इंफाल: डिजिटल न्यूज़ पोर्टल ‘द क्रॉसकरंट’ के मुख्य संवाददाता और गुवाहाटी प्रेस क्लब के सहायक महासचिव वरिष्ठ पत्रकार दिलावर हुसैन मोजुमदार को बुधवार (26 मार्च) को कामरूप मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत से उनके खिलाफ दर्ज दो मामलों में से एक में जमानत मिल गई है.
हालांकि, जमानत बॉन्ड जमा करने में देरी के कारण वह न्यायिक हिरासत में हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, मोजुमदार को मंगलवार (25 मार्च) और बुधवार (26 मार्च) की दरम्यानी रात को असम को-ऑपरेटिव एपेक्स बैंक में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को कवर करने के बाद गिरफ्तार किया गया था.
मालूम हो कि इस बैंक के निदेशक मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा और अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक बिस्वजीत फुकन हैं. असम जातीय परिषद की युवा शाखा द्वारा आयोजित यह विरोध प्रदर्शन बैंक परिसर के बाहर हुआ था.
बैंक के प्रबंध निदेशक डंबरू सैकिया से भ्रष्टाचार के आरोपों के बारे में सवाल पूछने की कोशिश करने के तुरंत बाद दिलवर हुसैन को हिरासत में ले लिया गया.
सूत्रों ने द वायर को बताया कि पुलिस ने पान बाजार पुलिस स्टेशन में मोजुमदार के खिलाफ दो मामले दर्ज किए हैं.
पहले केस (संख्या 110/25) में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (संशोधन 2015) की धारा 3(1)(आर) और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351(2) और 3(1)(आर) के तहत आरोप शामिल हैं, जो एक आदिवासी व्यक्ति पर कथित अपमानजनक टिप्पणी से जुड़ा है.
दूसरे मामले (केस नंबर 111/25) में बीएनएस की कई धाराएं शामिल हैं, जिन्हें सभी जमानती अपराध माना जाता है. जमानती अपराधों के तहत पकड़े जाने पर लोगों को जमानत मिल सकती है, बशर्ते वे जमानत बॉन्ड का भुगतान करें.
मीडिया से बात करते हुए दिलवर हुसैन के वकील एस. तापदर ने कहा कि उन्हें पहले मामले में जमानत मिल गई थी, लेकिन वे अपनी जमानत बॉन्ड सुरक्षा जमा नहीं कर सके. उन्होंने कहा कि इस कारण से उन्हें रात जेल में ही रहना होगा. जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद उनकी रिहाई की उम्मीद है.
बैंक घोटाले पर कर रहे थे कवरेज
इससे पहले मंगलवार को मोजुमदार ने असम कोऑपरेटिव एपेक्स बैंक में कथित भर्ती घोटाले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को कवर किया था. क्रॉसकरंट के संपादक अरूप कलिता ने द वायर को बताया, ‘अजीब बात यह है कि जब वे बैंक से निकल रहे थे, तो पान बाजार पुलिस स्टेशन से मोजुमदार को फोन आया, जिसमें उन्हें तुरंत रिपोर्ट करने के लिए कहा गया. वहां पहुंचने पर उन्हें हिरासत में ले लिया गया.’
कलिता ने कहा, ‘करीब बारह घंटे तक उन्हें पुलिस स्टेशन में हिरासत में रखा गया. उनकी पत्नी को थाने में घुसने नहीं दिया गया, न ही किसी सहकर्मी या कई वरिष्ठ पत्रकारों को, जो खबर मिलने पर पुलिस स्टेशन पहुंचे. पुलिस ने किसी को भी यह बताने से मना कर दिया कि उन्हें इतने घंटों तक किस आधार पर हिरासत में रखा गया.’
आधी रात के आसपास, एक पुलिस अधिकारी ने इंतज़ार कर रहे परिवार और पत्रकारों को बताया कि उन्हें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत गिरफ़्तार किया गया है.
हालांकि, उनकी पत्नी को दी गई पर्ची में शिकायतकर्ता का नाम नहीं लिखा था; न ही यह बताया गया था कि घटना कहां हुई थी.
मोजुमदार के एक रिश्तेदार ने बताया, ‘इसमें केवल एक पंक्ति का उल्लेख था, जो मोजुमदार ने कथित तौर पर एक बोडो व्यक्ति से कही थी.’
प्रेस संगठनों का विरोध
मोजुमदार की गिरफ्तारी के बाद असम में पत्रकारों और मीडिया संगठनों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया. गुवाहाटी प्रेस क्लब ने उनकी तत्काल रिहाई की मांग करते हुए प्रदर्शन किया, जिसमें पत्रकारों ने विरोध में सीजेएम की अदालत तक मार्च निकाला.
गुवाहाटी प्रेस क्लब ने एक बयान में कहा, ‘सिर्फ़ अपना काम करने, कर्तव्य निभाने के लिए एक पत्रकार को हिरासत में लेना बेहद चिंताजनक है. हम अधिकारियों से आग्रह करते हैं कि उन्हें जल्द से जल्द रिहा किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रेस की आज़ादी बरकरार रहे.’
प्रदर्शन के दौरान पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई थी, जिससे कानून प्रवर्तन और प्रदर्शनकारी पत्रकारों के बीच थोड़ी देर के लिए तनाव की स्थिति भी पैदा हो गई थी.
पत्रकार संघों, नागरिक समाज के लोगों और विपक्षी नेताओं ने भी इस गिरफ्तारी की आलोचना की है और इसे प्रेस को डराने का प्रयास बताया है.
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने इस पुलिस कार्रवाई की निंदा की है और असम सरकार से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि मीडिया पेशेवर राज्य में बिना किसी उत्पीड़न या कानूनी धमकी के डर के अपना काम कर सकें.
गौरतलब है कि इस मामले ने असम में प्रेस की स्वतंत्रता पर एक बड़ी बहस शुरू दी है, कई लोग इसे क्षेत्र में स्वतंत्र पत्रकारों पर बढ़ते दबाव के पैटर्न के रूप में भी देख रहे हैं.
