आरटीआई में खुलासा- 2021-22 में सरकारी योजनाओं के नाम पर भाजपा ने जुटाया ‘पार्टी फंड’

भाजपा पर कुछ वर्ष पहले स्वच्छ भारत, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और किसान सेवा जैसी सरकारी योजनाओं के नाम पर जनता से ‘अवैध रूप से’ चंदा इकट्ठा करने का आरोप लगा है. पत्रकार बीआर अरविंदाक्षन को आरटीआई के ज़रिये पता चला है कि भाजपा को इन योजनाओं के लिए चंदा जुटाने की कोई विशेष अनुमति या स्वीकृति न तो केंद्र सरकार के किसी मंत्रालय से मिली थी, न ही पीएमओ से.

एनएचआरसी ने प्रशासन से क़र्ज़ में फंसकर जान गंवाने वाले शख़्स के परिवार को आर्थिक मदद देने को कहा

सितंबर 2024 में यूपी के कुशीनगर ज़िले में मुसहर समुदाय से आने वाले शैलेश की संदिग्ध मौत हो गई थी. बाद में सामने आया था कि वे माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के क़र्ज़ जाल में फंसे थे. इस घटना पर द वायर में छपी एक रिपोर्ट के आधार पर मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. लेनिन ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी. अब आयोग ने ज़िला प्रशासन को शैलेश के परिवार को आर्थिक सहायता देने का आदेश दिया है.

जब बस्तर नक्सल मुक्त हो जाएगा, तब क्या होगा?

देश में माओवाद के ख़त्म होने की चर्चाएं तेज़ हैं, और दावा किया जा रहा है कि यह विकास की शुरुआत है. लेकिन माओवाद प्रभावित क्षेत्रों का आदिवासी समाज अपने जल-जंगल-ज़मीन को लेकर चिंतित है. खनन, सैन्य कैंपों के विस्तार और संसाधनों पर बढ़ते कॉरपोरेट दावों के बीच उनके अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हैं.

नए लेबर कोड्स: ‘सुधार’ के नाम पर श्रमिक अधिकारों का दमन और कॉरपोरेट हितों को वैधता

'सुधार' और 'सरलीकरण' के नाम पर एक ऐसा तंत्र खड़ा किया गया है, जो दशकों पुराने श्रमिक संघर्षों और उनकी सुरक्षा के अधिकारों को ताक में रखकर पूंजीपतियों की सुविधाओं को प्राथमिकता देता है. श्रम सुधारों का यह स्वरूप कारोबार के ऐसे माहौल का निर्माण कर रहा है जहां कॉरपोरेट हित सर्वोपरि हैं, और श्रमिकों की जायज़ मांगों की अनदेखी की जा रही है.

समकालीन कला उतनी स्मृतिहीन नहीं है जितनी समकालीन आलोचना

कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: हिंदी आलोचना की तरह, कलालोचना में, ‘नितान्त समसामयिकता’ का लगभग वर्चस्व-सा है. आलोचना का एक बड़ा हिस्सा गैलरियों के आग्रह और उनके द्वारा दिए गए मोटे पारिश्रमिक पर लिखा जाता है. इसलिए उसमें विश्लेषण और प्रशंसा तो होती है, किसी तरह की कमी का उल्लेख नहीं होता.

एसआईआर को लेकर ‘जागरूकता फैलाने’ की आड़ में दिल्ली भाजपा के ‘इस्लामोफोबिक’ बोल

देश के कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जारी एसआईआर के बीच, दिल्ली भाजपा के सोशल मीडिया अकाउंट पर इस प्रक्रिया की आड़ में इस्लामोफोबिक पोस्ट साझा करने के आरोप लग रहे हैं. ज़मीनी स्तर पर एसआईआर से जुड़ी मानवीय और प्रशासनिक समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन भाजपा पूरी प्रक्रिया को केवल ‘घुसपैठियों को हटाने’ के अभियान के रूप में पेश कर रही है.

दिल्ली में अपनी सुरक्षा का ज़िम्मा ख़ुद लें महिलाएं, क्योंकि आयोग अभी बंद है!

दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच दिल्ली महिला आयोग डेढ़ साल से बंद पड़ा है. आयोग की आखिरी नियुक्त अध्यक्ष स्वाति मालिवाल थीं, जिन्होंने जनवरी 2024 को राज्यसभा जाने के लिए पद छोड़ा है. इस साल फरवरी में भाजपा सरकार आने के बाद सीएम रेखा गुप्ता ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर तमाम दावे किए थे लेकिन आज तक आयोग के दफ़्तर पर लगा ताला खुल नहीं सका.

