क़र्ज़ माफ़ी और फ़सलों का उचित दाम न मिलने से नाराज़ किसानों ने महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में अनाज, फल, दूध और सब्ज़ियों की आपूर्ति रोक दी है.
जन गण मन की बात की 62वीं कड़ी में विनोद दुआ भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और डिजिटल इंडिया योजना की चर्चा कर रहे हैं.
संप्रग सरकार के समय राष्ट्रपति बने प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल इस साल 25 जुलाई को समाप्त होने वाला है.
जन गण मन की बात की 61वीं कड़ी में विनोद दुआ बाबरी विध्वंस मामला और देश की उच्च शिक्षा पर चर्चा कर रहे हैं.
गाय और अन्य जानवरों के वध के लिए ख़रीद-फ़रोख़्त पर केंद्र सरकार के आदेश पर तीन अदालतों ने तीन तरह का आदेश दिया है तो राज्य सरकारों ने कड़ा विरोध जताया है.
वह कैसी सोच है जिसे पूरी दुनिया में केवल एक गाय ही रक्षा करने योग्य लगती है. सड़क के किनारे सोया थका-हारा मज़दूर नहीं, पुल के नीचे मिट्टी में पलते दुर्बल बच्चे नहीं, अस्पतालों के बाहर बैठे रोगी नहीं.
किसी भी पेशेवर सेना के लिए उसकी प्रतिष्ठा सबसे ज़रूरी होती है पर ऐसा लगता है कि भारतीय सुरक्षा के शीर्ष पद पर बैठे लोग चाहे वे मंत्रालय में हों या सेना में, ये बात भूल गए हैं.
जन गण मन की बात की 60वीं कड़ी में विनोद दुआ पशुवध पर पाबंदी और मेक इन इंडिया पर चर्चा कर रहे हैं.
आडवाणी, जोशी, उमा भारती, विनय कटियार ने ख़ुद को आरोपों से बरी किए जाने का आवेदन अदालत में दिया, जिसे न्यायाधीश ने ख़ारिज कर दिया.
महिलाओं के सबसे अधिक सुरक्षित होने का दावा करने वाली दिल्ली में जब सरेआम यह हो सकता है तो छोटी जगहों पर कैसी धर-पकड़ होती होगी?
मोदी यह समझाने की कितनी भी कोशिश करें कि उनके आने से बदलाव आया है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि अर्थव्यवस्था से जुड़े अधिकांश क्षेत्रों में सरकार प्रगति करने के लिए जूझती नज़र आ रही है.
यह बेहद दुख की बात है कि तमाम गांवों में पशुओं की बड़ी संख्या में मौत होने के बावजूद अभी तक उनकी रक्षा के लिए कोई असरदार प्रयास नहीं हुए हैं.
भले ही भीम आर्मी की कोई हिंसक गतिविधि न हो, पर प्रतिक्रियावादी हिंदुओं में यह हिंसक प्रतिक्रांति को और भी ज़्यादा हवा देगी. इससे समानता स्थापित होने वाली नहीं है.
साक्षात्कार: छह साल से मणिपुर की एक मां अपने बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए भटक रही है. उनके बेटे की हत्या का आरोप राज्य के मुखिया एन. बीरेन सिंह के बेटे पर है.
सीएम योगी के दौरे के पहले सार्वजनिक रूप से एक समुदाय पर ‘गंदगी और प्रदूषण’ का विचार आरोपित किया गया, जबकि आज़ाद भारत का लोकतंत्र उस समुदाय के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी नहीं निभा पाया है.