89% से अधिक रेलवे स्टेशनों पर बुनियादी यात्री सुविधाओं की कमी: सीएजी रिपोर्ट

सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 89% से अधिक निरीक्षित रेलवे स्टेशनों पर बुनियादी यात्री सुविधाओं में कमी मिली. कई स्टेशनों के पीने के पानी में ई. कोली बैक्टीरिया पाया गया. यात्री सुविधाओं से जुड़े 59% काम समय पर पूरे नहीं हुए.

प्रतीकात्मक तस्वीर ( फोटो: फ़्लिकर/राम प्रसाद (एट्रिब्यूशन 2.0 जेनेरिक)

नई दिल्ली: रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की हालिया रिपोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, कई स्टेशनों पर पीने के पानी के नमूनों में ई. कोली बैक्टीरिया पाए गए. वहीं, 89% से अधिक स्टेशनों पर बैठने की जगह, शौचालय, पंखे और संकेतक जैसी एक या उससे अधिक जरूरी सुविधाएं मानकों के मुताबिक उपलब्ध नहीं थीं.

12 अगस्त को संसद में पेश की गई सीएजी की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि साफ-सफाई, पानी की उपलब्धता और चिकित्सा सहायता से जुड़ी यात्रियों की शिकायतें बढ़ी हैं. यात्री सुविधाओं से जुड़े 59% काम समय पर पूरे नहीं हुए, जबकि इन सुविधाओं के लिए आवंटित बजट का भी पर्याप्त इस्तेमाल नहीं किया गया.

सीएजी ने यह ऑडिट 2019-20 से 2023-24 के बीच की अवधि के लिए किया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं का इससे पहले ऐसा ऑडिट 2016 में हुआ था. करीब एक दशक बाद किए गए इस ऑडिट में सीएजी ने पाया कि पिछली रिपोर्ट के बाद रेलवे मंत्रालय की ओर से कमियों को दूर करने के दिए गए आश्वासनों के बावजूद कई समस्याएं बनी हुई हैं.

रिपोर्ट सामने आने के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार (16 अगस्त) को सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए. इनमें करीब 20,000 स्थानों पर, जिनमें वाटर कूलर भी शामिल हैं, ‘टैंक से नल’ तक पानी की फिल्ट्रेशन व्यवस्था शुरू करना शामिल है.

रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अब स्टेशनों पर पानी की गुणवत्ता की निगरानी रेलवे बोर्ड के स्तर पर की जाएगी. पानी के भंडारण वाले टैंकों की निर्धारित समय पर सफाई और रखरखाव होगा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पानी की गुणवत्ता तथा काम की प्रगति से जुड़ी रिपोर्ट समय-समय पर सार्वजनिक की जाएगी.

89% से अधिक स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाओं में कमी

रेलवे बोर्ड ने 2003 में स्टेशनों पर ‘न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं’ (मिनिमम एसेंशियल एमेनिटीज़ (एमईए)) के मानक तय किए थे. अप्रैल 2018 में इनमें संशोधन किया गया. इन सुविधाओं में पीने के पानी के नल, बैठने की व्यवस्था, यूरिनल, शौचालय, प्रतीक्षालय, वाटर कूलर, पंखे, घड़ी, प्लेटफॉर्म शेड, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, पार्किंग और आवागमन क्षेत्र तथा इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन इंडिकेटर बोर्ड शामिल हैं. इन सुविधाओं को 31 अगस्त 2018 तक सभी स्टेशनों पर उपलब्ध कराया जाना था.

लेकिन सीएजी के ऑडिट में पाया गया कि इन मानकों को लागू किए जाने के दो दशक से अधिक समय बाद भी सिर्फ 11% निरीक्षित स्टेशनों पर सभी न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध थीं.

सीएजी ने 5,900 से अधिक गैर-उपनगरीय स्टेशनों में से 512 स्टेशनों का निरीक्षण किया. इनमें सिर्फ 54 स्टेशन ऐसे मिले, जहां एमईए के सभी मानकों को पूरा किया गया था. ये 54 स्टेशन 13 रेलवे जोन में फैले हुए हैं.

कमियों का असर बड़े स्टेशनों पर भी मिला. सालाना 710 करोड़ रुपये से अधिक की आय और 1.03 करोड़ से 11.47 करोड़ तक यात्रियों की आवाजाही वाले कई प्रमुख स्टेशनों पर भी बुनियादी सुविधाएं मानकों के अनुरूप नहीं थीं. इनमें नई दिल्ली, हावड़ा, हजरत निजामुद्दीन जंक्शन, सिकंदराबाद, एमजीआर चेन्नई सेंट्रल, अहमदाबाद, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, केएसआर बेंगलुरु, सूरत और आनंद विहार टर्मिनल शामिल हैं.

ऑडिट में पाया गया कि 188 स्टेशनों पर पर्याप्त संख्या में पीने के पानी के नल नहीं थे, जबकि 21 स्टेशनों पर प्रतीक्षालय ही नहीं थे. 111 स्टेशनों पर निर्धारित संख्या में यूरिनल और 59 स्टेशनों पर पर्याप्त शौचालय उपलब्ध नहीं थे. 62 स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म या प्लेटफॉर्म शेड का ढका हुआ क्षेत्र तय मानक से कम था.

इसके अलावा 60 स्टेशनों पर घड़ियां नहीं थीं, 128 स्टेशनों पर निर्धारित संख्या से कम वाटर कूलर थे और 149 स्टेशनों पर मानकों के अनुसार पर्याप्त संख्या में कूड़ेदान उपलब्ध नहीं थे. सीएजी ने शारीरिक तौर पर अक्षम यात्रियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं में भी बड़ी कमियां दर्ज कीं.