नई दिल्ली: अडानी एंटरप्राइजेज ने 29 जुलाई को वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए, जिसमें घाटा दर्ज किया गया. कंपनी ने इसका एक बड़ा कारण ईरानी गैस की शिपिंग से जुड़े मामले में अमेरिकी ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (ओएफएसी) को 2,644 करोड़ रुपये का भुगतान बताया.
मई में अमेरिकी वित्त विभाग (यूएस ट्रेजरी डिपार्टमेंट) ने घोषणा की थी कि ईरान पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन के मामले में अडानी एंटरप्राइजेज ने 27.5 करोड़ डॉलर (275 मिलियन डॉलर) में समझौता किया है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, गौतम अडानी समूह की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज ने 30 जून को समाप्त तिमाही में 1,160 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड शुद्ध घाटा दर्ज किया.
कंपनी का कुल खर्च करीब 54 प्रतिशत बढ़कर 32,252 करोड़ रुपये हो गया. कच्चे माल की लागत 14,255 करोड़ रुपये रही, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 3,393 करोड़ रुपये थी. पिछली तिमाही में कंपनी ने 17 तिमाहियों में पहली बार घाटा दर्ज किया था.
कंपनी ने कहा कि पहली तिमाही के नतीजों पर वैश्विक अस्थिरता के कारण ईंधन की बढ़ी कीमतों से लागत बढ़ने का असर पड़ा.
द वायर ने पहले अपनी रिपोर्ट में बताया था कि यह मामला नवंबर 2023 से जून 2025 के बीच दुबई स्थित एक आपूर्तिकर्ता के माध्यम से आयातित तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) से जुड़ा है. ओएफएसी द्वारा जारी समझौता आदेश से संबंधित प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अडानी एंटरप्राइजेज इन लेन-देन में मौजूद ‘रेड फ्लैग्स’ (संदेह के संकेत) की पहचान करने में विफल रही.
ओएफएसी के अनुसार, इसके चलते अडानी एंटरप्राइजेज ने अमेरिकी वित्तीय संस्थानों के माध्यम से 19.2 करोड़ डॉलर (192 मिलियन डॉलर) के 32 डॉलर-आधारित भुगतान कराए. यह एलपीजी खेपें नवंबर 2023 से जून 2025 के बीच गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह के जरिए भारत लाई गई थीं.
इस बीच, गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी ने अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड से जुड़े उस मामले में अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (एसईसी) के आरोपों के निपटारे के लिए 1.8 करोड़ डॉलर (18 मिलियन डॉलर) का प्रस्तावित जुर्माना भरने पर सहमति जताई है. एसईसी ने आरोप लगाया है कि भारतीय अधिकारियों को रिश्वत दी गई थी या देने का वादा किया गया था. हालांकि, दोनों ने इन आरोपों को न तो स्वीकार किया है और न ही खारिज किया है.
