नई दिल्ली: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ जारी छात्र आंदोलन के बीच झारखंड सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों को औपचारिक बातचीत के लिए बुलाया है. स्थानीय प्रशासन के माध्यम से भेजे गए संदेश में छात्रों से पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता के लिए आने को कहा गया है. बताया गया है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं छात्रों से बातचीत करेंगे.
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 29 जुलाई से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे छात्रों को यह जानकारी स्थानीय उप-मंडल पदाधिकारी (एसडीओ) ने दी. सरकार का संदेश मिलने के बाद एक छात्र नेता ने धरना स्थल से कहा, ‘अच्छी बात है कि 12 दिन बाद सरकार जागी.’
हालांकि, छात्रों ने बातचीत के लिए एक शर्त भी रखी. सरकार का संदेश लेकर पहुंचे एसडीओ से छात्र नेता ने कहा, ‘वार्ता कैमरे के सामने होनी चाहिए और मीटिंग की वीडियो रिकॉर्डिंग होनी चाहिए.’
VIDEO | Ranchi: Agitating students agree to hold discussion with Jharkhand government; demand for video recording of the meeting.
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/We2ub1yw2F
— Press Trust of India (@PTI_News) August 5, 2026
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब छात्र 14वीं जेपीएससी परीक्षा, जेएसएससी-सीजीएल और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं. पहले छात्र सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराने की मांग कर रहे थे. बाद में उन्होंने मांग में संशोधन करते हुए कहा कि या तो सीबीआई जांच कराई जाए या फिर राज्य के बाहर के सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र जांच समिति गठित की जाए.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार (5 अगस्त) को सोशल मीडिया पर जारी संदेश में कहा कि ‘मेरे युवा साथियों की चिंताएं हमारे लिए अत्यंत गंभीर विषय हैं. पेपर लीक का विषय केवल झारखंड का नहीं है, बल्कि देश के अनेक राज्यों के युवाओं के सामने यह एक बड़ी राष्ट्रीय समस्या बन चुका है.’
माननीय विधानसभा में मीडिया बंधुओं से बातचीत…
मेरे युवा साथियों की चिंताएँ हमारे लिए अत्यंत गंभीर विषय हैं। पेपर लीक का विषय केवल झारखंड का नहीं है, बल्कि देश के अनेक राज्यों के युवाओं के सामने यह एक बड़ी राष्ट्रीय समस्या बन चुका है।
हमारी सरकार इस मामले पर पूरी गंभीरता के साथ… pic.twitter.com/AGRsy4sVJy
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) August 5, 2026
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मामले को पूरी गंभीरता से देख रही है और संबंधित एजेंसियां लगातार जांच कर रही हैं. मुख्यमंत्री ने लिखा, ‘हमारी सरकार इस मामले पर पूरी गंभीरता के साथ काम कर रही है. संबंधित एजेंसियां दिन-रात जांच कर रही हैं और दोषियों को जेल भी भेजा जा रहा है. लेकिन हमारा उद्देश्य केवल जांच करना नहीं, बल्कि मेरे युवा साथियों को ठोस समाधान देना है.’
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं और छात्र अपनी मांगें तथा सुझाव सीधे सरकार के सामने रख सकते हैं. उन्होंने भरोसा दिलाया कि छात्रों की हर बात को गंभीरता से सुना जाएगा.
इससे एक दिन पहले, 4 अगस्त को भी हेमंत सोरेन ने कहा था कि उनकी सरकार संवेदनशील है और संवैधानिक दायरे में रहकर छात्रों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा था, ‘यह न्याय करने वाली संवेदनशील सरकार है. जिस समस्या के पीछे हम पड़ते हैं उसे ठीक करके ही दम लेते हैं. संवैधानिक दायरों के तहत मेरे युवा साथियों को न्याय मिलकर रहेगा.’
यह न्याय करने वाली संवेदनशील सरकार है।
जिस समस्या की पीछे हम पड़ते हैं उसे ठीक करके ही दम लेते हैं।
संवैधानिक दायरों के तहत मेरे युवा साथियों को न्याय मिल कर रहेगा….. pic.twitter.com/xI7dZgz1fv
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) August 4, 2026
मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कथित पेपर लीक मामलों में कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है और जांच एजेंसियां विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर रही हैं. उन्होंने कहा कि सरकार पहले से ही कई कदम उठा चुकी है और यदि आवश्यकता हुई तो इस मामले पर केंद्रीय गृह मंत्री से भी बात की जाएगी.
उधर, प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि राज्य सरकार ने मामले की जांच राज्य की आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) को सौंपकर पूरे प्रकरण को दबाने की कोशिश की है. उनका कहना है कि उन्हें मौजूदा जांच पर भरोसा नहीं है और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है.
छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव करेंगे. कुछ छात्र संगठनों ने 7 अगस्त को भी विधानसभा घेराव का आह्वान किया है.
इस आंदोलन को राजनीतिक और सामाजिक समर्थन भी मिल रहा है. भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बुधवार को धरना स्थल पहुंचकर छात्रों का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि मामला केवल पेपर लीक का नहीं, बल्कि सरकारी नौकरियों की कथित खरीद-फरोख्त का है.
वहीं, दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा और पेपर लीक के मुद्दे पर हुए छात्र आंदोलन से जुड़े कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने भी झारखंड के छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया है. पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि देश में न्यायपालिका, राजनीति, मीडिया और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं में लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सोशल प्रेशर ग्रुप्स की आवश्यकता है.
झारखंड में शुरू हुआ यह आंदोलन अब केवल एक भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है. प्रदर्शनकारी इसे भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और युवाओं के भविष्य से जुड़े व्यापक सवाल के रूप में पेश कर रहे हैं. अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री और छात्र प्रतिनिधिमंडल के बीच प्रस्तावित वार्ता पर टिकी हैं, जिससे आंदोलन की अगली दिशा तय हो सकती है.
