एसआईआर में मतदाता सूची से हटाए गए शख़्स को पासपोर्ट संबंधी राहत देने से हाईकोर्ट का इनकार

कलकत्ता हाईकोर्ट की जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच ने एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए गए एक व्यक्ति के पासपोर्ट आवेदन पर कार्रवाई का निर्देश देने से इनकार करते हुए कहा कि पहले नागरिकता के सवाल को सुलझाना ज़रूरी है.

भारतीय पासपोर्ट की प्रतीकात्मक तस्वीर. (फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स/मुरलीएसआर/ CC BY-SA 4.0 DEED)

नई दिल्ली: कलकत्ता हाईकोर्ट की जलपाईगुड़ी सर्किट बेंच ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए गए एक व्यक्ति के पासपोर्ट आवेदन पर कार्रवाई करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया है. अदालत ने कहा कि पहले ‘नागरिकता के सवाल’ को सुलझाना जरूरी है.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता सिराजुल शेख ने रिट याचिका के जरिए हाईकोर्ट से अनुरोध किया था कि उनके पासपोर्ट आवेदन को ‘होल्ड’ पर रखने का मामला सुलझाया जाए, ताकि वे विदेश जाकर इलाज करा सकें.

यह देखते हुए कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ शेख की कानूनी अपील अभी लंबित है, जस्टिस कौशिक चंदा की पीठ ने कहा कि एसआईआर अपीलीय अधिकरण को इस मामले पर शीघ्र सुनवाई करनी चाहिए.

पासपोर्ट कार्यालय ने शेख से उनका मूल मतदाता पहचान पत्र दिखाने को कहा था, लेकिन मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के कारण वे ऐसा नहीं कर सके. लाइव लॉ के अनुसार, उनका नाम सप्लीमेंट्री डिलीशन लिस्ट के जरिए हटाया गया था.

शेख की ओर से वकील अविसिक्ता दास ने अदालत में दलील दी कि अगर किसी व्यक्ति की पहचान, पता और जन्मतिथि अन्य दस्तावेजों से स्थापित हो जाती है, तो पासपोर्ट अधिनियम, 1967 और पासपोर्ट नियम, 1980 के तहत मतदाता पहचान पत्र अनिवार्य दस्तावेज नहीं है.

हालांकि, अदालत ने पासपोर्ट कार्यालय को शेख का ‘तत्काल’ पासपोर्ट शीघ्र जारी करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया.

लाइव लॉ के अनुसार, न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि एसआईआर अपीलीय अधिकरण के समक्ष मामलों की भारी संख्या को देखते हुए अपीलों के निपटारे में ‘21 वर्ष तक का समय लग सकता है.’

पिछले सप्ताह भी कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका में अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था. इस याचिका में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा एसआईआर के आधार पर खाद्य सब्सिडी के लाभार्थियों के नाम हटाने के फैसले को चुनौती दी गई थी. अदालत ने कहा था कि अब तक इस निर्णय से सीधे प्रभावित कोई व्यक्ति न्यायालय के समक्ष नहीं आया है.

इसी बीच, पिछले सप्ताह ही एसआईआर के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए गए एक वरिष्ठ पत्रकार का पासपोर्ट, व्यापक सार्वजनिक विरोध के बाद, ‘प्रिंटिंग के लिए भेज दिया गया’ था.