लखीमपुर खीरी हिंसा: यूपी पुलिस बोली- टेनी, उनके बेटे द्वारा गवाह को धमकाने का कोई सबूत नहीं

2021 लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय कुमार मिश्रा 'टेनी' के बेटे आशीष मिश्रा उर्फ़ 'मोनू' मुख्य आरोपी हैं और बलजिंदर सिंह नाम के एक शख़्स चश्मदीद गवाह हैं. बलजिंदर ने आरोप लगाया था कि एक स्थानीय के ज़रिये मिश्रा ने अगस्त 2023 में उन्हें दो बार धमकाया था. इस मामले में स्थानीय पुलिस द्वारा कथित तौर पर उनकी शिकायत दर्ज करने से इनकार करने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है.

लखीमपुर खीरी के तिकोनिया इलाके में 3 अक्टूबर 2021 को हुई हिंसा में क्षतिग्रस्त हुआ एक वाहन. (फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: लखीमपुर खीरी के बहुचर्चित हिंसा मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि उन्हें पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ और उनके बेटे आशीष मिश्रा के खिलाफ ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो सके कि इन दोनों का इस केस के गवाह को धमकाने से कोई संबंध है.

मालूम हो कि इस मामले में बीते साल अक्तूबर में इन दोनों बाप-बेटे के साथ ही ज़िला पंचायत के पूर्व सदस्य अमनदीप सिंह और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने, धमकी देने और गवाह को झूठी गवाही देने के लिए धमकाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी. इन लोगों पर बलजिंदर सिंह को गवाही देने से रोकने के लिए धमकाने का आरोप लगा था.

बलजिंदर सिंह 2021 की हिंसा के मामले में चश्मदीद गवाह हैं, जिसमें आशीष मिश्रा उर्फ़ ‘मोनू’ मुख्य आरोपी हैं.

उल्लेखनीय है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों पर लखीमपुर खीरी पुलिस ने दर्ज किया था. शिकायतकर्ता बलजिंदर सिंह ने स्थानीय पुलिस द्वारा कथित तौर पर उनकी शिकायत दर्ज करने से इनकार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. बलजिंदर सिंह ने आरोप लगाया कि अगस्त 2023 में उन्हें दो बार धमकाया गया था.

2021 का लखीमपुर खीरी मामला

गौरतलब है कि 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आठ लोगों की मौत हुई थी – चार किसान, एक पत्रकार, दो भाजपा कार्यकर्ता और उनका ड्राइवर. चार किसानों और पत्रकार की हत्या के मामले में आशीष मिश्रा मुख्य आरोपी हैं.

तीन अक्टूबर, 2021 को लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में हिंसा में तब आठ लोग मारे गए थे, जब किसान उत्तर प्रदेश के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के क्षेत्र में दौरे का विरोध कर रहे थे.

आरोप है कि इस दौरान अजय मिश्रा से संबंधित महिंद्रा थार सहित तीन एसयूवी के एक काफिले ने तिकोनिया क्रॉसिंग पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को रौंद दिया था, जिसमें चार किसानों और एक पत्रकार की मौत हो गई थी और लगभग आधा दर्जन लोग घायल हुए थे.

मामले में अजय मिश्रा के पुत्र आशीष मिश्रा और उसके दर्जन भर साथियों के खिलाफ चार किसानों को थार जीप से कुचलकर मारने और उन पर फायरिंग करने जैसे कई गंभीर आरोप हैं.

उत्तर प्रदेश पुलिस की एफआईआर के मुताबिक, एक एसयूवी ने चार किसानों को कुचल दिया था, जिसमें आशीष मिश्रा भी सवार था. घटना से आक्रोशित किसानों ने एसयूवी के चालक और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो कार्यकर्ताओं की कथित तौर पर हत्या कर दी थी. हिंसा में एक पत्रकार भी मारा गया था.

इस घटना के संबंध में दो एफआईआर दर्ज की गई थी. पहली एफआईआर किसानों की ओर से आशीष मिश्रा और अन्य के खिलाफ दर्ज कराई गई थी. वहीं, दूसरी एफआईआर भाजपा कार्यकर्ता सुमित जायसवाल ने अज्ञात किसानों के खिलाफ दर्ज करवाई थी; सुमित जायसवाल पहले मामले में आरोपियों में से एक हैं.

राज्य सरकार द्वारा गठित एक विशेष जांच दल (एसआईटी) ने किसानों की हत्या के मामले में दर्ज एफआईआर के तहत 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. 14वें आरोपी, वीरेंद्र शुक्ला का नाम धारा 201 (सबूत मिटाने) के तहत चार्जशीट में जोड़ा गया था.

भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या से जुड़ी दूसरी एफआईआर में चार किसानों – गुरुविंदर सिंह, कमलजीत सिंह, गुरप्रीत सिंह और विचित्र सिंह – के खिलाफ आरोप तय किए गए थे.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले की निगरानी

इस संबंध में 16 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट, जो मूल मामले की सुनवाई पर बारीकी से नज़र रख रहा है, को गवाहों को डराने-धमकाने वाली एफआईआर के बारे में एक स्टेटस रिपोर्ट सौंपी गई है.

यूपी पुलिस ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी. मोहना की बेंच को बताया कि जांच के दौरान अजय मिश्रा और उनके बेटे के खिलाफ लगे आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी है.

