आउटलुक का दावा- युवाओं के प्रदर्शन के दौरान रिपोर्टर को पैलेट गन जैसे हथियार से चोटें आईं

आउटलुक पत्रिका ने दावा किया है कि उसके पत्रकार पर तब गोली चलाई गई जब वे 20 जुलाई को हुए युवाओं के विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रहे थे. मेडिकल रिकॉर्ड में उनके हाथ पर कई छोटे-छोटे छेद जैसे घाव मिले हैं, जो पैलेट लगने से होने वाले घावों जैसे दिखाई दे रहे हैं.

दिल्ली के लेडी हार्डिंग अस्पताल में सर्जरी के बाद इरशाद को व्हीलचेयर पर बाहर ले जाते हुए. (फोटो: विपुल कुमार)

नई दिल्ली: आउटलुक पत्रिका ने दावा किया है कि उसके एक पत्रकार, जिनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है, पर ऐसे हथियार से गोली चलाई गई जो पैलेट बंदूक जैसे है. पत्रकार को लगी चोटें भी वैसी ही हैं जैसी पैलेट लगने पर होती हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, उन पर तब गोली चलाई गई जब वे जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए युवाओं के विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रहे थे. इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज, पत्थरबाजी और आंसू गैस के गोले दागे थे और पैलेट गन चलाए जाने की भी ऐसी खबरें सामने आई थीं, जिनकी अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि पत्रकार छाती और चेहरे पर गोली लगने से बाल-बाल बच गए, लेकिन उनके हाथ में गंभीर चोटें आईं. जिस समय गोली चलाई गई, वे गोली चलाने वाले जवान की तरफ़ से दूसरी ओर मुड़ गए थे.

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘घटना के बाद तैयार किए गए मेडिकल रिकॉर्ड में उनके हाथ पर कई छोटे-छोटे छेद जैसे घाव मिले हैं. आउटलुक द्वारा देखी गई तस्वीरों में कई ऐसी चोटें दिखाई देती हैं जो पैलेट लगने से होने वाले घावों जैसी दिखाई दे रही हैं.’

पत्रिका ने चोटों की तस्वीरें और मेडिकल रिपोर्ट भी साझा की हैं. यह घटना राजीव चौक के पास पालिका बाजार के निकट हुई थी.

सीजेपी द्वारा 20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान घायल हुए आउटलुक के पत्रकार की चोटों की तस्वीर और मेडिकल रिपोर्ट (फोटो: आउटलुक)

ज्ञात हो कि इससे पहले द वायर ने बुधवार (22 जुलाई) को एक रिपोर्ट में बताया था कि इसी प्रदर्शन में शामिल 25 वर्षीय शेख इरशाद मंसूरी को लगी चोटें भी पैलेट गन से लगने वाली चोटों जैसी होती हैं. मंसूरी के चेहरे और गर्दन पर लगी चोटों की तस्वीरें आउटलुक की रिपोर्ट में प्रकाशित तस्वीरों से काफी मिलती-जुलती हैं.

द वायर ने मंसूरी की चोटों के बारे में विस्तार से रिपोर्ट दी है, जिसमें उनके और उनके दोस्तों के इंटरव्यू शामिल हैं. दोस्तों ने बताया कि रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के एक जवान ने उस हथियार का इस्तेमाल किया जिससे मंसूरी के चेहरे और गर्दन पर घाव हुए.

लेडी हार्डिंग अस्पताल पहुंचने के बाद शेख इरशाद मंसूरी द्वारा ली गई दो सेल्फी. पहली तस्वीर सोमवार को अस्पताल पहुंचने के तुरंत बाद (बाएं) और दूसरी कुछ घंटे बाद (दाएं).

दिल्ली पुलिस ने ऐसे किसी हथियार के इस्तेमाल से इनकार किया है. वहीं, आरएएफ या उसके अधीन आने वाले केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

द वायर ने अपनी रिपोर्ट के संबंध में आरएएफ के महानिरीक्षक (आईजी) से भी प्रतिक्रिया मांगी है.

द वायर को यह भी बताया गया कि मंसूरी को डॉक्टरों ने उनकी चोटों के संभावित कारणों के बारे में बहुत कम जानकारी दी. उन्हें उनके इलाज या स्वास्थ्य की स्थिति से संबंधित कोई लिखित दस्तावेज भी नहीं दिया गया है. इसके विपरीत, आउटलुक के पत्रकार के पास अपने मेडिकल रिकॉर्ड की एक कॉपी है.

अस्पताल के बिस्तर पर मंसूरी द्वारा ली गई एक सेल्फी में उसके चेहरे और गर्दन पर पैलेट जैसे कई छोटे-छोटे घाव साफ दिखाई देते हैं. उनके दोस्त ने द वायर को बताया कि डॉक्टरों के अनुसार इनमें से दो चोटें- एक आंख के नीचे और दूसरी गले पर- बहुत गंभीर थीं.

द वायर की मौजूदगी में अस्पताल के कर्मचारियों ने मंसूरी के दोस्त से एक काग़ज पर हस्ताक्षर कराए.  इस कागज़ में लिखा था कि उन्हें बता दिया गया है कि सर्जरी के दौरान मंसूरी की आंखों की रोशनी जा सकती है और इसके लिए डॉक्टर ज़िम्मेदार नहीं होंगे.

मंसूरी उन घायल प्रदर्शनकारियों में शामिल थे, जिनसे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को लेडी हार्डिंग अस्पताल जाकर मुलाकात की थी. इस मुलाकात का एक वीडियो एएनआई सहित कई न्यूज़ एजेंसियों ने साझा किया, लेकिन उसमें ऑडियो नहीं था. वीडियो इस तरह से शूट किया गया था कि मंसूरी की चोटें साफ तौर पर दिखाई नहीं देतीं.

इस मुलाकात के बारे में पूछे जाने पर मंसूरी के दोस्त ने बताया कि नड्डा ने घायल युवक को फलों की एक टोकरी भेंट की और कहा, ‘सब ठीक हो जाएगा.’

उन्होंने बताया कि सर्जरी के दौरान ज़्यादातर बाहरी चीज़ें (पैलेट) निकाल दी गई थीं. पैलेट निकालने के लिए कई सर्जरी होने के बाद बुधवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, ‘मुझे नहीं पता कि मेरे साथ क्या हुआ है या क्या होगा. लेकिन मेरी आवाज़ वैसी ही रहेगी. मेरा देश मेरे लिए खुद से कहीं ज़्यादा कीमती है.’

पैलेट गन के इस्तेमाल की ख़बरें सबसे पहले सोमवार को सामने आईं – जिसमें कॉकरोच जनता पार्टी ने मंसूरी की तस्वीर का इस्तेमाल किया था – लेकिन दिल्ली पुलिस ने इन दावों को झूठा बताया.

इन आरोपों के जवाब में नई दिल्ली के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा, ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पुलिस फ़ोर्स द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल का दावा करने वाली रिपोर्टें पूरी तरह से ग़लत और गुमराह करने वाली हैं. जनता को सलाह दी जाती है कि वे बिना पुष्टि की गई सामग्री को साझा या प्रसारित न करें. कृपया कोई भी जानकारी पोस्ट या फ़ॉरवर्ड करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से तथ्यों की पुष्टि करें.’

गौरतलब है कि पैलेट गन और उससे होने वाले नुकसान का मुद्दा कश्मीर में नागरिकों के खिलाफ इसके व्यापक इस्तेमाल के बाद से लगातार चर्चा का विषय रहा है.