नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शनिवार (8 अगस्त) को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं ने अपने अनुभवों के जरिए बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक, बढ़ती फीस और छात्र आंदोलनों पर पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों को सामने रखा.
केपी ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में राहुल गांधी ने अलग-अलग राज्यों और विश्वविद्यालयों से आए छात्रों से सीधे बातचीत की. उन्होंने युवाओं को देश की ताकत बताते हुए कहा कि 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था में युवा और डेटा सबसे महत्वपूर्ण संसाधन हैं. उनके मुताबिक, एक तरफ युवाओं का डेटा बड़े कारोबारी समूहों के पास जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ शिक्षा हासिल करने के बाद भी बड़ी संख्या में युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते बंद हैं.
कार्यक्रम में राहुल गांधी ने युवाओं की समस्याओं को ‘दर्द, डेटा और दौलत’ के तीन हिस्सों में बांटते हुए कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी में से एक है, लेकिन शिक्षा पर परिवारों का भारी खर्च होने के बावजूद डिग्री रोजगार की गारंटी नहीं देती. उन्होंने दावा किया कि हर 1,000 युवाओं में केवल 12 को स्थायी नौकरी मिलती है.
कार्यक्रम में राहुल गांधी के संबोधन के साथ-साथ उन छात्रों के अनुभव भी सामने आए, जिन्होंने अपनी पढ़ाई, भर्ती प्रक्रियाओं और आंदोलनों से जुड़े अनुभव साझा किए.
‘2018 से तैयारी कर रहा हूं, आज तक वैकेंसी नहीं आई’
बिहार से आए छात्र अविनाश ने बताया कि उन्होंने 2018 में शिक्षक भर्ती की तैयारी शुरू की थी और तब से लगातार उसी की तैयारी कर रहे हैं. उनका कहना था कि सरकारी विभागों में पद खाली होने के बावजूद नियमित भर्तियां नहीं निकाली जा रही हैं.
उन्होंने बताया कि 2022 से वह ‘उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग’ की भर्तियों की तैयारी भी कर रहे हैं, लेकिन अब तक नौ से दस भर्तियां लंबित हैं. उनका कहना था कि छात्रों की मांग है कि सरकारी नौकरियों के लिए एक नियमित भर्ती कैलेंडर बनाया जाए.
अविनाश ने भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की समस्या भी बताई. उन्होंने कहा कि एक परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद दोबारा परीक्षा होती है, लेकिन छात्रों का जो समय और मेहनत चली जाती है, उसकी भरपाई कौन करेगा.
उन्होंने कहा कि पेपर लीक के बाद छात्र खुद को बेहद असहाय महसूस करते हैं, ‘उस 10/10 के कमरे में कभी आप बैठकर सोचिए कि अगर हमारा पेपर लीक हो गया, हम किससे बात करें, किसको अपना मुंह दिखाएं कि यार मेरा इस बार भी नहीं हुआ, पेपर लीक हो गया. मैं किससे जाकर कहूं?’
‘बीएड के लिए जमीन बेच दी, चार साल से वैकेंसी नहीं’
कार्यक्रम में बिहार के ही हिमांशु कुमार ने अपनी कहानी सुनाते हुए कहा कि उनकी मां ने जमीन बेचकर उनकी बीएड की पढ़ाई कराई. वह पिछले चार-पांच साल से पटना में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं. उनके मुताबिक, हर महीने पढ़ाई और रहने पर 10 से 15 हजार रुपये खर्च होते हैं और परिवार के लिए यह खर्च उठाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है.
हिमांशु ने कहा कि वह स्टेट टीईटी, सीटीईटी और पीजीटी जैसी परीक्षाएं पास कर चुके हैं, लेकिन चार साल से शिक्षक भर्ती नहीं निकली. उन्होंने कहा कि उनके सामने अब दो ही विकल्प बचते दिखते हैं, चाय की दुकान खोलना या आत्महत्या करना. राहुल गांधी ने इस पर तुरंत कहा कि आत्महत्या कोई विकल्प नहीं हो सकता.
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ‘वॉटर कूलर में कीड़े आते हैं’
कार्यक्रम में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एक छात्र ने विश्वविद्यालय की बुनियादी सुविधाओं और बढ़ती फीस को लेकर अपना अनुभव साझा किया.
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय की लॉ फैकल्टी की लाइब्रेरी में बारिश के दौरान पानी भर जाता है. कई बार स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि छात्रों को बताया जाता है कि वहां पानी में करंट दौड़ रहा है.
