नई दिल्ली: कश्मीर के धार्मिक नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ को सोमवार (17 अगस्त) को नज़रबंद कर दिया गया और उन्हें ख़ानक़ाह-ए-नक़्शबंद साहिब में ख़्वाजा दीगर सभा को संबोधित करने की इजाज़त नहीं दी गई.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, जिसमें एक वीडियो संदेश भी शामिल था, ‘एक बार फिर मुझे आज नक़्शबंद साहिब में ख़्वाजा दीगर की पारंपरिक धार्मिक सभा को संबोधित करने की इजाज़त नहीं दी गई.’ उन्होंने कहा कि जब हज़ारों लोग उनके आने का इंतज़ार कर रहे थे, तब उन्हें नज़रबंद कर दिया गया.
मीरवाइज़ को 17 अगस्त को श्रीनगर में ख़्वाजा दीगर सभा के लिए भाषण देना था, जो सदियों पुरानी सूफ़ी सभा है और कश्मीर के लिए खास है.
उन्होंने कहा कि उन्हें सामूहिक धार्मिक कार्यक्रमों को संबोधित करने से रोका जा रहा है ताकि ‘उन्हें उनके राजनीतिक नज़रिए और लोगों की सामाजिक और धार्मिक चिंताओं को उठाने के लिए सज़ा दी जा सके.’
उन्होंने कहा, ‘मेरे राजनीतिक नज़रिए और लोगों की सामाजिक और धार्मिक चिंताओं को उठाने की सज़ा के तौर पर, मीरवाइज़ के तौर पर मुझे धार्मिक सभाओं को संबोधित करने से रोकना, शासकों की दमनकारी सोच को तो दिखाता ही है, साथ ही यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक भी है.’
उन्होंने आगे लिखा, ‘इससे भी बुरी बात यह है कि अधिकारी मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों और रीति-रिवाजों के प्रति लगातार असंवेदनशीलता और अनादर दिखा रहे हैं, उन्हें उपदेश सुनने और आध्यात्मिक अनुभव में भाग लेने के अधिकार से वंचित कर रहे हैं.’
उन्होंने कहा, ‘इस पर लगातार चुप्पी से केवल मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों के दमन को सामान्य माना जाने लगेगा.’
अगस्त 2019 से लगभग चार साल तक नज़रबंद रहने के बाद रिहा होने के बाद से कश्मीर के मीरवाइज़ को श्रीनगर की जामिया मस्जिद में अपनी भूमिका फिर से शुरू करने की इजाज़त तो दी गई, लेकिन बाद में उन्हें ऐसा करने से रोक भी दिया गया, खासकर शुक्रवार (जुमे) के दिन. उनकी मुख्य धार्मिक भूमिका मस्जिद में जुमे के ख़ुत्बे (उपदेश देने) से जुड़ी है.
इस साल मार्च में रमज़ान के दौरान उन्हें लगातार तीन शुक्रवार जामिया मस्जिद जाने से रोका गया. 20 मार्च को उन्होंने आरोप लगाया कि उनके घर के बाहर पुलिस की गाड़ियां और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था, और आसपास की गलियों में कंटीले तार लगाकर रास्ता बंद कर दिया गया था, जिससे ट्रैफ़िक की आवाजाही रुक गई थी.
ज्ञात हो कि 5 अगस्त, 2019, जब से जम्मू-कश्मीर दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया है, के बाद से मस्जिद में किसी भी ईद की नमाज़ नहीं हुई है.
हालांकि, अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद से केंद्र सरकार ने बार-बार कहा है कि जम्मू-कश्मीर में शांति, स्थिरता और सामान्य स्थिति लौट आई है.
