अभिजीत दिपके बोले- भाजपा गुंडों से भरी पार्टी, कहा- लड़ाई अभी ख़त्म नहीं

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सत्तारूढ़ भाजपा को 'गुंडों से भरी पार्टी' बताते हुए कहा कि भारत में लोकतंत्र पर गंभीर ख़तरा मंडरा रहा है क्योंकि न्यायपालिका पर एक बड़ा 'सवालिया निशान' लगा हुआ है. उन्होंने कहा कि जिन संस्थाओं पर लोकतंत्र को ज़िंदा रखने और यह सुनिश्चित करने का ज़िम्मा था कि किसी एक व्यक्ति की तानाशाही न हो, वे इसमें नाकाम रहीं.'

सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले में अपने घर पहुंचने के बाद मीडिया से बात करते हुए. (फोटोः पीटीआई)

नई दिल्ली: बीते दिनों युवाओं के प्रदर्शन की अगुवाई कर चुकी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा है कि भारत में लोकतंत्र पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है और न्यायपालिका पर बड़ा ‘सवालिया निशान’ लगा हुआ है.

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दिपके ने गुरुवार (30 जुलाई) को कहा कि हमारे देश में लोकतंत्र पर गंभीर खतरा है क्योंकि हमारी न्यायपालिका पर एक बड़ा सवालिया निशान है. राजनीतिक दलों को तोड़ने के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का इस्तेमाल किया जा रहा है.

उन्होंने आगे कहा, ‘हमने अपने राज्य में देखा कि कैसे इन दोनों एजेंसियों की मदद से शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को तोड़ा गया. लोकतंत्र की सभी संस्थाएं चुप रहीं. लोकतंत्र को ज़िंदा रखना और यह सुनिश्चित करना कि किसी एक व्यक्ति की तानाशाही न हो, उनका काम था, लेकिन वे इसमें नाकाम रहीं.’

अभिजीत दिपके ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि सरकार के साथ उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. उन्होंने नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए.

मालूम हो कि नीट पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर युवाओं के देशव्यापी आंदोलन के दबाव के बीच बीते 25 जुलाई को तत्कालिन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद प्रह्लाद जोशी को इस मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है.

दिपके ने कहा, ‘वे धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर एक ऐसे व्यक्ति को ले आए हैं, जिसने बिलकीस बानो मामले के दोषियों की रिहाई का स्वागत किया था. आप कैसा संदेश दे रहे हैं? लेकिन वे और क्या कर सकते हैं? उनकी पूरी पार्टी गुंडों से भरी पड़ी है. उनके पास कुलदीप सेंगर जैसे लोग हैं. उनकी सरकार में राम रहीम पैरोल पर बाहर आ जाता है. यह सरकार बलात्कारियों का समर्थन करने वाली सरकार है.’

गौरतलब है कि इससे पहले प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने भी प्रह्लाद जोशी को नया शिक्षा मंत्री बनाए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया था. पार्टी का आरोप था कि 2002 के गुजरात दंगों के दौरान गर्भवती बिलकीस बानो से सामूहिक बलात्कार और उनके परिवार के कई सदस्यों की हत्या के दोषी 11 लोगों की समय से पहले रिहाई पर जोशी ने ‘सहमति और खुशी जताई थी.’

लोकसभा में  मंगलवार (28 जुलाई) को कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने प्रह्लाद जोशी को नया शिक्षा मंत्री बनाने पर सवाल उठाते हुए कहा था कि ऐसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बनाया गया जिसने गर्भवती महिला से बलात्कार करने वालों की रिहाई पर सहमति जताई और खुशी भी जाहिर की. प्रधानमंत्री इस देश की करोड़ों महिलाओं को क्या संदेश देना चाहते थे?

वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सदन के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि पिछले सप्ताह शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन कर रही महिलाओं सहित अन्य प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसे व्यक्ति को नया शिक्षा मंत्री बनाया है जो ‘बलात्कारियों का बचाव करने वाले’ हैं.

राहुल गांधी ने आगे कहा था, ‘इससे ज़्यादा घटिया इंसान कोई नहीं हो सकता जो कहे कि बलात्कारियों को सुरक्षा की ज़रूरत है. वही भारत का शिक्षा मंत्री है. प्रधानमंत्री की यह बहुत अजीब फैसला है. उनके मंत्रिमंडल में इतने लोग हैं, वे किसी को भी चुन सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसे व्यक्ति को चुना जो बलात्कारियों का बचाव करता है.’

गौरतलब है कि 15 अगस्त 2022 को अपनी क्षमा नीति के तहत गुजरात की भाजपा सरकार द्वारा माफी दिए जाने के बाद सभी 11 दोषियों को 16 अगस्त को गोधरा के उप-कारागार से रिहा कर दिया गया था. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में जेल से बाहर आने के बाद बलात्कार और हत्या के दोषी ठहराए गए इन लोगों का मिठाई खिलाकर और माला पहनाकर स्वागत किया गया था.

जनवरी 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने इन 11 दोषियों को समयपूर्व रिहा करने के गुजरात सरकार के फैसले पर कड़ी टिप्पणी की थी. पीठ ने कहा था कि गुजरात सरकार ने ‘दोषियों के साथ मिलीभगत करते हुए काम किया’ और यह भी उल्लेख किया था कि ‘इसी आशंका के कारण इस अदालत ने मुकदमे की सुनवाई गुजरात से बाहर महाराष्ट्र स्थानांतरित की थी.’