खरगे विवाद: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ‘शुद्धिकरण’ की निष्पक्ष जांच की मांग वाली याचिका ख़ारिज की

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के भाषण के बाद हल्द्वानी में हुए ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान की निष्पक्ष जांच की मांग वाली याचिका ख़ारिज कर दी है. अदालत ने राज्य सरकार के इस आश्वासन को स्वीकार किया है कि पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच करेगी.

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे. (फाइल फोटो: पीटीआई/रवि चौधरी)

नई दिल्ली: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के भाषण के बाद हल्द्वानी के एक मैदान में हुए ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की गई थी.

अदालत ने राज्य के महाधिवक्ता के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया कि पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच करेगी.

दलित समुदाय से होने का दावा करने वाले एक वकील बैजनाथ ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर घटना की निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश देने की मांग की थी. उन्होंने खरगे के भाषण और उसके बाद आयोजित ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, तस्वीरों, इलेक्ट्रॉनिक संचार और अनुमति संबंधी दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की भी मांग की थी.

याचिकाकर्ता ने यह भी अनुरोध किया था कि जांच पूरी होने के बाद अस्पृश्यता को अपराध घोषित करने वाले नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम और, यदि लागू हो, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाए. खरगे दलित समुदाय से आते हैं, जिसे ऐतिहासिक रूप से अस्पृश्यता का सामना करना पड़ा है.

याचिका के जवाब में उत्तराखंड सरकार ने अदालत को बताया कि हल्द्वानी पुलिस पहले ही अमित कुमार नामक व्यक्ति की शिकायत पर एक एफआईआर दर्ज कर चुकी है.

राज्य के महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने यह भी बताया कि बेंगलुरु पुलिस में एक जीरो एफआईआर दर्ज की गई है, जिसे हल्द्वानी स्थानांतरित किए जाने की संभावना है. उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी.

जस्टिस सिद्धार्थ साह और जस्टिस मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने सोमवार (7 सितंबर) को कहा, ‘चूंकि महाधिवक्ता ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष और तटस्थ तरीके से जांच की जाएगी, इसलिए हमें उनके बयान पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं दिखता. इसलिए इस स्तर पर किसी निर्देश की आवश्यकता नहीं है. रिट याचिका का निस्तारण महाधिवक्ता द्वारा दिए गए बयान के आधार पर किया जाता है.’

हल्द्वानी और बेंगलुरु में दर्ज हुईं एफआईआर

इंडियन एक्सप्रेस की 31 अगस्त को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, हल्द्वानी पुलिस ने अमित कुमार नाम के शख्स की शिकायत पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी.

एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की वैमनस्य फैलाने और धार्मिक भावनाएं आहत करने से संबंधित धाराओं के अलावा एससी/एसटी अधिनियम की एक धारा भी लगाई गई थी. हाईकोर्ट में महाधिवक्ता बाबुलकर ने भी इसी अमित कुमार का उल्लेख किया.

दूसरी ओर, बेंगलुरु में दर्ज जीरो एफआईआर में कथित तौर पर उत्तराखंड भाजपा प्रमुख महेश भट्ट का नाम है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान ने उस जातिवादी सोच को बढ़ावा दिया कि दलित समुदाय से आने वाले खरगे के वहां भाषण देने के कारण मैदान ‘अशुद्ध’ हो गया था.

सोमवार को आए हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, यह जीरो एफआईआर अब तक हल्द्वानी ट्रांसफर नहीं की गई है.

खरगे के भाषण के बाद हुआ था ‘शुद्धिकरण’ हवन

उल्लेखनीय है कि श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के कुछ सदस्यों ने 13 अगस्त को उस मैदान में ‘शुद्धिकरण’ हवन किया था, जहां कुछ दिन पहले मल्लिकार्जुन खरगे ने एक सभा को संबोधित किया था.

उस दिन संगठन के अध्यक्ष ने प्रेस से कहा था, ‘हिंदू संगठनों की तुलना सांपों से करने और मुस्लिम समुदाय से उन्हें खत्म करने की अपील करने वाले व्यक्ति को यहां मंच दिए जाने से हिंदू आस्था को ठेस पहुंची है.’

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राज्यसभा में इस घटना को ‘बहुत दुखद घटना’ बताया था.

हालांकि, उत्तराखंड भाजपा प्रमुख महेश भट्ट और मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने इस बात से इनकार किया है कि ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान का खरगे की जाति से कोई संबंध था. दोनों ने संकेत दिया कि यह अनुष्ठान खरगे के भाषण के दौरान लगाए गए नारों के कारण भी किया गया था.

मुख्यमंत्री धामी ने इन नारों को ‘जिहादी नारे’ बताया था.

राष्ट्रपति से मिलेंगे कांग्रेस के एससी-एसटी सांसद

इस संबंध में सोमवार (7 सितंबर) को कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने कहा कि पार्टी के अनुसूचित जाति/जनजाति (एससी/ एसटी) सांसदों ने एक संसदीय मंच बनाने का फैसला किया है.

उन्होंने कहा कि ये सांसद ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान के मुद्दे पर मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक ज्ञापन सौंपेंगे. मल्लू रवि के मुताबिक, सांसद राष्ट्रपति से मिलने की अनुमति के लिए मंगलवार दोपहर तक इंतजार करेंगे.