परीक्षाओं में लगातार ख़ामियां सामने आने के बाद सोमवार को कुछ छात्र संगठनों ने दिल्ली स्थित शिक्षा मंत्रालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान छात्र संगठनों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग के साथ ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को भंग करने और परीक्षा संबंधी तमाम गड़बड़ियों की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में करवाने की मांग भी उठाई.
नीट-यूजी पेपर लीक के बाद से यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को भंग करने की मांग कर रहा है. सोमवार को इसे संसदीय स्थायी समिति के सामने अपनी बात रखने की अनुमति नहीं दी गई, क्योंकि भाजपा सांसदों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर यूडीएफ का रुख़ पहले से ही जगजाहिर है और उसे एक निष्पक्ष गवाह नहीं माना जा सकता.
रविवार को उत्तर प्रदेश बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा के लिए कानपुर के एचएन मिश्रा पीजी कॉलेज के पास एकत्र उम्मीदवारों को कथित तौर पर आख़िरी समय पर बताया गया कि उन्हें आधार कार्ड की फोटोकॉपी दिखानी होगी, ऐसे में कई छात्रों और उनके परिजनों का पास की एक दुकान पर जमावड़ा लग गया. तभी दुकान के बाहर नाले को ढकने वाला कंक्रीट का स्लैब टूट गया, जिससे कई छात्र और उनके परिजन नाले में गिर गए.
सीयूईटी-यूजी 2026 की पहली पाली शनिवार को कई केंद्रों पर तकनीकी गड़बड़ी के कारण देर से शुरू हुई. एनटीए के अनुसार 3,765 अभ्यर्थी बायोमेट्रिक सत्यापन के बावजूद परीक्षा दिए बिना लौट गए. एजेंसी ने उनके लिए दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की है. घटना ने एनटीए की परीक्षा व्यवस्था पर नए सवाल खड़े किए हैं.
दिल्ली विश्वविद्यालय के कालिंदी कॉलेज की दो महिला प्रोफेसरों ने कुछ पुरुष शिक्षकों पर यौन उत्पीड़न, आपत्तिजनक टिप्पणियां और धमकी देने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है. दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के बाद उन्होंने कुलपति प्रो. योगेश सिंह को पत्र लिखकर स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की अपील की है.
नीट पेपर लीक विवाद के बाद अब सीयूईटी-यूजी 2026 परीक्षा शनिवार को कुछ सेंटर्स पर देर से शुरू हुई, जिसे लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं. इस दौरान सोशल मीडिया पर छात्रों और अभिभावकों के कई वीडियो भी सामने आए, जिसमें बताया गया कि परीक्षा की पहली पाली के दौरान विभिन्न राज्यों के कुछ केंद्रों पर 2 घंटे से अधिक की देरी हुई, जिससे छात्र परेशान हुए. कई केंद्रों पर छात्रों ने नारेबाजी भी की.
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सीबीएसई द्वारा ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) कॉन्ट्रैक्ट देश की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी 'टीसीएस' को छोड़कर 'कोएम्प्ट एडुटेक' को दिए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीबीएसई की गड़बड़ी पर चुप्पी दिखाती है कि उन्हें केवल अपनी सरकार बचाने की चिंता है, लाखों छात्रों के भविष्य की नहीं.
सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आने के बाद इस हफ़्ते सैकड़ों स्कूल प्रधानाध्यापकों को एक सोशल मीडिया प्लेबुक यानी टूलकिट भेजी गई है. इसमें उनसे आग्रह किया गया है कि वे सीबीएसई के बचाव में सोशल मीडिया पर वीडियो और रील पोस्ट करें.
नीट-यूजी प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए वायुसेना की मदद लेने पर विचार से लेकर एसएससी परीक्षा रद्द होने और यूजीसी-नेट आवेदन में तकनीकी खामियों तक, हालिया घटनाएं बताती हैं कि देश की परीक्षा प्रणाली गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है. इसका सबसे बड़ा खामियाजा लाखों अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ रहा है.
21 जून को होने वाले नीट-यूजी री-एग्ज़ाम को लेकर कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ख़ुद इस परीक्षा की निगरानी करेंगे. इसके अलावा इस परीक्षा में पहली बार भारतीय सशस्त्र बलों (थल सेना और वायुसेना) की मदद लेने की बात भी सामने आ रही है, जिसे लेकर कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए हैं.
नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बाद शिक्षा पर बनी संसदीय स्थायी समिति ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को परीक्षा से जुड़े तमाम पहलुओं पर विस्तार से जवाब देने के लिए लगभग 20 सवाल भेजे हैं. इसमें नीट के पेपर तैयार करने के लिए विशेषज्ञों द्वारा एसओपी के पालन से लेकर पेपर सेट करने, अनुवाद करने, लाने- ले जाने और एजेंसी के स्टाफ की संख्या तक शामिल है.
सीबीएसई की 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में कथित गड़बड़ी का मामला तब सुर्खियों में आया, जब एक छात्र ने दावा किया कि उसके रोल नंबर पर किसी और की उत्तर पुस्तिका अपलोड कर दी गई. बाद में सीबीएसई ने तकनीकी गलती स्वीकार की, लेकिन इस मुद्दे को उठाने पर छात्र को सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और ‘पाकिस्तानी’ जैसे टिप्पणियों का सामना करना पड़ा.
आरएसएस से जुड़े संगठनों द्वारा लाल किले के मैदान में आयोजित एक आदिवासी सम्मेलन में शामिल होने आए प्रतिनिधियों के ठहराने के लिए राजधानी के कम-से-कम 72 सरकारी स्कूलों को सम्मेलन की अवधि के दौरान आवासीय केंद्रों में बदलने के आदेश दिए गए. शिक्षकों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि यह कार्यक्रम एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा आयोजित किया गया था.
एनसीईआरटी के दिल्ली स्थित मुख्यालय ने 8 मई को एक सर्कुलर जारी किया था, जिसमे लंच ब्रेक को नियंत्रित करने और कार्यालय समय के दौरान कर्मचारियों के कैंपस से बाहर जाने पर रोक लगाने की बात कही गई है. एनसीईआरटी की फैकल्टी ने इसे बढ़ती निगरानी और प्रशासनिक नियंत्रण की बानगी बताया है और सर्कुलर की भाषा और तरीके की तुलना औपनिवेशिक दौर से की है.
उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने घोषणा की है कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ड्रेस कोड अनिवार्य किया जाएगा. विपक्षी दलों ने इस क़दम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे युवाओं को नियंत्रित करने की सोची-समझी कोशिश बताया है.