नई दिल्ली: ‘आपको प्रश्न पूछना है तो यह पूछिए कि क्या इस ऑपरेशन में हमारे जवान सैनिकों को कोई क्षति हुई? तो उसका उत्तर है नहीं!’
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर यह बातें देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बीते साल संसद के मानसून सत्र के दौरान 28 जुलाई को लोकसभा में विशेष चर्चा के दौरान कहीं थीं.
हालांकि अब एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद केंद्र सरकार ने इस संघर्ष के दौरान ड्यूटी पर शहीद हुए छह सैन्यकर्मियों के नाम आधिकारिक तौर पर जारी किए हैं. इन नामों को दिल्ली में राष्ट्रीय समर स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) में अंकित किया गया है.
उल्लेखनीय है कि ऑपरेशन सिंदूर को पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 आम नागरिकों (जिनमें ज़्यादातर पर्यटक थे) की जान चली गई थी, की जवाबी कार्रवाई के तौर पर अंजाम दिया गया था. इसमें भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में आतंकवाद से जुड़ी नौ जगहों पर हमले किए थे; ये जगहें कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी थीं.
हालांकि, तब इस ऑपरेशन के दौरान जान गंवाने वाले जवानों के बारे में कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई थी.
असल में सरकार अब तक इस मामले से जुड़े ज़्यादातर सवालों से बचती नज़र आई है. और यही वजह है कि विपक्ष ने सरकार पर जवानों के बलिदान को छुपाने और संसद को गुमराह करने का आरोप लगाया है. विपक्ष का कहना है कि सरकार ने एक साल तक छह जवानों के बलिदान के बारे में जानकारी छिपाकर सैनिकों का अपमान किया है.
मालूम हो कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना के जवानों के मारे जाने से जुड़ी कुछ खबरें सामने आई थीं, लेकिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में कहा था कि ‘किसी भी सैनिक को कोई क्षति नहीं पहुंची है.’
उन्होंने जुलाई 2025 में पहलगाम हमले और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर लोकसभा में हुई विशेष चर्चा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अनुपस्थित रहे थे, में कहा था, ‘मैं विपक्ष से कहना चाहता हूं कि अगर आपको कोई सवाल पूछना ही है, तो यह सवाल पूछिए कि क्या ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा? इसका जवाब है, हां. अगर आपको कोई सवाल पूछना है, तो यह पूछिए कि क्या हमारी बहनों-बेटियों का सिंदूर पोंछने वाले आतंकवादियों से हमारी सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में निपटा है, उनके आकाओं का खात्मा किया है? इसका जवाब है, हां. अगर आपको कोई सवाल पूछना है, तो यह पूछिए कि क्या इस ऑपरेशन में हमारे किसी बहादुर सैनिक को कोई क्षति हुई? जवाब है, नहीं, हमारे किसी भी सैनिक को कोई क्षति नहीं हुई.’
सिंह ने आगे कहा कि ध्यान ‘अपेक्षाकृत छोटे मुद्दों’ पर नहीं होना चाहिए और केवल परिणाम ही मायने रखते हैं.
हालांकि, सरकार ने बाद में ‘हताहतों’ की बात स्वीकार की, लेकिन सरकार द्वारा न तो किसी शहीद का नाम बताया गया और न ही हताहतों की संख्या.
सेना और वायुसेना के जवान हुए थे शहीद
द हिंदू के अनुसार, समर स्मारक के ‘त्याग चक्र’ की दीवार नंबर ‘3डी’ पर लिखे गए शहीद जवानों की सूची में भारतीय सेना के पांच और भारतीय वायु सेना के एक जवान का नाम शामिल है.
इनमें सेना के सूबेदार मेजर पवन कुमार, राइफलमैन सुनील कुमार (VrC), लांस नायक दिनेश कुमार, अग्निवीर एम. मुरलीनाइक, हवलदार सुनील कुमार सिंह और भारतीय वायु सेना के सार्जेंट सुरेंद्र कुमार शामिल हैं.
इस संबंध में रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने द टेलीग्राफ को बताया, ‘छह लोगों की मौत के ज़्यादातर मामले जम्मू-कश्मीर में हुए.’
शहादत को देश से छिपाए रखा: विपक्ष
शहीदों के नाम की इस देरी से की गई घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस ने कहा कि यह शर्मनाक है कि जो सरकार अपने राष्ट्रवाद का ढिंढोरा पीटती है, उसने बहादुरों को एक साल तक वह सम्मान नहीं दिया जिसके वे हकदार थे.
कांग्रेस के मीडिया प्रभारी पवन खेड़ा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘ये भारत के वे वीर सपूत हैं, जिन्होंने पहलगाम हमले के बाद हमारी बहनों के सिंदूर की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए. इनके नाम देश की सामूहिक स्मृति में अंकित होने चाहिए थे. इनके परिवारों को एक कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से उनके बलिदान का सम्मान मिलता हुआ दिखना चाहिए था. लेकिन इसके बजाय, भाजपा सरकार ने पूरे एक साल तक उनकी शहादत को देश से छिपाए रखा.’
खेड़ा ने दावा किया कि राष्ट्रवाद की लंबी-लंबी बातें करने वाली सरकार ने इन वीरों को वह सम्मान नहीं दिया, जिसके वे हकदार थे.
