कफ सीरप से हुई मौत: मध्य प्रदेश के सैंपल में पाए गए विषैले तत्व – स्वास्थ्य मंत्रालय

मध्य प्रदेश में हाल ही में कफ सीरप के सेवन से जुड़ी बच्चों की मौतों की एक श्रृंखला के बाद केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा जांचे गए नमूनों में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल जैसे टॉक्सिन (विषैले तत्व) पाए गए हैं. राजस्थान ने एक औषधि नियंत्रण अधिकारी को निलंबित कर दिया है और केयसंस फार्मा द्वारा निर्मित सभी दवाओं की आपूर्ति रोक दी है.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: Steve Mcsweeny Via Pharma Adda dot in)

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में हाल ही में कफ सीरप के सेवन से जुड़ी बच्चों की मौतों की एक श्रृंखला के बाद केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा जांचे गए नमूनों में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल जैसे टॉक्सिन (विषैले तत्व/दूषित तत्व) पाए गए हैं, स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार (3 अक्टूबर) को यह जानकारी दी.

राजस्थान में कफ सीरप के सेवन से बच्चों की मौत की खबरों के संबंध में मंत्रालय ने कहा कि ‘संबंधित उत्पाद’ में कफ निवारक डेक्सट्रोमेथॉर्फन नामक दवा है, जो बच्चों के लिए अनुशंसित नहीं है.

मंत्रालय ने प्रेस में उद्धृत एक बयान में कहा कि उस उत्पाद में प्रोपिलीन ग्लाइकॉल भी नहीं है, जो डायथिलीन ग्लाइकॉल या एथिलीन ग्लाइकॉल से दूषित हो सकता है.

राजस्थान ने एक औषधि नियंत्रण अधिकारी को निलंबित कर दिया है और केयसंस फार्मा द्वारा निर्मित सभी दवाओं की आपूर्ति रोक दी है – जिसका डेक्सट्रोमेथॉर्फन-आधारित कफ सीरप कथित तौर पर जांच के दायरे में है – पीटीआई की रिपोर्ट और द हिंदू के अनुसार, इस बात से इनकार किया है कि सरकारी डॉक्टरों ने मृत बच्चों को यह दवा दी थी.

खबरों के अनुसार, केयसंस फार्मा द्वारा निर्मित दवाओं के सैंपल पिछले दो सालों में 40 बार फेल हुए हैं. यह कई बार ब्लैकलिस्टेड भी की जा चुकी है.

राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आरएमएससीएल) के प्रबंध निदेशक पुखराज सेन के अनुसार, 2012 से अब तक केयसन्स फार्मा की दवाओं के 10,000 से ज़्यादा नमूनों की जांच की जा चुकी है, जिनमें से 42 गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं.

द हिंदू के अनुसार, इस बीच, मध्य प्रदेश सरकार से सूचना मिलने के बाद तमिलनाडु ने ‘कोल्ड्रिफ’ कफ सीरप के एक बैच में इन दो दूषित पदार्थों की मौजूदगी का पता लगाया, जिसकी भी जांच की जा रही है. साथ ही, दक्षिणी राज्य ने अपने स्थानीय निर्माता को इस दवा का उत्पादन बंद करने का आदेश दिया है.

पीटीआई के अनुसार, मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में नौ बच्चों की मौत जांच के दायरे में आ गई है, जबकि इंडियन एक्सप्रेस ने शनिवार तड़के बताया कि राजस्थान में मरने वालों में तीन बच्चे शामिल हैं.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र, राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन और अन्य संगठनों के कर्मियों तथा राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा मध्य प्रदेश स्थित ‘साइट’ से कफ सीरप सहित दवाओं के नमूने एकत्र किए गए, जिनमें डायथिलीन ग्लाइकॉल या एथिलीन ग्लाइकॉल नहीं पाया गया.

मंत्रालय के हवाले से कहा गया, ‘मध्य प्रदेश राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने भी तीन नमूनों की जांच की और डीईजी/ईजी नहीं होने की पुष्टि की.’

इसमें यह भी बताया गया कि राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान द्वारा एकत्र किए गए रक्त और मस्तिष्कमेरु द्रव (cerebrospinal fluid) के नमूनों में से एक मामले में लेप्टोस्पायरोसिस, जो रक्त का एक जीवाणु संक्रमण है, की पुष्टि हुई.

मंत्रालय ने कहा, ‘एक बहु-विषयक टीम … रिपोर्ट किए गए मामलों के पीछे सभी संभावित कारणों की जांच कर रही है.’

जहां तक ​​राजस्थान में दूषित कफ सीरप के सेवन से दो बच्चों की मौत से संबंधित रिपोर्ट का सवाल है – मंत्रालय ने कहा कि, ‘संबंधित उत्पाद में प्रोपिलीन ग्लाइकॉल नहीं है, जो दूषित पदार्थों, डीईजी/ईजी का संभावित स्रोत हो सकता है.’

इसमें कहा गया है कि, ‘इसके अलावा, संदर्भित उत्पाद एक डेक्सट्रोमेथोर्फन-आधारित फॉर्मूलेशन है, जिसे बच्चों की चिकित्सा के लिए अनुशंसित नहीं किया जाता है.’

आरोप लगाए गए हैं कि राजस्थान में एक सरकारी क्लीनिक ने गलत दवा लिख ​​दी, जिसका राज्य सरकार के अधिकारियों ने खंडन किया है.

ज्ञात हो कि दवाओं में केवल अल्प मात्रा में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल की अनुमति है तथा यदि अधिक मात्रा में इनका सेवन किया जाए तो ये किडनी के लिए अत्यधिक विषैले होते हैं.

ऐसा माना जाता है कि भारत में निर्मित कफ सीरप से अतीत में कई बच्चों की मौत हुई है.

बता दें कि साल 2022 में उज्बेकिस्तान की सरकार ने दावा किया था कि भारत में निर्मित कफ सीरप पीने से उनके देश में 18 बच्चों की मौत हो गई. जनवरी 2023 में उज़्बेकिस्तान में सात बच्चों की मौत को भारत में बनी दो दवाओं से जोड़ा गया था.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 11 जनवरी 2023 को इन दोनों दवाओं को मौतों से जोड़कर उत्पाद चेतावनी जारी किया था. अलर्ट में कहा गया था कि दोनों कफ सीरप में डायएथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) और एथिलीन ग्लाइकॉल (ईजी) अस्वीकार्य स्तर पर पाए गए.

इससे पहले इसी तरह के एक अन्य मामले में एक अन्य भारतीय फर्म-मेडेन फार्मास्युटिकल्स द्वारा बनाई गई बच्चों की दवाओं को कथित तौर पर गांबिया में 70 बच्चों की मौत के साथ जोड़ा गया था.

डब्ल्यूएचओ ने 5 अक्टूबर 2023 को घोषणा की थी कि मेडन फार्मास्युटिकल द्वारा बनाए गए कफ सीरप में डायथिलिन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल थे, जो मनुष्यों के लिए जहरीले होते हैं. साथ ही, डब्ल्यूएचओ ने फर्म के चार उत्पाद प्रोमेथाजिन ओरल सॉल्यूशन, कोफेक्समालिन बेबी कफ सीरप, मेकॉफ बेबी कफ सीरप और मैग्रिप एन कोल्ड सीरप पर सवाल उठाते हुए अलर्ट जारी किया था.