इज़रायल ने फ़िलिस्तीनी बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाकर गाज़ा में नरसंहार जारी रखा है: संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र के एक जांच आयोग द्वारा जारी 94 पेज के रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के शुरुआती दो सालों में गाज़ा में कम से कम 20,179 बच्चे मारे गए और 44,143 घायल हुए, जो कुल मौतों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है. आयोग ने कहा कि मरने वालों की संख्या इससे कहीं ज़्यादा हो सकती है, क्योंकि माना जा रहा है कि हज़ारों बच्चे अभी भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं.

न्यूज़क्लिक को राहत, मगर अब भी बेरोज़गारी, बदनामी और अनिश्चितता का बोझ ढो रहे हैं पूर्व कर्मचारी

फरवरी 2024 तक न्यूज़क्लिक में क़रीब सौ लोग काम करते थे, जिनका घर सिर्फ़ वहीं के तनख़्वाह से चलता था. लेकिन संस्थान के ख़िलाफ़ एजेंसियों की कार्रवाई और बैंक खाते फ्रीज़ होने के चलते न्यूज़क्लिक से नौकरी गंवाने वाले क़रीब 80 प्रतिशत कर्मचारियों को अब तक कोई स्थाई नौकरी नहीं मिली है.

नोएडा: किशोर की गिरफ़्तारी पर एनएचआरसी के संज्ञान के बाद पीड़ित परिवार का आरोप, ‘पुलिस बना रही दबाव’

नोएडा श्रमिक आंदोलन मामले में एक नाबालिग को दो महीने तक वयस्क क़ैदियों के साथ जेल में रखे जाने पर द वायर हिंदी की रिपोर्ट का एनएचआरसी ने संज्ञान लिया है, जिसके बाद गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने उक्त किशोर को 'दिनेश' कहते हुए बालिग होने का दावा किया है. दिनेश नाबालिग के बड़े भाई हैं और उनका आरोप है कि पुलिस ने उन्हें एक वीडियो में अपने भाई द्वारा उनका आधार कार्ड चुराकर नौकरी करने की बात स्वीकारने को कहा

राम मंदिर चढ़ावा: कथित गड़बड़ी की शिकायत करने वाले पूर्व कारसेवक बोले- अयोध्या चोरों के हाथों में

बीते दो हफ़्तों से ज़्यादा समय से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर के फंड में गड़बड़ी और मंदिर परिसर से कीमती चढ़ावे की चोरी के आरोपों के चलते सुर्ख़ियों में है. इस संबंध में अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में 16 जून से 18 जून के बीच फंड के ग़लत इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए तीन शिकायतें दर्ज की गई हैं. हालांकि, अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है.

‘मैं संसार से विरक्त होकर नहीं, उसमें अनुरक्त रहकर ही विदा लेना चाहता हूं’

कभी-कभार में इस सप्ताह वरिष्ठ साहित्यकार अशोक वाजपेयी अपने 'उत्तरकाल' की व्याख्या करते हुए लिखते हैं, 'मुझे किसी तरह की मुक्ति की तलाश नहीं है, न भवचक्र से, न जन्मचक्र से. संसार बहुत तेज़ी से बदल गया और रहा है- वह निरंतर क्रूर-निष्करुण-असह्य होता जाता है पर उसमें, फिर भी, सचाई और विवेक, ईमानदारी और सुंदरता, अर्थ और संभावनाएं बची हुई हैं. मैं इस बचे हुए को अलक्ष्य नहीं करना चाहता.'

उत्तर प्रदेश: क्या भाजपा के मनोवैज्ञानिक युद्ध से पार पा सकेगी सपा?

आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा प्रतिद्वंद्वी सपा को अभी से मनोवैज्ञानिक युद्ध में उलझाने में लग गई है. वहीं, पश्चिम बंगाल में केंद्रीय चुनाव आयोग के पक्षपातपूर्ण रवैये के मद्देनज़र अनेक प्रेक्षक (जिनमें सपा के शुभचिंतक नहीं भी हैं) प्रतिद्वंद्वियों की जीत-हार की संभावनाओं से ज़्यादा इस सवाल से दो चार हैं कि विधानसभा चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होंगे भी या नहीं?

देर से मिली राहत, साथ में बढ़ा नियंत्रण: नोएडा श्रमिक आंदोलन के बाद सरकार की दोहरी रणनीति

अप्रैल के मज़दूर आंदोलन के बाद एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार ने मज़दूरी बढ़ोत्तरी और कल्याणकारी उपायों की घोषणा की, वहीं दूसरी ओर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में निगरानी, गिरफ्तारियों और पुलिस दख़ल में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली.

हिंदुत्व का प्रभुत्व: किसके पास बची है अपना आराध्य चुनने की आज़ादी?

मीडिया यह मानकर चलता है कि हिंदू धर्म से अलग विश्वास जताने वाला व्यक्ति अवश्य किसी बड़ी साज़िश का हिस्सा होगा और निस्संदेह स्वयं निर्णय लेने में सक्षम नहीं होगा. वह व्यक्ति वोट दे सकता है, विवाह कर सकता है, संतान उत्पन्न कर सकता है; क़ानून उसे इन सबके लिए वयस्क मानता है. लेकिन वह स्वयं अपना ईश्वर या ख़ुदा नहीं चुन सकता.

