नीट-यूजी 2026: एनटीए को हटाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका में शीर्ष अदालत से केंद्र सरकार को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि नीट परीक्षा आयोजित करने के लिए एनटीए की जगह ‘अधिक मज़बूत, तकनीकी रूप से उन्नत और स्वायत्त संस्था’ बनाई जाए. यह भी मांग की गई है कि नीट यूजी 2026 की परीक्षा दोबारा न्यायिक निगरानी में आयोजित कराई जाए.

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (एफएआईएमए) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) पर नीट यूजी 2026 परीक्षा आयोजित करने में ‘व्यवस्थागत विफलता’ का आरोप लगाया है.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिवक्ता तन्वी दुबे के माध्यम से दायर इस याचिका में एनटीए को हटाने या तो उसके बुनियादी ढांचे में व्यापक बदलाव करने और न्यायिक निगरानी में नीट यूजी 2026 परीक्षा दोबारा आयोजित कराने की मांग की गई है.

ज्ञात हो कि गेस पेपर के माध्यम से पेपर लीक के आरोपों के बाद मंगलवार (12 मई) को नीट यूजी 2026 को रद्द कर दिया गया था. यह परीक्षा अब दुबारा ली जाएगी, जिसकी तारीखों का ऐलान होना बाक़ी है. नीट-यूजी 2026 की परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी. रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि वॉट्सऐप और टेलीग्राम पर प्रसारित हुए कथित गेस पेपर के 120 से अधिक सवाल वास्तविक परीक्षा प्रश्नपत्र से मेल खाते थे. केंद्र सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है.

याचिका में अदालत से केंद्र सरकार को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि नीट परीक्षा आयोजित करने के लिए एनटीए की जगह ‘अधिक मजबूत, तकनीकी रूप से उन्नत और स्वायत्त संस्था’ बनाई जाए.

लाइव लॉ के मुताबिक, याचिका में यह भी मांग की गई है कि नीट-यूजी 2026 की दोबारा होने वाली परीक्षा की निगरानी के लिए एक हाई-पावर्ड मॉनिटरिंग कमेटी गठित की जाए, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करें. समिति में एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और एक फॉरेंसिक वैज्ञानिक को भी शामिल करने की मांग की गई है. यह समिति तब तक निगरानी करे, जब तक नई स्वतंत्र परीक्षा संस्था औपचारिक रूप से गठित नहीं हो जाती.

इसके अलावा, याचिका में प्रश्नपत्रों की डिजिटल लॉकिंग और फिजिकल चेन-ऑफ-कस्टडी से जुड़े जोखिमों को खत्म करने के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) मॉडल अपनाने का निर्देश देने की मांग की गई है.

याचिका में यह भी मांग की गई है कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने और किसी भी गड़बड़ी की पहचान के लिए नीट-यूजी 2026 के सेंटर-वाइज परिणाम उपलब्ध होते ही सार्वजनिक किए जाएं.

एफएआईएमए ने सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई को यह निर्देश देने की भी मांग की है कि वह चार सप्ताह के भीतर कथित नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले की जांच पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे, जिसमें पहचाने गए नेटवर्क, गिरफ्तारियों, आरोपित व्यक्तियों और अभियोजन की प्रगति का विवरण शामिल हो.

अब तक इस मामले में 14 लोगों को हिरासत में लिया गया है.

सवालों के घेरे में एनटीए 

इससे पहले भी नीट यूजी 2024 परीक्षा में व्यापक गड़बड़ियों के आरोप सामने आए थे, जिसके बाद एनटीए की कार्यप्रणाली और क्षमता पर गंभीर सवाल उठे थे. इस वर्ष कथित गेस पेपर के जरिए पेपर लीक के आरोपों के बाद नीट यूजी 2026 परीक्षा रद्द किए जाने से एनटीए एक बार फिर निशाने पर है.