नॉर्थईस्ट डायरी: ज़मानत मिलने के बाद असम सरकार ने आदिवासी कार्यकर्ता पर रासुका लगाया, हिरासत जारी

इस हफ्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय के प्रमुख समाचार.

आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: असम के आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले को कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत हिरासत में ले लिया गया है. यह कार्रवाई उन्हें असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पास प्रस्तावित पांच सितारा होटल के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में अदालत से जमानत मिलने के एक दिन बाद की गई.

डोले को 13 जुलाई को गुवाहाटी से गिरफ्तार करने के बाद गोलाघाट जिला जेल में रखा गया था. जून में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में बुधवार को अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी.

हालांकि, गुरुवार को राज्य सरकार ने उनके खिलाफ रासुका लगा दिया, जिससे यह सुनिश्चित हो गया कि उन्हें उसी गोलाघाट जिला जेल में हिरासत में रखा जाएगा. यह बात सरकारी आदेश में कही गई है.

द वायर द्वारा देखे गए इस सरकारी आदेश में कहा गया है कि सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि डोले की गतिविधियां ‘सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और राज्य की सुरक्षा के लिए हानिकारक’ हैं और अगर उन्हें रिहा किया गया तो उनके ऐसी गतिविधियां जारी रखने की वास्तविक और आसन्न संभावना है.’

आदेश में हिरासत के कई कारण बताए गए हैं, जिनमें पिछले एक दशक में डोले के खिलाफ़ दर्ज कई आपराधिक मामले शामिल हैं. कहा गया है कि उन्होंने ‘सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के खिलाफ़ काम किया’ और इन मामलों में सरकारी कर्मचारियों पर हमला, दंगा, सुनियोजित हिंसा और अन्य अपराध शामिल हैं. इसमें यह भी कहा गया है कि ऐसा लगता है कि डोले ‘संदिग्ध स्रोतों से संदिग्ध विदेशी लेन-देन’ में शामिल रहे हैं.

आदेश में कहा गया है कि एहतियाती हिरासत आवश्यक है. राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 की धारा 3(2) के तहत जारी इस आदेश में निर्देश दिया गया है कि डोले को हिरासत में लेकर गोलाघाट जिला जेल में रखा जाए.

मालूम हो कि प्रणब डोले यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के निकट प्रस्तावित पांच सितारा होटल के खिलाफ चल रहे आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं. उनका आरोप है कि यह परियोजना क्षेत्र की नाज़ुक पारिस्थितिकी के लिए खतरा पैदा करेगी.

31 जुलाई को एक बयान में ग्रेटर काजीरंगा भूमि और मानवाधिकार संरक्षण समिति, जिसके डोले संयोजक और संस्थापक हैं- ने डोले के खिलाफ रासुका लगाने के असम सरकार के कदम की निंदा की. समिति ने कहा कि यह ‘भारतीय संविधान में निहित लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और मूल निवासियों के अधिकारों और लोकतांत्रिक दावे के लिए खतरा है.’

बयान में कहा गया, ‘इसे पुलिस और प्रशासन की एक सोची-समझी चाल के तौर पर देखा जा सकता है, जिसका मकसद (डोले) को जमानत देने वाले सेशन कोर्ट के फैसले को पलटना और नाकाम करना है.’

इसमें आगे कहा गया कि हयात और असम सरकार के आने वाले लग्जरी होटल के मामले में, डोले उन आदिवासी परिवारों के साथ खड़े थे जिन्होंने अपनी खेती की जमीन और आजीविका छोड़ने से इनकार कर दिया था.

किसान अधिकार कार्यकर्ता डोले ने अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव में बोकाखाट निर्वाचन क्षेत्र से राज्य के कैबिनेट मंत्री और असम गण परिषद (एजीपी) के अध्यक्ष अतुल बोरा के खिलाफ चुनाव भी लड़ा था, लेकिन वे हार गए थे.

अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू भारत के चौथे सबसे अमीर मुख्यमंत्री: एडीआर

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की एक रिपोर्ट के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू क्षेत्र के सबसे धनी और पूरे देश के चौथे सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं. वहीं, मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा पूर्वोत्तर के उन मुख्यमंत्रियों में शामिल हैं, जिनकी घोषित संपत्ति अपेक्षाकृत कम है.

बता दें कि हाल के समय में ही मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार पर भ्रष्टाचार के के आरोप लगे हैं और उनकी सीबीआई जांच का आदेश दिए गए हैं. आरोप यह है कि जनवरी 2015 से दिसंबर 2025 तक के 10 वर्षों में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़ी कंपनियों को 1,270 करोड़ रुपये के ठेके दिए गए थे.

