हैदराबाद की लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों ने दीक्षांत समारोह में सीजेआई सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाने का विरोध किया

हैदराबाद की एनएएलएसएआर यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के छात्रों ने सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह का मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई है. छात्रों ने उनके हालिया बयानों और छात्र आंदोलनों के दौरान सुप्रीम कोर्ट के रुख का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है.

सीजेआई सूर्यकांत. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: हैदराबाद स्थित नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (एनएएलएसएआर) यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के छात्रों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत को अपने दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई है. द हिंदू के मुताबिक, छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से सीजेआई को मुख्य अतिथि बनाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है.

विश्वविद्यालय ने अभी दीक्षांत समारोह की तारीख की घोषणा नहीं की है और न ही सीजेआई की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि की है. हालांकि, छात्रों के बीच उनके मुख्य अतिथि बनाए जाने की जानकारी पहले से थी. एनएएलएसएआर में सीजेआई का दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना एक पुरानी परंपरा रही है.

छात्रों का विरोध सीजेआई के हालिया बयानों और दिल्ली में छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई के मामलों में उनकी अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ के रुख को लेकर है.

23 जुलाई को 2026 बैच के छात्रों ने विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार, प्रोफेसरों और प्रशासन को पत्र लिखकर सीजेआई को दीक्षांत समारोह का मुख्य अतिथि बनाए जाने के फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया. हालांकि, छात्रों के मुताबिक शनिवार तक विश्वविद्यालय ने न तो उनके पत्र की पुष्टि की थी और न ही इस पर अपना रुख बताया था.

पुलिस कार्रवाई पर सीजेआई के रुख से नाराजगी

छात्रों के विरोध का एक कारण हाल में दिल्ली में हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के आंदोलन के दौरान कथित पुलिस ज्यादती पर सुप्रीम कोर्ट का रुख भी है.

20 जुलाई को एनएएलएसएआर परिसर में इस विरोध की झलक पहली बार दिखाई दी थी, जब छात्रों ने नीट प्रदर्शनकारियों और जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के प्रति एकजुटता जताई थी. इसके दो दिन बाद छात्रों ने सामूहिक प्रदर्शन किया था.

इसी दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च के दौरान कथित पुलिस ज्यादती के खिलाफ सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू करने से इनकार कर दिया था.

सीजेआई की कुछ टिप्पणियां भी इस दौरान चर्चा में रहीं. उनके ‘वी आर नॉट इंटरेस्टेड इन वीडियोज, वी डोंट हैव टाइम टू वॉच देम’ और ‘डोंट वेस्ट आवर टाइम एंड डोंट वेस्ट योर टाइम’ जैसे कथित बयानों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे.

छात्रों ने अपने पत्र में इन्हीं बयानों और हालिया घटनाक्रम का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से सीजेआई को मुख्य अतिथि बनाने के फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा है.

छात्रों की आपत्ति क्यों महत्वपूर्ण है?

एनएएलएसएआर देश के प्रमुख कानून विश्वविद्यालयों में से एक है. ऐसे में वहां के अंतिम वर्ष के छात्रों का अपने दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि को लेकर सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताना खासा महत्वपूर्ण है.

छात्रों ने अपने पत्र में सीजेआई के व्यक्तिगत विरोध के बजाय उनके हालिया सार्वजनिक बयानों और संवैधानिक पद पर रहते हुए छात्र आंदोलनों से जुड़े मामलों में अदालत के रुख को अपनी आपत्ति का आधार बनाया है.

फिलहाल विश्वविद्यालय की ओर से छात्रों की मांग पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. यह भी स्पष्ट नहीं है कि दीक्षांत समारोह की अंतिम तारीख क्या होगी और उसमें सीजेआई मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे या नहीं.

