आईसीएमआर ने बीएचयू के कोवैक्सीन शोध को ख़ारिज किया, वापस लेने की मांग

बीएचयू द्वारा जारी एक अध्ययन, जिसमें कुल 926 लोगों ने हिस्सा लिया था, में कहा गया था कि इनमें से 33 प्रतिशत लोगों को कोवैक्सीन टीकाकरण के बाद किसी न किसी तरह के साइड इफेक्ट का सामना करना पड़ा. अब आईसीएमआर ने इस शोध पर सवाल उठाते हुए ख़ुद को इससे अलग कर लिया है.

क्या स्वास्थ्य संबंधी असुविधाजनक आंकड़े देने के चलते आईआईपीएस निदेशक को हटाया गया?

वीडियो: जुलाई में स्वास्थ्य मंत्रालय ने एनएफएचएस तैयार करने वाले इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ पॉपुलेशन साइंसेज के निदेशक को निलंबित कर दिया था, क्योंकि वह एनएफएचएस-5 के ‘आंकड़ों से नाखुश’ था. बीते दिनों उनके इस्तीफ़ा देने के बाद यह निलंबन रद्द किया गया. पूरा घटनाक्रम बता रही हैं बनजोत कौर.

भारत के हंगर इंडेक्स में 111वें स्थान पर आने के बाद सरकार का रिपोर्ट मानने से इनकार क्यों?

वीडियो: हाल ही में जारी ग्लोबल हंगर इंडेक्स रिपोर्ट में भारत 125 देशों में से 111 वें स्थान पर रहा, जहां यह बस कुछ बहुत छोटे अफ्रीकी देशों को ही पीछे छोड़ सका. भारत सरकार ने रिपोर्ट की मेथोडोलॉजी को ग़लत बताते हुए इसे अस्वीकार किया है. इंडेक्स बनाने वाली एजेंसियों ने सरकार की आपत्तियों पर कहा है कि इनमें दम नहीं है. 

आईआईपीएस निदेशक का निलंबन रद्द करने के बाद सरकार ने उनका इस्तीफ़ा स्वीकार किया

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बीते 28 जुलाई को इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ पॉपुलेशन साइंसेज (आईआईपीएस) के निदेशक को निलंबित कर दिया था, क्योंकि वह एनएफएचएस-5 के तहत ‘जारी आंकड़ों से नाखुश’ था. उनका निलंबन औपचारिक रूप से पिछले सप्ताह रद्द कर दिया गया था. निदेशक का निलंबन तब तक जारी रहा, जब तक उन्होंने अपना इस्तीफा नहीं दे दिया.

ग्लोबल हंगर इंडेक्स: 125 देशों की सूची में भारत 111वें स्थान पर

ग्लोबल हंगर इंडेक्स रिपोर्ट में भारत से नीचे रैंकिंग वाले देशों में तिमोर-लेस्ते, मोज़ाम्बिक, अफ़ग़ानिस्तान, हैती, लाइबेरिया, सिएरा लियोन, चाड, नाइजर, कांगो, यमन, मेडागास्कर, दक्षिण सूडान, बुरुंडी और सोमालिया शामिल हैं. भारत ने इसे यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया है कि रिपोर्ट तैयार करने की पद्धति दोषपूर्ण है.

देश में टीबी की दवाओं की किल्लत न होने का सरकार का दावा कितना सही है?

वीडियो: पिछले कुछ समय से टीबी रोग के इलाज में उपयोग होने वाली दवाओं की कमी संबंधी ख़बरें लगातार सामने आ रही हैं. इस रोग से जूझ रहे मरीज़ों के परिजनों का कहना है कि किल्लत के चलते दवाएं प्राप्त करने में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं, केंद्र सरकार का दावा है कि दवाओं के किल्लत की ख़बरें भ्रामक हैं.

‘डेटा सेट से नाख़ुश’ मोदी सरकार ने एनएफएचएस तैयार करने वाले संस्थान के निदेशक को सस्पेंड किया

केंद्र सरकार ने इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज (एनएफएचएस) के निदेशक केएस जेम्स को भर्ती में अनियमितता का हवाला देते हुए निलंबित कर दिया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला आईआईपीएस राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण तैयार करता है.