छात्र ने विश्वविद्यालय में पीने के पानी की समस्या बताते हुए कहा कि जब वे डीएसडब्ल्यू कार्यालय गए और शिकायत की कि वॉटर कूलर में कीड़े आते हैं, तो उन्हें कथित तौर पर जवाब मिला, ‘विश्वविद्यालय पानी पीने की जगह नहीं है, आप घर से पानी लेकर आओ.’
छात्र ने यह भी कहा कि छात्र संगठन की गतिविधियों या सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए उन्हें 15-20 ज्ञापन देने पड़ते हैं, जबकि संघ के कार्यक्रम आसानी से हो जाते हैं.
उनके मुताबिक, विश्वविद्यालय ने फीस में 400 फीसदी की बढ़ोतरी की है. पूर्वांचल के 70 फीसदी से अधिक परिवारों की अधिकतम आय करीब 8,000 रुपये होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि हॉस्टल की फीस बढ़ाकर 30,000 रुपये कर दी गई है.
उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को सवाल पूछने और विरोध करने पर कार्रवाई का सामना करना पड़ता है. उनके अनुसार, कुछ छात्रों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं और डिग्री रोकने तक की धमकी दी जाती है.
‘50 फीसदी सीटें कम, फीस 400 फीसदी बढ़ी’
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के तीसरे वर्ष के छात्र कुणाल कुमार पांडे ने कहा कि विश्वविद्यालय में सीटों में 50 फीसदी तक की कटौती की जा रही है, जबकि फीस एक साथ 400 फीसदी बढ़ा दी गई है और हर साल 10 फीसदी बढ़ाने का प्रावधान है.
उन्होंने बताया कि छात्र पिछले करीब 30 दिनों से इसके खिलाफ धरना दे रहे हैं. उनके मुताबिक, धरना देने वाले छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और पांच छात्रों को विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश से भी रोक दिया गया.
बिहार में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई का आरोप
कार्यक्रम में पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ की स्वतंत्र रूप से निर्वाचित उपाध्यक्ष सिफत फैज ने भी छात्र आंदोलनों पर कार्रवाई का अपना अनुभव साझा किया.
उन्होंने 22 जुलाई को बिहार बंद के दौरान छात्रों के राजभवन मार्च का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया, पानी की बौछार और आंसू गैस का इस्तेमाल किया और छात्रों को हिरासत में लिया.
एक छात्र ने दावा किया कि लाठीचार्ज में उसके पैर में गंभीर चोट लगी और उसे अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस तक नहीं आने दी गई, जिसके बाद उसे स्कूटी से अस्पताल ले जाना पड़ा.
सिफत ने दावा किया कि कुछ छात्रों को बाद में भी उनके घरों और लाइब्रेरी से हिरासत में लिया गया. उन्होंने कहा कि छात्रों की मांग रोजगार और परीक्षाओं से जुड़ी है, लेकिन उन्हें आंदोलन करने के कारण कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है.
राहुल गांधी ने कहा: आपका दर्द, आपका डेटा, दौलत उनकी
इन अनुभवों के बाद राहुल गांधी ने रोजगार के रास्ते बंद होने की बात करते हुए कहा कि युवाओं के सामने सरकारी नौकरी, उद्यमिता और निजी क्षेत्र समेत रोजगार के कई रास्ते बंद होते जा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि सरकार की व्यवस्था में युवा अपना डेटा और मेहनत दे रहे हैं, लेकिन आर्थिक लाभ बड़े कारोबारी समूहों को मिल रहा है. उन्होंने इसे एक वाक्य में समेटते हुए कहा, ‘दर्द आपका, डेटा आपका, दौलत उनकी.’
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल से रोजगार के कुछ पारंपरिक रास्ते और प्रभावित हो सकते हैं. उनके मुताबिक, युवाओं के डेटा का इस्तेमाल एआई विकसित करने में हो रहा है, लेकिन इसका आर्थिक लाभ युवाओं तक नहीं पहुंच रहा.
कार्यक्रम का समापन राहुल गांधी के इस संदेश के साथ हुआ कि छात्र अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहें, लेकिन नफरत और हिंसा का रास्ता न अपनाएं. उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति सत्य और अहिंसा की है और युवाओं को ‘मोहब्बत की दुकान’ खोलनी है.
