतने बड़े पद पर रहते हुए वे कह रही थीं कि अगर वे और उनकी पार्टी न होतीं, तो एक समुदाय दूसरे समुदाय को खत्म कर देता. इस तरह का बयान दंगा भड़काने के लिए काफी है.’
उल्लेखनीय है कि शिकायतकर्ता, जो एक वरिष्ठ नागरिक हैं और अपना बिज़नेस चलाते हैं, ने कहा कि उनका किसी राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन ‘किसी न किसी को तो इस बात का विरोध करना ही था.’
बता दें कि उक्त भाषण 9 मार्च को एस्प्लेनेड में एक धरनास्थल पर दिया गया था. इसकी शिकायत लगभग ढाई महीने बाद 20 मई को दी गई और आखिरकार 7 जून को हेयर स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई, क्योंकि पुलिस का कहना था कि यह घटना उनके अधिकारक्षेत्र में आती है. शुरुआत में इसे उसी स्टेशन पर ज़ीरो एफआईआर के तौर पर दर्ज किया गया था.
इस संबंध में लालबाज़ार के एक सीनियर अधिकारी ने केस दर्ज होने की पुष्टि करते हुए कहा कि ममता बनर्जी ने ‘आपराधिक धमकी से जुड़ा एक गुमराह करने वाला भाषण दिया, जिसका मकसद शांति भंग करना था और जिससे सार्वजनिक शांति, सांप्रदायिक सद्भाव और राज्य के लोकतांत्रिक ढांचे पर असर पड़ा.’
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ सप्ताह पहले सिलीगुड़ी पुलिस आयुक्त कार्यालय ने इसी तरह की शिकायत पर बनर्जी के खिलाफ एक अलग एफआईआर दर्ज की थी.