गांबिया से आई पांचवीं रिपोर्ट में भी भारतीय दवा को बच्चों की मौत का ज़िम्मेदार बताया गया

वीडियो: भारतीय कंपनी मेडन फार्मा की दवाइयों से गांबिया में सत्तर बच्चों की मौत की पुष्टि करने वाली एक और रिपोर्ट सामने आई है. गांबिया सरकार लगातार मेडन फार्मा और निर्यातक अटलांटिक फार्मा के ख़िलाफ़ कार्रवाई की बात कह रही. वहीं, बीते दिनों भारतीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बच्चों की मृत्यु डायरिया से हुई थी.

मणिपुर हिंसा के दो महीने: लोग बोले- उनका वर्तमान और भविष्य नष्ट; सरकार ने उन्हें अनाथ छोड़ दिया

वीडियो: मणिपुर में 3 मई को बहुसंख्यक मेईतेई और आदिवासी कुकी समुदाय के बीच शुरू हुई जातीय हिंसा जारी है. अब तक करीब 200 लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं जो 350 राहत शिविरों में रह रहे हैं.

मणिपुर हिंसा: विभिन्न एफ़आईआर से पता चलता है कि पुलिस शस्त्रागारों से आधुनिक ​​हथियार लूटे गए

मणिपुर हिंसा के दौरान पुलिस शस्त्रागारों से हथियार लूटने के मामले में दर्ज विभिन्न एफ़आईआर के द वायर द्वारा किए गए विश्लेषण से पता चलता है कि एके 47 और इंसास राइफल, बम एवं अन्य आधुनिक हथियार लूटे गए. उपद्रवी बुलेटप्रूफ जैकेट भी ले गए और पुलिस थानों में आग तक लगा दी.

एक और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में पुष्टि- भारतीय कफ सीरप के चलते ही गांबिया में बच्चों की मौत हुई थी

गांबिया में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा तैयार एक रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की गई है कि भारतीय कंपनी मेडन फार्मा की दवाइयों में मौजूद टॉक्सिन वहां सत्तर बच्चों की मौत की वजह थे. ऐसा निष्कर्ष देने वाली यह चौथी रिपोर्ट है. भारत सरकार अब तक उक्त दवाओं में टॉक्सिन की मौजूदगी की बात से इनकार करती रही है.

क्या कोविड-19 के बढ़ते मामलों के साथ ख़तरा भी बढ़ रहा है?

वीडियो: बीते कुछ दिनों में देश में कोविड-19 मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है, जिससे लोगों की चिंता बढ़ी है. हालांकि, वैज्ञानिक इस वृद्धि को 'मामूली' बताते हुए कह रहे हैं कि ऐसे उतार-चढ़ाव उम्मीद के अनुरूप हैं. लेकिन क्या कोई नया सब-वैरिएंट इसकी वजह है? क्या दुनिया के अन्य हिस्सों में भी ऐसा हुआ है?

बड़े सरकारी दावों के बीच मोदी राज में बना एक भी एम्स पूरी तरह काम नहीं कर रहा है

बीते 13 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक में दावा किया कि उनके शासनकाल में एम्स जैसी संस्थाओं की संख्या पहले के मुकाबले तीन गुना बढ़ी है. हालांकि, स्वास्थ्य मंत्रालय के डेटा के अनुसार, 2014 में उनकी सरकार आने के बाद से विभिन्न राज्यों में शुरू हुए एम्स में से एक भी पूरी तरह काम नहीं कर रहा है.

अमेरिकी सीडीसी रिपोर्ट तीसरी है, जो गांबिया में बच्चों की मौत को भारतीय कफ सीरप से जोड़ती है

अक्टूबर 2022 में डब्ल्यूएचओ ने बताया था कि हरियाणा की मेडन फार्मास्युटिकल्स द्वारा बनाई गईं खांसी की चार दवाओं में डायथिलिन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल नामक पदार्थ पाए गए हैं, जो मनुष्यों के लिए ज़हरीले माने जाते हैं और इससे गांबिया में 66 बच्चों की मौत हुई है. हालांकि, भारत ने अपनी जांच में दवा निर्माता कंपनी को क्लीनचिट दे दी थी.

कोविड-19 बीएफ.7 वेरिएंट: ‘नई’ लहर को लेकर चिंताओं के पीछे सच क्या है

वीडियो: सोशल मीडिया से लेकर टीवी चैनल तक कोविड की 'नई' लहर और लॉकडाउन की चिंताओं के बारे में बता रहे हैं. क्या कोविड-19 का बीएफ.7 स्वरूप अभी भारत में मिला है? केंद्र के अनुसार, 90% से अधिक आबादी को वैक्सीन की दो ख़ुराकें मिल चुकी हैं, तो फिर डर की वजह क्या है? बता रही हैं बनजोत कौर.