नई दिल्ली: नोएडा मजदूर आंदोलन से जुड़े मामले में एक 16 वर्षीय नाबालिग नितिन (परिवर्तित नाम) को लगभग दो महीने तक वयस्क कैदियों के साथ जेल में रखे जाने संबंधी द वायर हिंदी की रिपोर्ट पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा स्वतः संज्ञान लिया गया है.
इसके बाद गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने एक बयान जारी कर दावा किया कि गिरफ्तारी के समय उसने स्वयं अपनी उम्र 19 वर्ष बताई थी, और प्रारंभिक चिकित्सीय परीक्षण में उसकी उम्र ‘18 वर्ष दर्ज की गई थी.’
इसके अलावा पुलिस ने अपने बयान के साथ एक आधार कार्ड की प्रति जारी की, जिसमें जन्म तिथि 1 जनवरी 2007 और नाम ‘दिनेश’ दर्ज है. पुलिस के अनुसार, यह आधार कार्ड ‘नितिन* उर्फ़ दिनेश’ का है. बयान में कहा गया कि वह नोएडा की एक निजी कंपनी में कार्यरत था और नियुक्ति के समय जमा किए गए आधार कार्ड में उसकी जन्मतिथि 1 जनवरी 2007 दर्ज थी.
हालांकि, नितिन के वकील माणिक गुप्ता यह पुष्टि करते हैं कि पुलिस ने अपने बयान के साथ जो आधार कार्ड की प्रति लगाई है वह नितिन* उर्फ़ दिनेश की नहीं है, बल्कि उनके बड़े भाई दिनेश की है.
गौरतलब है कि दिनेश ने इससे पहले द वायर हिंदी के साथ बातचीत में यह स्पष्ट किया है कि उन्होंने कभी भी नोएडा में काम नहीं किया है. उन्होंने बताया कि नितिन* की गिरफ़्तारी से पहले हाल के दिनों में वह सिर्फ़ एक मौके पर नोएडा आए थे.
दिनेश कहते हैं, ‘मैंने नोएडा का रास्ता भी नहीं देखा हुआ है. मैंने सिर्फ़ पंजाब और हरियाणा में मजदूरी की है.’ दिनेश ने यह भी दावा किया कि उनका भाई नितिन भी नोएडा की किसी फैक्ट्री में काम नहीं करता था, बल्कि एक किराने की दुकान पर हेल्पर (सहायक) था.
ज्ञात हो कि नोएडा मज़दूर आंदोलन के संबंध में नितिन को 14 अप्रैल को हिरासत में लिया गया था. उनके आधार कार्ड पर उनकी उम्र 16 वर्ष दर्ज है, लेकिन उनके साथ वयस्क आरोपियों की तरह व्यवहार किया गया और लगभग दो महीने तक जेल में रखा गया था. अस्थि परीक्षण (ओसिफ़िकेशन) जांच यानी अनुमानित उम्र का पता लगाए जाने के लिए की जाने वाली जांच में नाबालिग साबित होने के करीब एक हफ़्ते बाद 12 जून को उन्हें जुवेनाइल होम में स्थानांतरित किया गया. बाद में 18 जून को उन्हें जमानत पर रिहा किया गया.
हालांकि, एफआईआर संख्या 165 में उन्हें कोर्ट द्वारा 29 मई को जमानत दे दी गई, लेकिन 45 हज़ार की जमानत राशि नहीं दे पाने के कारण उन्हें 3 और हफ़्ते जेल में गुज़ारने पड़े.
इसके बाद 19 जून को एनएचआरसी ने नितिन के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक और कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाओं के महानिदेशक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी. साथ ही एनएचआरसी की जांच शाखा को मौके पर जांच कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया.
पुलिस पर गंभीर आरोप
नितिन* के बड़े भाई दिनेश ने द वायर हिंदी को बताया कि 20 जून को शाहजहांपुर जिले स्थित उनके गांव पुलिस आई और उनसे नितिन के बारे में पूछताछ की. दिनेश के अनुसार, पुलिस ने उनसे कहा कि ‘तुम्हारा भाई तुम्हारे आधार कार्ड का इस्तेमाल कर नोएडा की एक निजी फैक्ट्री में काम करता था.’
