दिल्ली: सरकारी स्कूल के मिड-डे मील में मरी हुई छिपकली पाई गई, एफआईआर दर्ज

घटना पश्चिमी दिल्ली के हरिनगर स्थित एक सरकारी स्कूल की है, जहां शुक्रवार को बच्चों के मिड-डे मील के लिए लाए गए भोजन के कंटेनर में मरी हुई छिपकली मिली, जिसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है. फ़िलहाल, पुलिस को भोजन खाने के बाद किसी भी बच्चे की तबीयत ख़राब होने की कोई सूचना नहीं मिली है.

(प्रतीकात्मक तस्वीर: पीटीआई)

नई दिल्ली: मिड-डे मील योजना देश की शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है. यह स्कूलों में नामांकन, उपस्थिति और पढ़ाई तीनों में मददगार भी मानी जाती है. हालांकि, इस योजना के तहत मिलने वाला भोजन अक्सर किसी न किसी गड़बड़ी या राजनीति के चलते सुर्खियों में रहता है.

ताजा मामला पश्चिमी दिल्ली के हरिनगर स्थित एक सरकारी स्कूल (राजकीय सर्वोदय (सह शिक्षा) विद्यालय) का है, जहां शुक्रवार (3 जुलाई) को बच्चों को परोसने के लिए लाए गए मिड-डे मिल के एक कंटेनर में मरी हुई छिपकली मिलने की घटना सामने आई है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के मुताबिक, यह घटना शुक्रवार (3 जुलाई) की बताई जा रही है. इस स्कूल में एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) द्वारा पहुंचाए गए मिड-डे मील के कंटेनर में मरी हुई छिपकली मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया है.

पुलिस के मुताबिक, हरिनगर के एल-ब्लॉक में स्थित इस स्कूल में मिड-डे मील आमतौर पर एनजीओ द्वारा ही पहुंचाया जाता है. घटना वाले दिन भी एनजीओ द्वारा सुबह करीब 9 बजे एक गाड़ी में खाना पहुंचाया गया था, जिसके बाद प्रशासन और स्टाफ ने इसे रोज़ाना की तरह अपने कब्ज़े में लेकर एक स्थान पर रखवा दिया था.

एफआईआर में बताया गया है कि इस मिड-डे मील के खाने को कंटेनरों में भरकर एक गाड़ी में लाया गया था. स्कूल प्रशासन ने नियमानुसार अपर प्राइमरी विंग के लिए चावल और चना दाल के चार सीलबंद कंटेनर प्राप्त किए थे और उन्हें एक सुरक्षित व स्वच्छ स्थान पर रख दिया था.

बताया गया है कि जिस दिन की यह घटना थी, उस दिन इस स्कूल में खेल और संस्तृतिक से जुड़ी सलाना जोनल मीटिंग और पौधारोपण अभियान का आयोजन किया गया था, जिसके चलते यहां शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी भी मौजूद थे. अधिकारियों और स्कूल की मिड-डे मील कमेटी के सदस्यों के सामने भोजन की जांच की गई और उसे चखा गया, जिसके बाद बच्चों को खाना बांटना शुरू किया गया.

खाना बांटे जाने के दौरान भोजन वितरण में मदद कर रहे एक हेल्पर ने एक कंटेनर के अंदर मरी हुई छिपकली देखी. छिपकली देखे जाने की सूचना मिलते ही स्कूल प्रशासन ने तुरंत भोजन का वितरण रुकवा दिया और एनजीओ के प्रतिनिधियों और वितरकों को मौके पर बुलाकर घटना की जानकारी दी गई.

इस मामले के संबंध में एक पुलिस अधिकारी ने अख़बार को बताया, ‘मरी हुई छिपकली सबसे पहले उस व्यक्ति को दिखी जो छात्रों को पैकेज बांटने का काम करता है, उसने ही शोर मचाया.’

इसके बाद स्कूल प्रशासन ने भोजन का वितरण रुकवाकर हरिनगर थाने को सूचना दी. स्कूल की मिड-डे मील प्रभारी शैफाली पाठक और प्रचार्य डॉ. दिनकर सक्सेना द्वारा एक लिखित शिकायत पत्र हरिनगर थाना को दिया गया. शिकायत में अनुरोध किया गया कि पुलिस और एफएसएल की देखरेख में छिपकली और भोजन का सैंपल एकत्र किया जाए और मामले में एफआईआर दर्ज की जाए.

इस शिकायत के आधार पर घटना के सिलसिले में एफआईआर दर्ज की गई. पुलिस ने बताया कि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और एनजीओ के अधिकारियों से पूछताछ की गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि खाने तक छिपकली कैसी पहुंची.

बताया जा रहा है कि पुलिस के रिपोर्ट दर्ज किए जाने तक भोजन संबंधी किसी भी बच्चे की तबीयत खराब होने या किसी प्रतिकूल प्रभाव का कोई मामला सामने नहीं आया था.

गौरतलब है कि स्कूलों में मिड डे मील योजना की शुरुआत केंद्र सरकार की ओर से साल 1995 में की गई थी. शरू में इस योजना के तहत कई राज्यों में पका हुआ भोजन, तो कहीं सूखा अनाज दिया जाता था. लेकिन 2001 में सर्वोच्च न्यायलय के हस्तक्षेप के बाद सभी राज्यों में पका हुआ भोजन देना अनिवार्य किया गया. हालांकि इस योजना की व्यवस्था, जिसमें खाना, रसोई, बर्तन, रसोइया, इत्यादि शामिल हैं, पर नियमित और गंभीरता से ध्यान नहीं देने को लेकर अक्सर गड़बड़ी के मामले सामने आते रहते हैं.