नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार (13 जुलाई) को वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में पूर्व नगर पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी ठहराया.
ख़बरों के अनुसार, पूर्वी दिल्ली जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने 48 वर्षीय हुसैन को हत्या, दंगा करने, मारपीट, आपराधिक बल प्रयोग और समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने जैसे आरोपों में दोषी ठहराया. हालांकि, अदालत ने पूर्व आम आदमी पार्टी (आप) पार्षद को आपराधिक साजिश और दंगे के लिए उकसाने के आरोपों से बरी कर दिया.
अदालत ने चार अन्य आरोपियों को भी हत्या को छोड़कर बाकी समान आरोपों में दोषी ठहराया, जबकि इस मामले में छह व्यक्तियों को बरी कर दिया. मामले का विस्तृत आदेश अभी उपलब्ध नहीं कराया गया है.
पुलिस के अनुसार, 26 वर्षीय अंकित शर्मा 25 फरवरी 2020 की दोपहर अपने घर से निकले थे. आरोप है कि ताहिर हुसैन के नेतृत्व और उकसावे में एक भीड़ ने उन्हें पकड़ लिया और विभिन्न हथियारों से पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी. इसके बाद उनका शव पूर्वी दिल्ली के चांद बाग इलाके में एक नाले में फेंक दिया गया.
वहीं, हुसैन और उनके वकीलों का कहना था कि 24 फरवरी की रात ही उन्हें उनके घर – जो अंकित शर्मा के घर के पास था – से पुलिस सुरक्षा में बाहर ले जाया गया था और 25 फरवरी को वे उस क्षेत्र में मौजूद नहीं थे.
हुसैन के एक वकील ने सोमवार को कहा कि वे जिला अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करेंगे.
वकील तारा नरूला ने पीटीआई से कहा, ‘निश्चित रूप से हम इस फैसले से निराश हैं. हमने अभी तक पूरा फैसला नहीं देखा है और न ही उसका अध्ययन किया है. मुझे पूरा विश्वास है कि यह बहुत लंबा फैसला होगा. हम निश्चित रूप से इसके खिलाफ अपील भी करेंगे.’
ताहिर हुसैन दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज उस व्यापक रूप से आलोचना झेल रहे ‘बड़ी साजिश’ (Larger Conspiracy) मामले में भी आरोपी हैं, जो 2020 के दिल्ली दंगों से संबंधित है. इन दंगों में अंकित शर्मा सहित कुल 53 लोगों की मौत हुई थी.
हुसैन ने वर्ष 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के उम्मीदवार के रूप में मुस्तफाबाद विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था, लेकिन वे तीसरे स्थान पर रहे. इस सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मोहन सिंह बिष्ट विजयी हुए थे.
द हिंदू ने सोमवार को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में बताया कि आम आदमी पार्टी (आप) ने एक बयान जारी कर ताहिर हुसैन से दूरी बनाते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें वर्ष 2020 में ही निलंबित कर दिया था और तब से उसका अपने पूर्व पार्षद से कोई संबंध नहीं है.