दिनेश ने पुलिस के इन दावों को ख़ारिज करते हुए कहा, ‘नितिन किसी फैक्ट्री में नहीं बल्कि किराने की दुकान में काम करता था. और अगर मान भी लिया जाए कि नितिन मेरे आधार कार्ड का इस्तेमाल कर भी रहा था, तो क्या फैक्ट्री वालों को यह समझ नहीं आएगा कि वह दूसरे के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर रहा है और उसकी उम्र क्या है.’
दिनेश ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, ‘मेरे गांव आए पुलिसवालों ने मुझे एक वीडियो रिकॉर्ड करने को कहा, जिसमें मुझे यह कहना था कि मैं कभी नोएडा नहीं गया हूं और नितिन मेरे आधार कार्ड का इस्तेमाल कर वहां काम करता था.’
दिनेश ने कहा, ‘मुझसे कहा जा रहा था कि मैं वीडियो रिकॉर्डिंग में यह बोलूं कि मेरा भाई मेरा आधार कार्ड लेकर नोएडा में काम करता था. लेकिन सच्चाई यह है कि मेरे भाई ने कभी मेरा आधार कार्ड नहीं लिया.’
द वायर हिंदी द्वारा यह पूछे जाने पर कि पुलिस के पास उनका आधार कार्ड कैसे पहुंचा, दिनेश कहते हैं, ‘नितिन के जेल जाने के बाद कानूनी प्रकिया और उससे मिलने के दौरान मैंने कई बार अपने आधार कार्ड की प्रति पुलिस और अन्य अधिकारियों के पास जमा कराई थी. वहीं से पुलिस को मिला होगा.’
दिनेश ने यह भी बताया कि पुलिस ने उनसे किसी पेपर पर साइन भी करवाए. दिनेश बताते हैं कि उस पर शायद यह लिखा था कि वे मज़दूर हैं और ईंट भट्ठे पर काम करते हैं.
उधर, नितिन के वकील माणिक गुप्ता का कहना है कि पुलिस यह सब कहानियां ख़ुद को बचाने के लिए गढ़ रही है.
पुलिस के दावे की पड़ताल: क्या हो रही है भरमाने की कोशिश?
एनएचआरसी को जवाब देते हुए गौतम बुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने अपने बयान में दावा किया है कि ‘नितिन उर्फ़ दिनेश’ ने उनसे अपनी उम्र 19 वर्ष बताई थी.
हालांकि, ज़मानत मिलने के बाद द वायर हिंदी से बातचीत में नितिन ने बताया कि ‘पुलिस जब भी मेरी उम्र पूछती थी तो मैं उन्हें अपनी उम्र 16 वर्ष बताता था, लेकिन वे मेरी उम्र 18-19 साल लिख देते थे.’ नितिन ने कहा कि उन्होंने पुलिस या किसी अन्य कर्मी को कभी नहीं बताया कि उनकी उम्र 19 वर्ष है.
पुलिस ने यह भी दावा किया है कि ‘नितिन उर्फ़ दिनेश पुत्र रामदीन कंपनी स्टोंच इलैक्ट्रोनिक इंडिया एलएलपी ए-9, सेक्टर 83, फेज 2 में कार्यरत था, और उसने कंपनी में पंजीकरण करते समय दिनेश, 19 वर्ष (बालिग), नाम से बने आधार कार्ड को दाख़िल किया था.’
नितिन ने भी इस बात की पुष्टि की है कि वह कभी किसी फैक्ट्री या कंपनी में काम नहीं करता था, बल्कि भंगेल इलाके में एक किराने की दुकान पर काम करता था.
मज़दूर आंदोलन में अपनी भूमिका से इनकार करते हुए नितिन ने कहा था, ‘वो आंदोलन फैक्ट्री में काम करने वाले कर रहे थे, मेरा उससे कोई लेना देना ही नहीं था, मैं तो दुकान पर काम करता था.’
पुलिस के बयान के बाद नितिन के वकील माणिक गुप्ता ने भी कई सवाल उठाए हैं. पुलिस अपने बयान में नितिन को ‘नितिन उर्फ दिनेश’ कह कर संबोधित कर रही है.
