मणिपुर: जनगणना से पहले एनआरसी के विरोध में कुकी-ज़ो परिषद, अनुचित बताया

मणिपुर में कुकी-ज़ो समुदाय की शीर्ष संस्था कुकी-ज़ो काउंसिल ने मेईतेई और नगा संगठनों द्वारा जनगणना से पहले एनआरसी लागू करने की मांग का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि जनगणना से पहले एनआरसी की मांग मुख्य रूप से ‘बिना पुष्ट प्रमाण वाले आरोपों और अटकलों’ पर आधारित है.

इंफाल में कैंपेन फॉर जस्ट एंड फेयर डेलिमिटेशन (जेएफडी) का एनआरसी लागू करने की मांग को लेकर रैली. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: मणिपुर में कुकी-जो समुदाय की शीर्ष संस्था कुकी-जो काउंसिल (केजेडसी) ने कुछ मेईतेई और नगा संगठनों की ओर से जनगणना से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू करने की मांग का विरोध किया है. परिषद ने इस मांग को ‘जल्दबाजी और अनुचित’ बताया है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को जारी एक बयान में केजेडसी ने कहा कि एनआरसी केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आने वाली एक राष्ट्रीय प्रक्रिया है और मणिपुर स्थित किसी समूह या राज्य सरकार के पास इसके समय या कार्यान्वयन के बारे में निर्देश देने का कोई आधार नहीं है.

परिषद के सूचना एवं प्रचार सचिव गिंज़ा वुअलज़ोंग के हस्ताक्षर वाले बयान में कहा गया, ‘मणिपुर संघर्ष के दौरान हमारी आबादी और जनसांख्यिकीय स्थिति को लेकर फैलाई गई गलत बातों और दुष्प्रचार को देखते हुए तथ्यों को स्थापित करने और बेबुनियाद दावों को खारिज करने के लिए एक निष्पक्ष जनगणना ज़रूरी है.’

परिषद ने परिसीमन का भी स्वागत किया, जो महामारी के कारण 2021 से टाला गया था. परिषद ने कहा कि सत्यापित जनसांख्यिकीय आंकड़ों के आधार पर उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए परिसीमन जरूरी है.

एनआरसी की मांग के संबंध में परिषद ने कहा, ‘किसी विशेष राज्य में किसी समुदाय या राज्य सरकार को अपनी इच्छा से ‘एकतरफा तरीके से अलग एनआरसी शुरू करने या कराने’ का कोई प्रावधान नहीं है.’

कुकी-जो संगठन ने कहा कि इसलिए मणिपुर स्थित किसी संगठन या राज्य सरकार के पास राष्ट्रीय एनआरसी प्रक्रिया के समय या उसके क्रियान्वयन को तय करने का कोई वैध आधार नहीं है.

कुकी-जो समुदाय के संबंध में परिषद ने आरोप लगाया कि जनगणना से पहले एनआरसी की मांग मुख्य रूप से ‘बिना पुष्ट प्रमाण वाले आरोपों और अटकलों’ पर आधारित है.

परिषद का कहना है कि जनगणना जनसांख्यिकीय डेटा का सही स्रोत है और जनगणना 2027 के नतीजों के पूरा होने और प्रकाशित होने से पहले एनआरसी की मांग करना जल्दबाजी होगी.

केजेडसी ने असम के अनुभव का भी हवाला दिया. वहां 1985 के असम समझौते के तहत कराई गई एनआरसी प्रक्रिया में अंतिम सूची से करीब 19 लाख लोग बाहर रह गए थे और यह प्रक्रिया विदेशी नागरिक न्यायाधिकरणों के समक्ष कानूनी चुनौतियों और अपीलों में उलझी रही.

परिषद ने कहा, ‘मणिपुर में इसी तरह की प्रक्रिया की मांग करने वालों को पहले इसकी जटिलता, इसके प्रभाव और इसके परिणामों पर विचार करना चाहिए.’

कुकी-जो संगठन ने सभी संबंधित पक्षों से अपील की कि वे जनगणना की प्रक्रिया को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ने दें, एनआरसी के संबंध में केंद्र सरकार के अधिकार का सम्मान करें और जनसांख्यिकीय मुद्दों का इस्तेमाल ‘सांप्रदायिक दुष्प्रचार या उत्पीड़न’ के लिए न करें.

एनआरसी की मांग को लेकर घाटी के संगठनों का विरोध जारी

इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और विभिन्न समुदायों से जुड़े अन्य नागरिक संगठनों के सदस्य, जिनमें नगा, मेईतेई और अन्य समुदायों के लोग शामिल हैं, तब तक जनगणना कराए जाने का विरोध कर रहे हैं, जब तक कि 1951 को आधार वर्ष मानकर एनआरसी पूरा नहीं कर लिया जाता.

1951 को आधार वर्ष मानकर एनआरसी पूरा होने तक जनगणना की प्रक्रिया टालने की मांग को लेकर मणिपुर की घाटी वाले इलाकों में कई विरोध-प्रदर्शन किए गए हैं. राज्य के घाटी इलाकों में अलग-अलग जगहों पर हर दिन धरने और रात में रैलियां आयोजित की जा रही हैं.

रविवार को मणिपुर की कोऑर्डिनेटिंग कमिटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (कोकोमी) ने चेतावनी दी है कि एनआरसी को अपडेट किए बिना राज्य में जनगणना की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से मौजूदा विभाजन और गहरा हो सकता है.

एक बयान जारी कर इस संगठन ने लोगों से अपील की कि वे तब तक चल रहे ‘एनआरसी नहीं, तो जनगणना नहीं’ आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लें, जब तक कि उनकी मांग का संतोषजनक समाधान न हो जाए.

यह विरोध मणिपुर में 2027 की जनगणना के घरों की सूची बनाने (हाउस-लिस्टिंग) के चरण के दौरान हो रहा है, जिसके तहत 17 अगस्त को ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ (खुद जानकारी दर्ज करने की प्रक्रिया) शुरू हुई थी. मुख्य हाउस-लिस्टिंग का काम 1 सितंबर से 30 सितंबर के बीच होना है.

20 अगस्त को मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद ने छात्र प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल को यह भी आश्वासन दिया कि सरकार राज्य में एनआरसी को ‘बिना किसी परेशानी’ के लागू करने का समर्थन करती है. उन्होंने उन्हें यह भी आश्वासन दिया कि सरकार 2 सितंबर से शुरू होने वाले राज्य विधानसभा सत्र में मणिपुर में एनआरसी लागू करने पर चर्चा करेगी.