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू. (फोटो साभार: X/@PemaKhanduBJP)

यह रिपोर्ट 28 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 31 मुख्यमंत्रियों द्वारा चुनाव के दौरान दाखिल किए गए हलफनामों के आधार पर तैयार की गई है.

रिपोर्ट के अनुसार, पेमा खांडू ने 332.56 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है. वह देश के उन चार मुख्यमंत्रियों में से एक हैं जिनकी संपत्ति अरबों में है.

इसके विपरीत, मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने 14.06 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है. उनके बाद त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा हैं, जिनकी घोषित संपत्ति 13.90 करोड़ रुपये है.

पूर्वोत्तर के अन्य प्रमुख नेताओं में नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो शामिल हैं, जो 46.95 करोड़ रुपये की घोषित संपत्ति के साथ राष्ट्रीय स्तर पर पांचवें स्थान पर हैं. वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने 35.16 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है.

रिपोर्ट में मुख्यमंत्रियों की देनदारियों (Liabilities) का भी विवरण दिया गया है. पेमा खांडू ने 180.27 करोड़ रुपये की देनदारियां घोषित की हैं, जो कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बाद देश में दूसरे स्थान पर हैं. वहीं, हिमंता बिस्वा शर्मा 16.86 करोड़ रुपये की घोषित देनदारियों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर तीसरे स्थान पर हैं.

पूर्वोत्तर के अन्य मुख्यमंत्रियों में सिक्किम के मुख्यमंत्री पीएस तमांग ने 6.69 करोड़ रुपये और मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने 4.13 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है. मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की घोषित कुल संपत्ति 2.38 करोड़ रुपये है.

एडीआर के विश्लेषण के अनुसार, भारत के मुख्यमंत्रियों की औसत घोषित संपत्ति 118.07 करोड़ रुपये है. सभी 31 मुख्यमंत्रियों ने मिलकर 3,660 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की है, जबकि उनकी औसत स्व-घोषित आय 6.54 करोड़ रुपये है.

मणिपुर: कांगपोकपी में विस्थापित लोगों ने फंड जारी करने में देरी के खिलाफ प्रदर्शन किया, समय पर मदद की मांग की

कांगपोकपी जिला आंतरिक रूप से विस्थापित कल्याण समिति (केडीआईडीडब्ल्यूसी) के बैनर तले आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों ने रुके हुए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) की फंड तुरंत जारी करने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन किया.

नॉर्थईस्ट नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक, सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कांगपोकपी जिले में 15,694 आंतरिक रूप से विस्थापित लोग दर्ज किए गए हैं, जो मणिपुर के सभी जिलों में सबसे अधिक है.

मणिपुर के कांगपोकपी ज़िले का एक राहत शिविर. (फोटो: पीटीआई)

कांगपोकपी जिला मुख्यालय पर प्रदर्शनकारियों ने लंबित डीबीटी सहायता तुरंत जारी करने, शिक्षा संबंधी सहायता उपलब्ध कराने और राहत शिविरों में रहने वाले और शिविरों के बाहर रहने वाले विस्थापितों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव न करने की मांग करते हुए नारे लगाए.

केडीआईडीडब्ल्यूसी ने कहा कि जुलाई की आर्थिक सहायता मिलने में देरी के कारण परिवारों को खाना और दवाइयां खरीदने तथा स्कूल की फीस भरने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

समिति ने मणिपुर सरकार से अपील की कि डीबीटी राशि के वितरण के लिए हर महीने एक निश्चित समय-सारिणी तय की जाए और सभी पात्र विस्थापित परिवारों को समय पर सहायता उपलब्ध कराई जाए.

राज्य के विभिन्न जिलों में यह विरोध प्रदर्शन ऐसे आरोपों के बाद शुरू हुए कि राज्य सरकार ने निर्धारित राहत शिविरों के बाहर रहने वाले विस्थापित परिवारों – जैसे किराए के मकानों या रिश्तेदारों के यहां रह रहे लोगों – के लिए दी जाने वाली मासिक राशन सहायता बंद कर दी है.

मेघालय: श्री सीमेंट की जनसुनवाई के दौरान ईस्ट जयंतिया हिल्स में तनाव, विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रक्रिया पूरी

मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले में शनिवार (1 अगस्त) को श्री सीमेंट की प्रस्तावित लुम सिरमन लाइमस्टोन माइनिंग ब्लॉक-ए परियोजना की जनसुनवाई के दौरान तनाव की स्थिति बनी रही.

नॉर्थईस्ट टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, जनसुनवाई के बीच विभिन्न जगहों पर विरोध प्रदर्शन और झड़पों की खबरें सामने आईं, हालांकि अधिकारियों के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया के तहत जनसुनवाई पूरी कर ली गई.

