ओडिशा: मृत्यु के प्रमाण के लिए कंकाल बैंक ले जाने वाली घटना को लेकर बैंक मैनेजर निलंबित

दो महीने पहले ओडिशा में एक आदिवासी व्यक्ति द्वारा अपनी बहन की मृत्यु का प्रमाण देने के लिए उनका कंकाल बैंक ले जाने की घटना सामने आई थी. अब उस मामले में बैंक शाखा प्रबंधक को निलंबित कर दिया गया है. साथ ही, देश के सभी ग्रामीण बैंकों को आदिवासी और अन्य कमज़ोर वर्गों के ग्राहकों के साथ संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं.

जीतू मुंडा अपनी बहन के नई कब्र के पास. (फोटो: अरेंजमेंट)

नई दिल्ली: ओडिशा में एक आदिवासी व्यक्ति द्वारा अपनी बहन की मृत्यु का प्रमाण देने के लिए उनका कंकाल बैंक ले जाने की घटना के बाद संबंधित बैंक शाखा प्रबंधक को घटना के दो महीने बाद निलंबित कर दिया गया है.

इसके साथ ही देश के सभी 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) को ऐसे मामलों के दोहराव को रोकने के लिए, विशेष रूप से ग्रामीण, आदिवासी और अन्य कमजोर वर्गों के ग्राहकों के साथ संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं.

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, यह जानकारी केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक को लिखे एक पत्र में दी है. पटनायक ने 2 मई को चौधरी को पत्र लिखकर बैंक की प्रक्रियात्मक देरी के कारण परिवार को हुई कथित परेशानी का मुद्दा उठाया था.

पटनायक के पत्र के जवाब में 12 जून को भेजे गए पत्र में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मामले की जांच ओडिशा ग्रामीण बैंक (ओजीबी) के साथ की गई. बैंक ने बताया कि मृत खाताधारक के खाते में कोई नॉमिनी दर्ज नहीं था, इसलिए दावे के निपटारे के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र और कानूनी उत्तराधिकारियों से संबंधित दस्तावेजों सहित निर्धारित कागजात जमा करना आवश्यक था.

बैंक ने यह भी बताया कि स्थानीय प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद आवश्यक दस्तावेज जारी किए गए और मृत खाताधारक कालरा मुंडा के खाते में जमा 19,402 रुपये की राशि का भुगतान बाद में जीतू मुंडा और अन्य दो कानूनी उत्तराधिकारियों को कर दिया गया.

पत्र में केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘हालांकि, इस घटना को वित्तीय सेवा विभाग ने गंभीरता से लिया है. विभाग का मानना है कि बैंकिंग कार्यों में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक है, लेकिन उतना ही महत्वपूर्ण यह भी है कि इन प्रक्रियाओं को संवेदनशीलता, सहानुभूति और प्रभावी संवाद के साथ लागू किया जाए, विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में.’

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि ओडिशा ग्रामीण बैंक ने सबसे पहले उस मल्लीपोसी शाखा के शाखा प्रबंधक को निलंबित कर दिया, जहां यह घटना हुई थी. इसके अलावा, बैंक के निदेशक मंडल की मंजूरी के बाद सभी क्षेत्रीय अधिकारियों और कर्मचारियों को एक परामर्श जारी किया गया है, जिसमें सभी ग्राहकों के प्रति संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाने तथा पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं.

इसके अतिरिक्त, देशभर के 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में नागरिक-केंद्रित बैंकिंग सेवाओं को मजबूत करने और ऐसी घटनाओं के दोहराव को रोकने के उद्देश्य से वित्तीय सेवा विभाग ने 29 मई को सभी आरआरबी को एक परामर्श जारी किया. इसमें विशेष रूप से ग्रामीण, आदिवासी और समाज के अन्य कमजोर वर्गों के ग्राहकों को उत्तरदायी, संवेदनशील और पारदर्शी ग्राहक सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है.