एल्गार परिषद केस: बिना ट्रायल के जेल में पांच साल से अधिक रहने के बाद हेनी बाबू को ज़मानत मिली

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एल्गार परिषद केस में गिरफ़्तार किए गए दिल्ली यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर हेनी बाबू को मुकदमे में देरी के आधार पर ज़मानत दे दी. वह 28 जुलाई 2020 से मुंबई के तलोजा जेल में बंद हैं. एनआईए ने उनके ज़मानत का विरोध करते हुए आदेश पर रोक लगाने की मांग की. अदालत ने अनुरोध को ख़ारिज कर दिया.

सरकार को हमारे फोन में उसका साइबर सुरक्षा ऐप चाहिए, पर क्या सरकार के पास हमारा डेटा सुरक्षित है?

मोदी सरकार ने नए मोबाइल फोन में संचार साथी ऐप अनिवार्य किया है, जिसे यूज़र्स हटा नहीं सकते. विशेषज्ञों और नागरिकों ने इसे निजता पर ख़तरा बताया है. साइबर सुरक्षा की बात ऐसे समय में हो रही है जब पिछले कुछ सालों में CoWIN, आईसीएमआर और अन्य सरकारी वेबसाइट या प्लेटफॉर्म से भारतीयों का डेटा चोरी हुआ है.

भोपाल गैस त्रासदी: पीड़ितों ने भाजपा पर धोखा देने का आरोप लगाया, पार्टी के ख़िलाफ़ ‘आरोपपत्र’ जारी किया

वर्ष 1984 के भोपाल गैस हादसे के 41 साल बाद, पीड़ितों के संगठनों ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकारों ने सालों से आपराधिक आरोप कम करने, पुनर्वास उपायों को रोकने, मुआवज़े की कोशिशों को कमज़ोर करने और भारत में डॉव केमिकल को फैलने में मदद की है.

नेशनल हेराल्ड केस: क्या गांधी परिवार के ख़िलाफ़ नई एफआईआर दर्ज कर ईडी अपनी ग़लती छिपा रहा है?

नेशनल हेराल्ड केस में ईडी की चार्जशीट के छह महीने बाद गांधी परिवार के ख़िलाफ़ नई एफआईआर क्यों दर्ज हुई? क्या ईडी को मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत मिले हैं? यह मामला राजनीतिक रूप से इतना संवेदनशील क्यों माना जा रहा है? द वायर की यह रिपोर्ट इस पूरे मामले की परतें खोलती है.

सरकार का सभी फोन कंपनियों को हर नए फोन में सरकारी ‘संचार साथी’ ऐप डालने का निर्देश

सरकार ने सभी नए स्मार्टफोनों में अनइंस्टॉल न किए जा सकने वाले ‘संचार साथी’ ऐप को अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल करने का निर्देश दिया है, जिससे गंभीर प्राइवेसी चिंताएं उठी हैं. विशेषज्ञों और विपक्ष ने इसे नागरिकों की निगरानी का प्रयास बताया और निर्देश की तुरंत वापसी की मांग की है. इसी बीच दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि 'संचार साथी ऐप अनिवार्य नहीं है, इसे डिलीट किया जा सकता है.'

न कोई तटस्थ साहित्य होता है, न तटस्थ इतिहास…

कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: इतिहास ज़्यादातर बहिर्मुख होता है, साहित्य अंतर्मुख भी. सचाई पर दोनों में से किसी का एकाधिकार नहीं होता, न हो पाता है. इतिहास और साहित्य दोनों की सचाई के गल्प रचते हैं. साहित्य अपनी गल्पता खुले ढंग से स्वीकार करता है पर इतिहास को अपनी गल्पता स्वीकार करने में हिचक है, होती है.

भारत में बंधुआ मज़दूरी का सच: 100% श्रमिक दलित-आदिवासी-ओबीसी, 80% मामलों में एफआईआर तक नहीं

नेशनल कैम्पेन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बॉन्डेड लेबर द्वारा जारी नई रिपोर्ट बताती है कि भारत में बंधुआ मज़दूरी आज भी गहराई से जाति आधारित शोषण पर टिकी है. रिपोर्ट बताती है कि बचाए गए 950 बंधुआ मज़दूरों में एक भी सवर्ण समुदाय से नहीं था. इसी तरह 80% मामलों में एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई. पुनर्वास, मुआवजा और क़ानूनी कार्रवाई- तीनों मोर्चों पर हालात बेहद ख़राब हैं.

क़िस्सा सारंगढ़: छत्तीसगढ़ के पहले दाऊदी बोहरा कुटुंब की कहानी

छत्तीसगढ़ पहुंचने वाले शुरुआती दाऊदी बोहराओं में से एक मुल्ला इब्राहिम अली अपने परिवार के साथ सारंगढ़ पहुंच कर यहीं रच बस गए. इनका यहां आना तब हुआ जब सारंगढ़ के साथ-साथ देश के सामाजिक और व्यापारिक इतिहास में मील के नए पत्थर गड़ रहे थे. फिर एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में इब्राहिम अली की कहानी भी इस इतिहास के साथ पानी में शक्कर की तरह घुल गई.