नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा मणिपुर में जनगणना की प्रक्रिया टालने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कुकी-ज़ो समुदाय के एक संगठन ने मंगलवार (1 सितंबर) को राज्य में राष्ट्रपति शासन दोबारा लागू करने की मांग की.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, कुकी-ज़ो काउंसिल (केजेडसी) ने आरोप लगाया कि राज्य में जनगणना को टालने का फैसला कुकी-ज़ो समुदाय की आवाज को नजरअंदाज करते हुए लिया गया.
काउंसिल ने एक बयान में कहा, ‘इस मांग में एक भी कुकी-ज़ो संगठन शामिल नहीं था. इसके बावजूद मणिपुर के लोगों की भावनाओं और आकांक्षाओं के नाम पर इस फैसले को सही ठहराया गया.’
केजेडसी ने कहा कि जनगणना टालने का फैसला नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया. इस बैठक में मेईतेई और नगा समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले 14 नागरिक संगठनों की उस मांग पर विचार किया गया, जिसमें कहा गया था कि ‘एनआरसी से पहले जनगणना नहीं होनी चाहिए.’
केजेडसी ने अपने बयान में कहा कि उसे उम्मीद थी कि सरकार बदलने के बाद राज्य में सुरक्षा और सामान्य स्थिति बहाल होगी, लेकिन हमले और हत्याएं अब भी जारी हैं.
बयान में कहा गया, ‘हमारे लोगों ने मौजूदा राज्य सरकार की तुलना में राष्ट्रपति शासन के दौरान खुद को अधिक सुरक्षित महसूस किया. अगर राज्य सरकार अपने नागरिकों की रक्षा नहीं कर सकती, तो केंद्र को हस्तक्षेप करना चाहिए.’
मणिपुर में जनगणना की प्रक्रिया मंगलवार (1 सितंबर) से शुरू होनी थी, लेकिन विरोध-प्रदर्शनों और पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की प्रक्रिया कराने की मांग के बीच इसे टाल दिया गया है.
मेईतेई संगठनों और नगा समुदाय के एक वर्ग समेत कई समूहों की मांग है कि जनगणना से पहले एनआरसी कराया जाए. कई मेईतेई समूहों का आरोप है कि राज्य में बड़ी संख्या में रहने वाले कुकी-ज़ो लोग म्यांमार से आए बिना दस्तावेज वाले अप्रवासी हैं.
इस बीच, बुधवार (2 सितंबर) को राज्य विधानसभा एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें केंद्र से राज्य में जनगणना शुरू करने से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को अपडेट करने की मांग की गई. 2022 के बाद से इस मामले में विधानसभा द्वारा पास किया गया यह तीसरा प्रस्ताव है.
उल्लेखनीय है कि राज्य अभी भी जातीय हिंसा की चपेट में है. इस वर्ष फरवरी से कुकी और नगा समुदायों के बीच – मई 2023 से मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच संघर्ष जारी है. आरटीआई के जरिए प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल तक 43,000 से अधिक विस्थापित लोग राहत शिविरों में रह रहे थे.
राज्य सरकार ने गुरुवार (3 सितंबर) को विधानसभा में बताया कि मई 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा में 31 अगस्त 2026 तक कम से कम 306 लोग मारे गए हैं और 49 लोग अभी भी लापता हैं.