(प्रतीकात्मक फोटो: फेसबुक/West Garo Hills Police)

जनसुनवाई के दौरान कुछ संगठनों ने परियोजना का विरोध किया, जबकि कई स्थानीय नेताओं ने इसके समर्थन में अपनी बात रखी. उनका कहना था कि इस परियोजना से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी.

उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन टिनसोंग ने साफ़ किया कि जन-सुनवाई एक कानूनी ज़रूरत थी और इसका मतलब माइनिंग प्रोजेक्ट को मंज़ूरी मिल जाना नहीं है. उन्होंने कहा कि आगे कोई भी फ़ैसला लेने से पहले पर्यावरण से जुड़े सभी नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा.

इस बीच, खबरों के अनुसार उमप्लेंग बाजार के पास पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े. आरोप है कि हिनिएवट्रेप स्टूडेंट्स यूथ फ्रंट (एचएसवाईएफ)के सदस्यों ने जनसुनवाई में उन लोगों को शामिल होने से रोकने की कोशिश की, जिन्हें वे बाहरी बता रहे थे.

एचएसवाईएफ ने आरोप लगाया कि इस दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया. हालांकि, घटना को लेकर अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था.

बताया गया है कि तनाव लाड टोंगसेंग के पास भी बढ़ गया, जहां जनसुनवाई में भाग लेने जा रहे लोगों को कथित तौर पर रोक दिया गया. आरोप है कि सड़क के एक हिस्से को खोद दिए जाने के कारण उनका रास्ता अवरुद्ध हो गया.

जयंतिया स्टूडेंट्स यूनियन (जेएसयू) ने आरोप लगाया कि अशांति के दौरान घायल लोगों की मदद के लिए जा रही उसकी एंबुलेंस और चिकित्सा दल पर हमला किया गया.

बता दें कि इससे पहले बीते जून महीने में प्रस्तावित 1,800 करोड़ रुपये की एकीकृत सीमेंट संयंत्र और चूना पत्थर खनन परियोजना पर होने वाली जन सुनवाई को विरोध के चलते अधिकारियों को इसे रद्द करना पड़ा था.

मणिपुर: चूड़ाचांदपुर के जोमी नेताओं ने इंफाल में मुख्यमंत्री से मुलाकात की, शांति बहाली के सरकारी कोशिशों का समर्थन

मणिपुर में सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत यूनिफाइड ज़ोउ ऑर्गेनाइजेशन (यूजेडओ), जोमी चीफ एसोसिएशन (जेडसीए) और जोमी काउंसिल (जेडसी) के प्रतिनिधियों ने शुक्रवार (31 जुलाई) को इंफाल स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय में मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह से मुलाकात की.

यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि मई 2023 में राज्य में जातीय हिंसा भड़कने के बाद पहली बार इन तीनों जोमी संगठनों के प्रतिनिधि एक साथ चूड़ाचांदपुर से इंफाल जाकर मुख्यमंत्री से मिले.

नॉर्थईस्ट टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को चूड़ाचांदपुर जिले से जुड़े विभिन्न मुद्दों की जानकारी दी और राज्य में स्थायी शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के सरकार के प्रयासों का समर्थन व्यक्त किया. प्रतिनिधियों ने विभिन्न समुदायों के बीच आपसी विश्वास मजबूत करने के उपायों पर भी चर्चा की और चूड़ाचांदपुर में एक मल्टी-यूटिलिटी हॉल के निर्माण का प्रस्ताव सरकार को सौंपा.

सामाजिक कार्यकर्ता जोसेफ वाल्टे, जो दिवंगत विधायक वुंगज़ागिन वाल्टे के पुत्र हैं, ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल को उम्मीद है कि मणिपुर में जल्द ही शांति और समृद्धि लौटेगी.

जोमी काउंसिल के अध्यक्ष वुमसुआन नौलाक ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य मुख्यमंत्री को चूड़ाचांदपुर की स्थिति से अवगत कराना और विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास बहाली में योगदान देना था.

उन्होंने कहा, ‘यह बैठक सौहार्दपूर्ण और रचनात्मक रही. लोगों को विकास और स्थायी शांति के लिए साथ मिलकर काम करने का अवसर देने और संवाद की पहल करने के लिए हम राज्य सरकार के आभारी हैं.’ उन्होंने आशा जताई कि जल्द ही सभी समुदायों के लोग बिना किसी बाधा के एक-दूसरे से मिल सकेंगे और राज्य की प्रगति के लिए मिलकर काम करेंगे.

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार शांति स्थापित करने, सभी समुदायों के बीच सौहार्द बढ़ाने और सामान्य जीवन की वापसी के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने दोहराया कि सरकार वर्तमान स्थिति का शांतिपूर्ण, समावेशी और स्थायी समाधान निकालने के लिए सभी पक्षों के साथ संवाद जारी रखेगी.