इस मामले में चार्जशीट सिर्फ़ उनके सह-आरोपी अमनदीप सिंह के खिलाफ़ दाखिल की गई, जिनकी पत्नी लखीमपुर के निघासन में ब्लॉक प्रमुख हैं.

यूपी पुलिस की ओर से पेश वकीलों ने कोर्ट को बताया कि गवाह को डराने-धमकाने के मामले की जांच पूरी हो गई है. पुलिस की ओर से सौंपी गई स्टेटस रिपोर्ट को पढ़ते हुए सीजेआी सूर्यकांत ने कहा कि अजय मिश्रा और आशीष मिश्रा कथित अपराध में शामिल नहीं पाए गए हैं.

अमनदीप सिंह के खिलाफ मई में भारतीय दंड संहिता की धारा 195A (गवाह को झूठी गवाही देने के लिए धमकाना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत चार्जशीट दाखिल की गई थी.

इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट का विस्तृत आदेश अभी अपलोड नहीं किया गया है, लेकिन मामले से जुड़े सूत्रों ने द वायर को पुष्टि की है कि पुलिस जांच में मिश्रा परिवार को दोषमुक्त पाया गया और यह निष्कर्ष निकाला गया कि अमनदीप ने अकेले ही यह काम किया था.

द वायर से बात करते हुए अमनदीप सिंह ने बलजिंदर सिंह द्वारा उन पर लगाए गए डराने-धमकाने और प्रलोभन देने के सभी आरोपों का खंडन किया.

अमनदीप सिंह ने कहा, ‘वह जो कुछ भी कह रहे हैं, वह झूठ है.’

अमनदीप सिंह ने यह भी दावा किया कि वह बलजिंदर सिंह के बुलाने पर उनके घर गए थे और उनसे सिर्फ़ मामले में सच-सच गवाही देने के लिए कहा था.

अमनदीप ने कहा, ‘मैंने उन्हें बस यह याद दिलाया कि गुरु ग्रंथ साहिब में कहा गया है कि इंसान को हमेशा सच गवाही देनी चाहिए. मैंने उनसे ऐसा ही करने को कहा. मैंने उनसे किसी के पक्ष या विपक्ष में गवाही देने के लिए नहीं कहा.’

उल्लेखनीय है कि हिंसा से जुड़े दोनों मामलों की सुनवाई स्थानीय अदालत में चल रही है.

ज्ञात हो कि बलजिंदर सिंह, आशीष मिश्रा और अन्य लोगों के खिलाफ गवाहों में से एक हैं. 3 अक्टूबर 2021 की घटना में मिश्रा परिवार की तेज़ रफ़्तार गाड़ियों में से एक की टक्कर लगने से वे घायल हो गए थे.

उस समय अजय मिश्रा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और खीरी से सांसद थे. 2024 के चुनाव में वे अपनी सीट हार गए.

बलजिंदर सिंह की शिकायत

उधर, पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में बलजिंदर सिंह ने कहा है कि उन्हें 16 अगस्त 2023 को अदालत में गवाही देनी थी.

उन्होंने बताया कि इससे एक दिन पहले (15 अगस्त) सुबह करीब 10:30 बजे अमनदीप सिंह अपने एक साथी के साथ उनके घर पहुंचे थे.

बलजिंदर ने आरोप लगाया कि अमनदीप ने उन पर गवाही न देने का दबाव डाला और उन्हें धमकी दी. बलजिंदर का यह भी आरोप है कि अमनदीप ने उन्हें पैसे का लालच देने की कोशिश की; उन्होंने बताया कि उन्होंने इस बातचीत को अपने फोन पर रिकॉर्ड कर लिया था.

बलजिंदर ने बताया कि अमनदीप सिंह की धमकी से डरकर वह उसी शाम रामनगरी पतरासी में अपने ससुराल चले गए. उन्होंने आरोप लगाया कि अगली सुबह, जब वह कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे थे, तब अमनदीप सिंह और एक अन्य व्यक्ति उनके ससुराल आए और एक बार फिर उन पर गवाही न देने का दबाव डाला, उन्हें धमकाया और ज़बरदस्ती 1 लाख रुपये नकद देने की कोशिश की, जिसे उन्होंने लेने से मना कर दिया.

उन्होंने कहा, ‘मैंने पूरी बातचीत अपने मोबाइल पर रिकॉर्ड कर ली.’

बलजिंदर ने आरोप लगाया कि अमनदीप को अजय मिश्रा ने भेजा था. बलजिंदर ने बताया कि अमनदीप की धमकियों और मिश्रा पिता-पुत्र की जोड़ी के डर से उन्होंने गांव में अपनी सारी ज़मीन लीज़ पर दे दी और अपने परिवार के साथ पंजाब चले गए. बलजिंदर ने कहा कि उन्हें डर था कि वे उनकी हत्या करवा सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट में आशीष मिश्रा की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे ने कहा कि आशीष मिश्रा के खिलाफ मुकदमे में अभी 62 गवाहों की गवाही होनी बाकी है. उन्होंने कहा कि सभी चश्मदीद गवाहों से पूछताछ हो चुकी है.

मालूम हो कि अभियोजन पक्ष ने शुरू में इस मामले में 208 गवाहों की पहचान की थी, लेकिन सिर्फ़ 131 से पूछताछ करने का फैसला किया. पंद्रह गवाहों को हटा दिया गया.

(उमर राशिद स्वतंत्र पत्रकार हैं.)

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