मानेसर में मज़दूरों का विरोध तेज़, लाठीचार्ज के आरोप; यूनियन ने कहा- मांगें दबाने की कोशिश

हरियाणा के आईएमटी मानेसर में ठेका श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन तेज़ हो गए हैं. यूनियन का आरोप है कि वेतन, काम के घंटे और सुरक्षा जैसी मांगों को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है. पुलिस कार्रवाई, लाठीचार्ज और हिरासत के आरोपों के बीच मज़दूरों ने कहा कि उनका आंदोलन जारी रहेगा.

मजदूर संगठन एक्टू का आरोप है कि ये मजदूर पुलिस की कार्रवाई में घायल हुए हैं. (फोटो साभार: एक्टू)

नई दिल्ली: हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्र आईएमटी मानेसर में पिछले कुछ दिनों से श्रमिकों के विरोध-प्रदर्शन तेज हो गए हैं.

ट्रेड यूनियन ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (एक्टू) ने आरोप लगाया है कि मजदूरों की बुनियादी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर पुलिस बल का इस्तेमाल कर उन्हें दबाने की कोशिश की जा रही है.

देशभर में बढ़ते श्रमिक आंदोलन

एक्टू के अनुसार, साल की शुरुआत से ही देश के अलग-अलग हिस्सों – बरौनी, पानीपत, सिंगरौली, सूरत और पतरातू – में मजदूर बेहतर वेतन, आठ घंटे की कार्य अवधि, सुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. संगठन का कहना है कि इन मांगों के समानांतर केंद्र सरकार श्रम कानूनों को लागू करने पर अड़ी हुई है, जिन्हें यूनियन ‘मजदूर विरोधी’ मानती है.

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि बढ़ती महंगाई और एलपीजी की कीमतों ने मजदूरों की स्थिति को और मुश्किल बना दिया है. संगठन का आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकारें इन समस्याओं को न तो स्वीकार कर रही हैं और न ही उनका समाधान निकाल रही हैं. इसके चलते प्रवासी मजदूरों के सामने फिर से पलायन जैसी स्थिति बनने लगी है.

मानेसर में कई फैक्ट्रियों में विरोध

हरियाणा के मानेसर में अप्रैल की शुरुआत से ही कई फैक्ट्रियों के मजदूर विरोध में उतर आए हैं. इनमें होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया, मुंजाल शोवा, सत्याम, रूप पॉलिमर्स, मॉडलामा, ऋचा ग्लोबल, सिर्मा एसजीएस, प्रिकोल और अन्य इकाइयों के ठेका श्रमिक शामिल हैं.

इन मजदूरों की मुख्य मांगों में वेतन वृद्धि, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, आठ घंटे की शिफ्ट और रोजगार व सामाजिक सुरक्षा शामिल हैं. यूनियन का आरोप है कि ठेका मजदूरों से वर्षों से कम वेतन और असुरक्षित परिस्थितियों में काम कराया जा रहा है, जो श्रम कानूनों का उल्लंघन है.

धारा 163 लागू, पुलिस कार्रवाई के आरोप

8 अप्रैल को स्थानीय प्रशासन ने क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू कर दी. एक्टू का आरोप है कि 9 अप्रैल की सुबह पुलिस ने कई जगहों पर प्रदर्शन कर रहे मजदूरों पर लाठीचार्ज किया और कई को हिरासत में लिया.

यूनियन के मुताबिक, जब विभिन्न कंपनियों के मजदूर अपनी मांगों को लेकर एसडीएम कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए जुटे, तब भी पुलिस ने बल प्रयोग किया.

एक्टू की टीम ने मानेसर जाकर मजदूरों से मुलाकात की है. यूनियन का दावा है कि कई महिला मजदूरों ने आरोप लगाया कि उन्हें पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा मारा-पीटा गया. कुछ मजदूरों के कपड़े फटे हुए थे और उनके शरीर पर चोट के निशान थे.

संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मजदूरों को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया.

फैक्ट्री प्रबंधन पर भी आरोप

यूनियन ने फैक्ट्री प्रबंधन पर भी आरोप लगाए हैं कि वे बातचीत के बजाय निजी बाउंसर बुलाकर मजदूरों को डराने की कोशिश कर रहे हैं. एक्टू का कहना है कि यह स्थिति राज्य तंत्र और उद्योग प्रबंधन के बीच ‘मिलीभगत’ को दर्शाती है.

एक्टू के अनुसार, जब उनके प्रतिनिधि एसडीएम कार्यालय के बाहर मजदूरों से बात कर रहे थे, तब पुलिस ने उन्हें भी तितर-बितर करने की कोशिश की और कुछ समय के लिए हिरासत में लिया.

‘मजदूरों की आवाज नहीं दबेगी’

एक्टू ने हरियाणा की भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि यह श्रमिक अधिकारों का उल्लंघन और राज्य द्वारा हिंसा का उदाहरण है.

यूनियन का कहना है कि मानेसर पहले भी मजदूर आंदोलनों का केंद्र रहा है, मारुति और होंडा जैसे कारखानों के संघर्ष इसका उदाहरण हैं, और मौजूदा विरोध भी इसी सिलसिले की कड़ी है.

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि ‘मजदूरों के अधिकारों और गरिमा की लड़ाई को बल प्रयोग से दबाया नहीं जा सकता,’ और यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा.