नई दिल्ली: सेवानिवृत्त पूर्व नौकरशाह आशीष जोशी ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने कई दिनों तक एफआईआर की प्रति देने से इनकार करने के बाद अदालत में सुनवाई से एक दिन पहले सोमवार (7 सितंबर) को उन्हें उस एफआईआर की प्रति उपलब्ध कराई, जो मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उनकी टिप्पणियों को लेकर दर्ज की गई है.
हालांकि कहा जा रहा है कि एफआईआर में जोशी के उस एक्स पोस्ट का ज़िक्र है जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान हुई अभूतपूर्व घटनाओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ ‘न्यूरेम्बर्ग-स्टाइल ट्रायल’ की मांग की थी.
हालांकि, पूर्व नौकरशाह ने द वायर को बताया कि पुलिस की पूछताछ का फोकस इसके बजाय केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और गृह सचिव गोविंद मोहन के बारे में उनकी एक पोस्ट पर था.
जोशी ने सोमवार शाम एक्स पर लिखा कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उन्हें एफआईआर की प्रति उपलब्ध करा दी है. उन्होंने कहा, ‘अब मैं कानून के अनुसार अपने कानूनी उपायों का इस्तेमाल करूंगा.’
इसके करीब डेढ़ घंटे बाद उन्होंने 28 अगस्त की उस पोस्ट का जिक्र किया जिसमें उन्होंने ज्ञानेश कुमार की आलोचना की थी. जोशी ने अपनी उस पोस्ट में लिखा, ‘एफआईआर इसी ट्वीट पर आधारित है. जानकारी के लिए!’
उस पोस्ट में उन्होंने बंगाल में दोबारा चुनाव कराने की मांग की थी और कहा था कि ज्ञानेश कुमार ‘न्यूरेम्बर्ग शैली के मुकदमे’ से बच नहीं सकते.
FIR is based on this Tweet .
FYI! https://t.co/U9jt8fGHIw— Ashish Joshi (@bismil_prasad) September 7, 2026
लाइव लॉ के अनुसार, नई दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत में दाखिल याचिका में जोशी ने शिकायत की थी कि 2 सितंबर को पूछताछ के दौरान बार-बार मांग किए जाने के बावजूद पुलिस ने उन्हें एफआईआर की प्रति नहीं दी. अगले दिन उनके द्वारा दिए गए आपत्तियों और अनुरोधों का भी पुलिस ने कोई जवाब नहीं दिया.
जोशी ने कहा कि एफआईआर की प्रति न दिए जाने के कारण वह ‘अपने खिलाफ लगे आरोपों की सही प्रकृति का पता लगाने में असमर्थ’ रहे और इससे कानूनी राहत पाने के उनके अधिकार का ‘सीधे तौर पर उल्लंघन’ हुआ.
लाइव लॉ ने बताया कि पूर्व नौकरशाह ने तर्क दिया कि उनके खिलाफ एफआईआर की कॉपी पाने का उनका अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 से मिलता है, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से संबंधित है, और यह पुलिस की मनमर्ज़ी का मामला नहीं है.
रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायाधीश मृदुल शर्मा द्वारा उनकी याचिका पर मंगलवार को सुनवाई किए जाने की संभावना थी.
इससे पहले, जोशी के एक दोस्त ने द वायर को बताया था कि दिल्ली के नेहरू पार्क से उन्हें हिरासत में लेने वाले सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनके साथ चलने के लिए कहते समय ‘गृह मंत्री के खिलाफ’ उनकी एक्स पोस्ट का हवाला दिया था.
बाद में जोशी ने बताया कि न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित स्पेशल सेल के परिसर में उनसे पूछे गए सवालों और उसके बाद की पूछताछ में भी इसी पोस्ट पर ध्यान केंद्रित किया गया था. इस पोस्ट में उन्होंने दावा किया था कि राजधानी में युवा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर अमित शाह और गोविंद मोहन के बीच ‘बड़ा टकराव’ हुआ था.
यह पोस्ट भारत में उपलब्ध नहीं है, क्योंकि एक्स ने ‘कानूनी मांग’ के कारण भारतीय यूजर्स के लिए इसे रोक दिया है.
जोशी ने यह भी बताया कि उन्हें 2 सितंबर को जानकारी दी गई थी कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर में बीएनएस की धारा 192 लगाई गई है. यह धारा दंगा कराने के इरादे से जानबूझकर उकसावे की कार्रवाई से संबंधित है.
नरेंद्र मोदी सरकार के मुखर आलोचक रहे जोशी ने 1992 में इंडियन पोस्ट एंड टेलीकम्युनिकेशन अकाउंट्स एंड फाइनेंस सर्विस जॉइन की थी. वह 31 मार्च 2026 को केंद्र सरकार में अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी के रूप में सेवानिवृत्त हुए.