1. Subedar Major Pawan Kumar of Headquarters 10 Infantry Brigade
2. Rifleman Sunil Kumar, Vir Chakra, of 4 Jammu and Kashmir Light Infantry,
3. Lance Naik Dinesh Kumar of 5 Field Regiment
4. Aviation Technician Mood Muralinaik of 851 Light Regiment,
5. Havildar Sunil… https://t.co/awZ9EPGn1y— Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ (@Pawankhera) June 26, 2026
इस संबंध में कांग्रेस सचिव गौरव पांधी ने भी सवाल उठाते हुए पूछा कि रक्षा मंत्री ने क्यों कहा था कि किसी भी सैनिक को नुकसान नहीं पहुंचा और छह जवानों के नाम एक साल तक क्यों छिपाकर रखे गए.
उन्होंने एक्स पर कहा, ‘भारत के लोगों से यह जानकारी एक साल तक क्यों छिपाई गई? शहीदों के परिवारों को उस सम्मान से क्यों वंचित रखा गया? भारत के लोगों को पूरे एक साल तक शहीदों के प्रति सम्मान प्रकट करने का मौका क्यों नहीं दिया गया? राजनाथ सिंह को झूठ क्यों बोलना पड़ा? एक दिन भाजपा नेताओं को भारत की जनता को अदालत के ज़रिए इसका जवाब देना ही होगा.’
ध्यान रहे कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 851 लाइट रेजिमेंट के एम. मुरलीनाइक ही एकमात्र अग्निवीर थे जिनकी मौत हुई. 9 मई, 2025 को पुंछ में पाकिस्तानी गोलाबारी में उनकी मौत हो गई थी.
उनकी मौत का मामला बॉम्बे हाईकोर्ट में कानूनी चुनौती का विषय बन गया है, जहां उनके परिवार ने नियमित सैनिकों के बराबर पेंशन और कल्याणकारी लाभ की मांग की है. केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट को बताया है कि अग्निवीर नियमित सैनिकों की तरह नहीं होते हैं, इसलिए उन्हें मरने के बाद पेंशन का फ़ायदा नहीं दिया जा सकता.
शहीद सैन्यकर्मियों के नाम सामने लाने में देरी को लेकर तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है. अगर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान छह भारतीय सैनिक शहीद हुए, तो रक्षा मंत्री ने संसद में यह कैसे कहा कि ‘किसी सैनिक की कोई क्षति नहीं हुई?’
उन्होंने आगे कहा, ‘संसद को सच जानने का हक है. हमारे शहीदों के परिवारों को सच जानने का हक है. भारत को सच जानने का हक है. नरेंद्र मोदी सरकार को यह बताना चाहिए कि संसद को गुमराह क्यों किया गया.’
Extremely serious. If six Indian soldiers were martyred during Operation Sindoor, how did the Defence Minister tell Parliament that “no soldiers were harmed”? Parliament deserves the truth. The families of our martyrs deserve the truth. India deserves the truth. The @narendramodi… pic.twitter.com/m1lXLlfUP3
— Sagarika Ghose (@sagarikaghose) June 27, 2026
वहीं, राष्ट्रीय जनता दल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह देश के लिए वीरगति पाने वाले सैनिकों के साथ भाजपा का किया गया धोखा है.
राजद ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा, ‘मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन और देश के सामने झूठ बोलते हुए कहा था, ‘आपको प्रश्न पूछना है तो यह पूछिए कि क्या इस ऑपरेशन में हमारे जवान सैनिकों को कोई क्षति हुई? तो उसका उत्तर है नहीं!!’ आज निर्लज्ज स्वीकार कर रहे हैं कि 6 सैनिकों की जान ऑपरेशन सिंदूर में गई थी! सदन और देशवासियों से सेना के संदर्भ में झूठ बोलने के लिए रक्षा मंत्री राज सिंह को इस्तीफा देना चाहिए! यह लोग सेना के नाम पर वोट मांगते हैं पर सैनिकों को सही सम्मान नहीं दे सकते! उनकी बलिदानी और योगदान को यह भाजपाई स्वीकारना तक नहीं चाहते!’
देश के लिए वीरगति पाने वाले सैनिकों के साथ भी ‘भाजपाई धोखा’!
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन और देश के सामने झूठ बोलते हुए कहा था:
“आपको प्रश्न पूछना है तो यह पूछिए कि क्या इस ऑपरेशन में हमारे जवान सैनिकों को कोई क्षति हुई?
तो उसका उत्तर है नहीं!!”आज निर्लज्ज स्वीकार कर रहे… pic.twitter.com/ecyitIc3j3
— Rashtriya Janata Dal (@RJDforIndia) June 27, 2026
इस मुद्दे पर वाम दल ने भी सरकार को घेरते हुए रक्षा मंत्री द्वारा संसद में झूठ बोलने पर सवाल उठाया है.
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने पूछा, ‘राजनाथ सिंह ने संसद में झूठ क्यों बोला? मोदी सरकार को ऑपरेशन सिंदूर के शहीदों के नाम सार्वजनिक करने में इतना समय क्यों लगा?’
Why did Rajnath Singh lie in Parliament? Why did it take so long for the Modi government to make the names of #OperationSindoor martyrs public? pic.twitter.com/rHvZZT90Ir
— Dipankar (@Dipankar_cpiml) June 27, 2026
गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सरकार अक्सर सवालों से बचती रही है, जिसमें एक मुख्य पक्ष भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान सीज़फायर को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा भी था, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका ने दोनों देशों को परमाणु युद्ध के कगार से बचाने के लिए व्यापार रोकने की धमकी दी थी, जिसके चलते यह संघर्ष समाप्त हो सका.
लेकिन भारत की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच बातचीत में किसी भी बिंदु पर ‘व्यापार से कोई संबंध’ नहीं था.