टिस में दीक्षांत समारोह स्थगित

छात्रों का यह विरोध ऐसे समय में सामने आया है, जब देश के एक अन्य प्रमुख सामाजिक विज्ञान संस्थान टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टिस) में भी सीजेआई की मौजूदगी को लेकर छात्र असंतोष और कार्यक्रम स्थगित होने की घटना सामने आ चुकी है.

टिस ने अपने 86वें वार्षिक दीक्षांत समारोह से महज दो दिन पहले ‘अप्रत्याशित परिस्थितियों’ का हवाला देते हुए कार्यक्रम स्थगित कर दिया था. यह समारोह 2 अगस्त 2026 को होना था. इसमें सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत को मुख्य अतिथि और बॉम्बे हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रवींद्र घुगे को विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होना था.

समारोह स्थगित किए जाने की जानकारी संस्थान के रजिस्ट्रार ने 31 जुलाई की देर रात करीब 12:50 बजे ईमेल के जरिए दी थी.

ईमेल में रजिस्ट्रार ने लिखा, ‘हमें आपको यह बताते हुए खेद है कि कुछ अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण टिस का 86वां दीक्षांत समारोह, जो 2 अगस्त 2026 को आयोजित होना था, स्थगित कर दिया गया है. हम समझते हैं कि यह अवसर स्नातक होने वाले छात्रों, उनके परिवारों, फैकल्टी और स्टाफ के लिए कितना महत्वपूर्ण है. इस स्थिति में आपकी समझदारी और धैर्य के लिए हम आभारी हैं. नई तारीख और आगे की जानकारी जल्द साझा की जाएगी. इससे हुई किसी भी असुविधा के लिए हमें खेद है और आपके निरंतर सहयोग के लिए धन्यवाद.’

हालांकि, संस्थान ने सार्वजनिक रूप से जस्टिस सूर्यकांत का नाम मुख्य अतिथि के तौर पर घोषित नहीं किया था, लेकिन छात्रों के बीच इसकी जानकारी पहले से थी.

कई छात्रों का कहना है कि अंतिम समय में समारोह स्थगित करने का फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि प्रबंधन को आशंका थी कि दीक्षांत समारोह के दौरान विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं.

गौरतलब है कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का नाम और प्रेरणा सीजेआई सूर्यकांत की 15 मई की उस टिप्पणी से मिली थी, जिसमें उन्होंने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था, ‘समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं. क्या आप भी उनके साथ जुड़ना चाहते हैं? कुछ युवा ऐसे हैं, जो रोज़गार नहीं मिलने और पेशे में जगह न बना पाने के कारण कॉकरोच की तरह हर जगह फैल जाते हैं.’

हालांकि, बाद में सीजेआई ने स्पष्ट किया था कि उनके बयान को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया, लेकिन तब तक विवाद गहरा चुका था. मई में शुरू हुए इस आंदोलन के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और अंततः केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा.

इससे पहले द वायर ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि 28 जुलाई को आयोजित होने वाला जस्टिस एचआर खन्ना मेमोरियल लेक्चर भी स्थगित कर दिया गया था, जिसमें सीजेआई मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने वाले थे.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीजेआई को ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर उसमें शामिल होने से इनकार कर दिया था.

द वायर से बात करने वाले कई छात्रों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से पुलिसकर्मी कैंपस का दौरा कर रहे थे. उनका कहना था कि पुलिस को आशंका थी कि छात्र सीजेआई के खिलाफ प्रदर्शन कर सकते हैं.

कुछ छात्रों ने बताया कि इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उनके परिजन दूर-दराज़ से आए थे. उन्होंने दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए नॉन-रिफंडेबल टिकट बुक कराए थे और अन्य व्यवस्थाएं भी की थीं.

कैंपस में छात्रों के अनौपचारिक समूह ‘प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स फोरम’ ने भी समारोह स्थगित किए जाने की आलोचना की थी. समूह ने मांग की थी कि या तो दीक्षांत समारोह मूल कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किया जाए या छात्रों को उनकी डिग्री और दूसरे जरूरी दस्तावेज तत्काल जारी किए जाएं.