इसे लेकर गुप्ता कहते हैं, ‘पुलिस कमिश्नरेट द्वारा गिरफ्तार किए गए किशोर को ‘नितिन उर्फ दिनेश’ बताया जाना समझ से परे है. दिनेश कोई उपनाम नहीं बल्कि नितिन का बड़ा भाई है.
वकील का आरोप है कि पुलिस अब दोनों भाइयों की पहचान को लेकर भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि नितिन के मामले में उठे सवालों के बाद पुलिस अपनी कार्रवाई को सही ठहराने के लिए नए स्पष्टीकरण तलाश रही है.
माणिक गुप्ता ने आशंका जताई कि पुलिस अब दिनेश को भी इस मामले में फंसाने की कोशिश कर सकती है.
उन्होंने द वायर हिंदी से कहा, ‘नितिन के मामले में जो कुछ हुआ है, उसके बाद ऐसा लगता है कि पुलिस अब अपना चेहरा बचाने की कोशिश कर रही है. हमें आशंका है कि दिनेश को भी इस मामले में घसीटा जा सकता है.’
दिनेश ने भी यही डर ज़ाहिर किया है. वह कहते हैं, ‘अगर पुलिस नितिन के बाद अब मुझे भी फंसाती है तो फिर मैं क्या करूंगा! नितिन के मामले में मेरे परिवार को इतनी परेशानियां झेलनी पड़ी है, अगर अब मुझे फंसाया जाता है तब मेरा परिवार और तबाह हो जाएगा. मुझे समझ नहीं आ रहा पुलिस मेरे जैसे गरीब परिवार के पीछे क्यों पड़ी है.’
क्या कहती है पुलिस?
नितिन के वकील माणिक गुप्ता ने द वायर हिंदी को बताया कि नोएडा फेज-2 थाने के एसआई नवनीत कुमार ने दिनेश को उनके गांव जाकर एक वीडियो बनाने के लिए कहा था. गुप्ता का दावा है कि नवनीत कुमार ने उनसे फोन पर हुई बातचीत के दौरान इस बात को स्वीकार भी किया था.
हालांकि, द वायर हिंदी द्वारा जब उनसे संपर्क किया गया तो उन्होंने इस बात से स्पष्ट इनकार किया. उनका कहना था कि वह शाहजहांपुर जिले में नितिन के गांव गए ही नहीं हैं और उन्हें दिनेश से वीडियो बनवाने के कथित प्रयास के बारे में कोई जानकारी नहीं है.
इससे पहले द वायर हिंदी ने रविवार देर रात गौतम बुद्ध नगर कमिश्नरेट को ईमेल के माध्यम से सवाल भेजे हैं, जिनका इस रिपोर्ट के प्रकाशन तक कोई जवाब नहीं मिला है.
सोमवार को द वायर हिंदी ने इन आरोपों के संबंध में नोएडा फेज-2 थाने से भी संपर्क किया. दोपहर 2:26 बजे थाने की ओर से जिस व्यक्ति ने फोन उठाया उनका कहना था कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है और वे कुछ देर में इसकी जानकारी लेकर बताएंगे. इसके बाद शाम 4:14 बजे थाने से दोबारा संपर्क किया गया. इस बार फोन उठाने वाले शख्स ने ख़ुद को एसएसआई बताया, लेकिन सवाल पूछे जाने पर पिछला जवाब ही दोहराया गया कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है और वे जानकारी प्राप्त कर बताएंगे.
इसके बाद द वायर हिंदी द्वारा गौतमबुद्ध नगर पुलिस के मीडिया सेल से भी संपर्क किया. सोशल मीडिया सेल में सुशील नाम के व्यक्ति ने फोन उठाया और कहा कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है और इस बाबत थाना प्रभारी ही जानकारी दे सकते हैं.
इसी कड़ी में गौतमबुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह से भी संपर्क किया गया, लेकिन कॉल नहीं उठाया गया. पुलिस की ओर से जवाब मिलने पर रिपोर्ट में जोड़ा जाएगा.
(*बदला हुआ नाम)
