महाराष्ट्र: हिंदी विवाद के बीच कोंकण मराठी साहित्यिक संस्था ने कहा- सरकार का त्रि-भाषा फार्मूला अनुचित

कोंकण मराठी साहित्य परिषद ने महाराष्ट्र सरकार के त्रि-भाषा फॉर्मूले का विरोध करते हुए कहा कि सरकारी नीति सीखने के शुरुआती चरणों में बच्चों की संज्ञानात्मक और भाषाई क्षमता पर विचार नहीं करती. छात्रों की बौद्धिक क्षमता ध्यान में रखते हुए कक्षा 1 से तीसरी भाषा के रूप में हिंदी पर ज़ोर देना अनुचित लगता है.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: asercentre.org)

नई दिल्ली: ठाणे, कोंकण मराठी साहित्य परिषद ने मंगलवार को युवा छात्रों के लिए महाराष्ट्र सरकार के त्रि-भाषा फॉर्मूले का विरोध करते हुए कहा कि यह अनुचित है.

मालूम हो कि राज्य सरकार ने पिछले सप्ताह एक संशोधित आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि हिंदी को सामान्य तौर पर कक्षा 1 से 5 तक मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में छात्रों को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाएगा. सरकार ने कहा था कि हिंदी अनिवार्य नहीं होगी, लेकिन हिंदी के अलावा किसी भी भारतीय भाषा का अध्ययन करने के लिए स्कूल में प्रति कक्षा कम से कम 20 छात्रों की सहमति अनिवार्य है.

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कोंकण मराठी साहित्य परिषद ने एक बयान में कहा कि सरकार की नीति सीखने के शुरुआती चरणों में बच्चों की संज्ञानात्मक, भावनात्मक और भाषाई क्षमता पर विचार नहीं करती है.

इसमें कहा गया है, ‘कोंकण मराठी साहित्य परिषद के दृष्टिकोण से कक्षा 1 से 4 तक के छात्रों की मानसिक, शारीरिक और बौद्धिक क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए कक्षा 1 से तीसरी भाषा के रूप में हिंदी पर जोर देना अनुचित लगता है.’

साहित्यिक संस्था ने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह करते हुए कहा कि बच्चों की दीर्घकालिक विकासात्मक आवश्यकताओं को भाषा थोपने से अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

इसने कहा कि ऐसे निर्णयों में शिक्षकों, बाल मनोवैज्ञानिकों और स्थानीय समुदायों के साथ व्यापक परामर्श शामिल होना चाहिए.

इस बीच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि त्रि-भाषा फॉर्मूले पर अंतिम निर्णय साहित्यकारों, भाषा विशेषज्ञों और राजनीतिक नेताओं सहित सभी हितधारकों के साथ परामर्श के बाद ही लिया जाएगा.

फडणवीस ने इस मुद्दे पर विचार-विमर्श करने के लिए सोमवार देर रात दक्षिण मुंबई में अपने आधिकारिक आवास पर एक बैठक की अध्यक्षता की. नई शिक्षा नीति के तहत त्रि-भाषा नीति के निहितार्थों पर विस्तृत चर्चा हुई.

मुख्यमंत्री कार्यालय के एक बयान में कहा गया है कि यह निर्णय लिया गया कि विभिन्न राज्यों में वास्तविक जमीनी स्थिति को संदर्भ के लिए प्रस्तुत किया जाएगा और शैक्षणिक प्रभाव, विशेष रूप से मराठी छात्रों के संबंध में एक व्यापक प्रस्तुति दी जाएगी.

फडणवीस ने बयान में कहा, ‘इस बात पर सहमति हुई कि अंतिम निर्णय पर पहुंचने से पहले विशेषज्ञों, लेखकों, राजनीतिक नेताओं और अन्य हितधारकों के साथ एक संरचित परामर्श प्रक्रिया आयोजित की जाएगी.’

बता दें कि सरकार के नया आदेश जारी करने पर मराठी भाषा समर्थकों और राजनीतिक नेताओं ने व्यापक आलोचना की है. मराठी भाषा समर्थकों ने सरकार पर शुरू में पीछे हटने के बाद ‘पिछले दरवाजे’ से नीति को पुनः लागू करने का आरोप लगाया, वहीं विपक्ष ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर मराठी लोगों की छाती में ‘छुरा घोंपने’ का आरोप लगाया.

गौरतलब है कि इस वर्ष अप्रैल में मराठी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में कक्षा 1-5 तक हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य बनाने के अपने निर्णय पर भारी आलोचना के बाद महाराष्ट्र सरकार ने अपना कदम वापस ले लिया था.