अयोध्या: राम मंदिर के चढ़ावे के गबन का विवाद आगे कौन-सा मोड़ लेगा?

अयोध्या के चढ़ावे के गबन मामले में कई प्रतिप्रश्न अभी तक अनुत्तरित हैं. यह कि अगर कोई उल्लेखनीय बात सामने नहीं आई तो ट्रस्ट ने प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार से जांच के लिए एसआईटी क्यों गठित करवाई? ऐसी एसआईटी, जिसके सदस्यों की ही निष्पक्षता पर गंभीर संदेह हैं. विरोधी तो कह रहे हैं कि इस एसआईटी जांच के पीछे ट्रस्ट की मंशा सच सामने लाने की नहीं, सीबीआई या ईडी की जांच से बचने की है.

नोएडा: श्रमिक आंदोलन से कोई नाता नहीं, दो महीने से हिरासत में नाबालिग; ज़मानत के लिए पैसे तक नहीं

नोएडा मजदूर आंदोलन मामले में पुलिस द्वारा 14 अप्रैल को हिरासत में लिए जाने के बाद एक नाबालिग को करीब दो महीने तक वयस्क आरोपियों के साथ जेल में रखा गया. मेडिकल जांच में नाबालिग साबित होने के क़रीब हफ़्तेभर बाद उन्हें जुवेनाइल होम स्थानांतरित किया गया. 29 मई को ज़मानत मिल जाने के बाद भी वह बाहर नहीं निकल सके हैं क्योंकि उनके परिवार के पास ज़मानत राशि भरने के लिए पैसे ही नहीं हैं.

क्या एनसीपीआई के सदस्य बाग़ी टीएमसी सांसदों को स्वीकार कर सकेंगे?

नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया, जिसमें टीएमसी के बाग़ी सांसद शामिल हुए हैं, के संगठन संचिव शांतनु डे ने द वायर से कहा कि वह नारदा और सारदा घोटालों में संलिप्त, भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे तृणमूल कांग्रेस सांसदों के साथ पार्टी के विलय के क़दम का विरोध करते हैं. वहीं, पार्टी के दूसरे नेताओं ने हाल ही में बंगाल में भाजपा की जीत का जश्न मनाया था.

तिलचट्टा प्रतिरोध: उम्मीद का एक धुंधला क्षितिज

कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: कॉकरोच जनता पार्टी को तरह-तरह से व्याख्यायित, संदेहास्पद बताने की कोशिशें हो रही हैं. यह होना ऐसे पिछले आंदोलन आदि के हश्र के अनुभव की रोशनी में, अस्वाभाविक और अतर्किक नहीं है. लेकिन भारत के युवाओं की निष्क्रियता और राजनीतिक दृष्टि के अभाव से क्षुब्ध-असंतुष्ट हम जैसे कुछ बूढ़ों को इस पहल से कुछ उम्मीद बंध रही है.

बशीर बद्र: बादल का साया है दुनिया, हर शै आनी-जानी है

द वायर उर्दू के संपादक फ़ैयाज़ अहमद वजीह मक़बूल शायर बशीर बद्र को याद करते हुए लिखते हैं कि 'सादा लफ़्ज़ों की मीनाकारी उनके यहां इस क़दर है कि उन्हें उर्दू शायरी का ‘गोल्डस्मिथ’ और ‘ज़रगर’ कहते हुए मेरे सामने उस कुम्हार की सूरत आ जाती है जो कच्ची मिट्टी के साथ रक्स करते हुए अपनी आंखों के सुनहरे जादू जगाता है. बशीर बद्र इसी जादू के शायर हैं.'

राम मंदिर चढ़ावा विवाद: अयोध्या में जो हो रहा है, उसमें नया क्या है?

राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर अयोध्या में आम तौर पर लोग एक ही सवाल पूछ रहे हैं - यह कि जो कुछ कहा-सुना या किया जा रहा है, उसमें नया क्या है? उसकी शुरुआत तो 22-23 दिसंबर, 1949 को बाबरी मस्जिद में मूर्ति रखे जाने के बाद तभी हो गई थी, जब वहां चढ़ावे के तौर पर अकूत धन आना शुरू हुआ था.

श्रमिक आंदोलन: जिस व्यक्ति से संबंध के दावे पर हुई कार्यकर्ता की गिरफ़्तारी, उसे दो हफ़्ते में मिली ज़मानत

नोएडा मज़दूर आंदोलन से जुड़े मामले में बीते महीने डीयू के एक छात्र कार्यकर्ता योगेश मीणा की गिरफ़्तारी हुई और मीडिया में आई ख़बरों में पुलिस ने योगेश के ख़िलाफ़ कार्रवाई का एक आधार इसी मामले में गिरफ़्तार एक व्यक्ति अनिल कुमार के साथ उनके कथित संबंध से जोड़ा था. अब एक स्थानीय कोर्ट ने अनिल को ज़मानत देते हुए कहा है कि हिंसक घटनाओं में उनकी प्रत्यक्ष संलिप्तता दिखा सके, ऐसा कोई साक्ष्य उसके समक्ष पेश नहीं किया गया.

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