मणिपुर: उखरुल में घात लगाकर किए गए हमले में असम राइफल्स के दो जवानों की मौत

हिंसाग्रस्त मणिपुर के उखरुल ज़िले में नोंगशोंग कोंग गांव के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-202 पर संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में असम राइफल्स के दो जवानों की मौत हो गई. मणिपुर सरकार ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि दोषियों को जल्द ही सज़ा दिलाई जाएगी.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: एक्स/@manipur_police)

नई दिल्ली: हिंसाग्रस्त मणिपुर के उखरुल ज़िले में सोमवार (6 जुलाई) शाम घात लगाकर किए गए एक हमले में घायल होने के बाद असम राइफल्स के दो जवानों की मौत हो गई. सुरक्षा बल देर रात तक इलाके में ऑपरेशन चलाते रहे.

जब द वायर ने आधिकारिक प्रतिक्रिया मांगी, तो असम राइफल्स के प्रवक्ता ने केवल इतना पुष्टि की कि ‘गोलीबारी में दो जवानों की मौत हुई है’ और कहा कि विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जाएगी.

रात 9:15 से 9:30 बजे के बीच संपर्क करने पर सेना के सूत्रों ने बताया कि ऑपरेशन जारी है और ज़मीनी हालात संवेदनशील बने हुए हैं.

मणिपुर पुलिस ने एक्स पर एक पोस्ट में मौतों की पुष्टि करते हुए कहा कि उखरुल थानाक्षेत्र में आने वाले नोंगशोंग कोंग गांव के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-202 पर संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में असम राइफल्स के दो जवान ‘शहीद’ हो गए.

पुलिस के अनुसार, हमले के बाद सुरक्षा बल घटनास्थल पर पहुंचे, जिसके बाद गोलीबारी हुई और उग्रवादियों को ‘निष्क्रिय’ करने के लिए अभियान चलाया जा रहा था.

हालांकि, घटनाओं का सटीक क्रम अभी स्पष्ट नहीं है क्योंकि ऑपरेशन अभी भी जारी है.

इस खबर के प्रकाशित होने के समय तक असम राइफल्स की ओर से घटना का कोई विस्तृत आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया गया था. कई स्थानीय सूत्रों ने द वायर को बताया कि ऑपरेशन के दौरान ज़मीन से बहुत कम सत्यापित जानकारी उपलब्ध थी.

इस बीच, सोशल मीडिया पर नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम (इसाक-मुइवा) की संलिप्तता के अपुष्ट दावे फैल रहे थे. लेकिन यूनाइटेड नगा काउंसिल (यूएनसी) के एसी थोट्सो ने जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष न निकालने की सलाह दी.

थोट्सो ने द वायर से कहा, ‘हमने ये खबरें केवल सोशल मीडिया के ज़रिए सुनी हैं. हमारे पास घटना या इसके पीछे कौन है, इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है. फिलहाल हमें ऐसा कोई कारण नहीं दिखता कि नगा पक्ष सीधे असम राइफल्स से टकराव करे. यह कोई साज़िश का हिस्सा भी हो सकता है. तथ्यों के सामने आने का इंतज़ार करना चाहिए.’

हमले की जगह के बारे में पूछे जाने पर थोट्सो ने कहा कि सोशल मीडिया पर चल रही जानकारी के अनुसार, ऐसा लगता है कि यह नोंगशोंग कोंग के आसपास कहीं हुआ है, साथ ही उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यूएनसी ने इस जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है.

द वायर ने ज़्यादा जानकारी के लिए कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन (केएसओ), उखरुल के अध्यक्ष से भी संपर्क किया, लेकिन संगठन ने कहा कि उन्हें इस घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘हालांकि हम उखरुल में हैं, लेकिन हमारी बस्तियां मुख्य रूप से लितान इलाके के आसपास हैं. आज की घटना के बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है.’

जिस जगह पर घात लगाकर हमला किया गया, वह इलाका मुख्य रूप से तंगखुल नगा आबादी वाला है, जैसा कि पूरा उखरुल ज़िला है.

केएसओ उखरुल की मीडिया प्रभारी मर्सी खोंगसाई ने द वायर को बताया, ‘8 फरवरी तक कुकी समुदाय – जो लितान के एक सीमित इलाके में रहते हैं – ज़िले के अलग-अलग हिस्सों में स्वतंत्र रूप से आ-जा सकते थे.’

उन्होंने आगे कहा, ‘हालांकि, 8 फरवरी की घटनाओं के बाद तंगखुल-कुकी रिश्तों में आई खटास के कारण उखरुल में हालात काफी बदल गए. ज़्यादातर कुकी अपने गांव छोड़कर चले गए और जो लोग बचे हैं, वे अब मुख्य रूप से नेशनल हाईवे 202 पर महादेव-लितान इलाके तक ही सीमित हैं, जिसमें तीन खास कुकी गांव शामिल हैं: शंगकाई, मोंगकोट चेपु और लितान सरेखोंग.’

इन गांवों की सुरक्षा केंद्रीय सुरक्षा बल करते हैं, और सुरक्षा कारणों से स्थानीय लोगों को इन सुरक्षित इलाकों से बाहर जाने की इजाज़त नहीं है.

इस बीच, मणिपुर सरकार ने इस हमले की कड़ी निंदा की और भरोसा दिलाया कि दोषियों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है.

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ‘मूकदर्शक बनकर नहीं रहेगी’ और दोषियों को जल्द ही सजा दिलाई जाएगी.

यह ताज़ा हमला मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय संघर्ष के बीच हुआ है. पिछले तीन सालों में इस हिंसा में 250 से ज़्यादा लोगों की जान गई है, हज़ारों लोग बेघर हुए हैं और केंद्रीय बलों व मणिपुर पुलिस के जवानों को भी नुकसान उठाना पड़ा है.

हालांकि मई 2023 में शुरू हुई हिंसा मणिपुर के मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच थी, लेकिन इस साल फरवरी में लितान में दोनों पक्षों के सदस्यों के बीच झगड़े के बाद राज्य के कुकी और नगा समुदायों के बीच एक अलग जातीय संघर्ष शुरू हो गया. इस संघर्ष में आम नागरिकों की हत्या और उन्हें बंधक बनाने के साथ-साथ घरों को आग लगाने की घटनाएं भी हुई हैं.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)