उत्तर प्रदेश के गोंडा, फतेहपुर और बरेली में एसआईआर के काम में लगे तीन बीएलओ की कथित तौर पर काम के अत्यधिक दबाव को लेकर मौत की ख़बर सामने आई हैं. स्थानीय प्रशासन ने इन मामलों में किसी भी तरह के दबाव से इनकार किया है, वहीं चुनाव आयोग अब तक इस पर चुप्पी साधे हुए है.
भाजपा और दक्षिणपंथी समूह भले ही यह दावा कर रहे हों कि श्री माता वैष्णो देवी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस सरकार से बिना किसी फंडिंग के, केवल चंदे से चल रहा था, लेकिन दस्तावेज़ों से पता चलता है कि इस संस्थान को संचालित करने वाले श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय को सरकार से वित्तीय सहायता मिलती रही है.
पुण्यतिथि विशेष: 2002 में 27 नवंबर के दिन सुमन का निधन हुआ तो अटल प्रधानमंत्री थे और उन्होंने उनको श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा था कि 'सुमन' हिंदी कविता के सशक्त हस्ताक्षर भर नहीं, अपने समय की सामूहिक चेतना के संरक्षक भी थे. क्योंकि उन्होंने अपनी रचनाओं में न केवल अपनी भावनाओं का दर्द व्यक्त किया, बल्कि अपने युग के मुद्दों पर निर्विवाद रचनात्मक टिप्पणियां भी कीं.
डॉ. आंबेडकर का कहना था कि हिंदू राज इस देश के लिए सबसे बड़ी आपदा होगी क्योंकि हिंदू राष्ट्र का सपना आज़ादी, बराबरी और भाईचारे के ख़िलाफ़ है, और यह लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों से मेल नहीं खाता. आज संविधान दिवस पर हमें इन शब्दों को फिर से याद करने की ज़रूरत है.
दिल्ली के पास बिसाहड़ा गांव में दस साल पहले मोहम्मद अख़लाक़ की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. अख़लाक़ के छोटे बेटे दानिश भी बुरी तरह घायल हो गए थे. लेकिन एक दशक बाद भी यहां के लोगों को इस हत्याकांड को लेकर कोई अफ़सोस नहीं. अगर कुछ है, तो सिर्फ आरोपियों के लिए सहानुभूति और योगी आदित्यनाथ के लिए धन्यवाद.
दुनिया भर में सरकारें और निजी कंपनियां मूलवासियों को उनके जल-जंगल-जमीन से बेदखल करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं. और उन्हीं आदिवासियों को पर्यटकों के मनोरंजन की वस्तु बना दिया जा रहा है.
रामचंद्र गुहा लिखते हैं कि स्वामीनाथन को वेरियर एल्विन की पुस्तक ‘द ट्राइबल आर्ट ऑफ मिडल इण्डिया’ ने प्रेरित किया था. दरअसल, एल्विन को पढ़ने से बहुत पहले स्वामी आदिवासी जीवन को समझ चुके थे.
कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: सत्ता पहले असहिष्णुता को बढ़ावा देती है, फिर हिंसा की अनदेखी करती है और फिर अपराधियों को बगैर दंड दिए छोड़ देती है. क्या यह संविधान से जानबूझकर किया जा रहा अपसरण नहीं है?
सुधा भारद्वाज अपनी जेल डायरी, ‘फाँसी यार्ड से’, में बतलाती हैं कि उस चारदीवारी के पीछे किस तरह का सामाजिक भेदभाव होता है, यंत्रणा की कितनी परतें मौजूद हैं, कैसे एक यंत्रणा दूसरी को गाढ़ा कर देती है. किताब का चयनित अंश.
माड़वी हिड़मा पुलिस के दस्तावेज़ों में मोस्ट वांटेड नक्सली था, लेकिन आम लोगों के लिए हीरो था, जिसने अपने जल-जंगल-जमीन के लिए हथियार उठाया था. ग्रामीण आरोप लगा रहे हैं कि हिड़मा को मुठभेड़ में नहीं, बल्कि हिरासत में लेकर मारा गया है.
अफ़ग़ानिस्तान के उद्योग और वाणिज्य मंत्री अलहाज नूरुद्दीन अज़ीजी का भारत दौरा ऐसे समय हो रहा है जब तालिबान ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के साथ व्यापारिक संबंधों को स्थगित करने का निर्णय लिया है. पिछले दो महीनों में यह तालिबान के मंत्रियों का दूसरा भारत दौरा है.
बिहार की महिलाएं अब केवल तटस्थ वोटर नहीं, चुनाव की निर्णायक शक्ति बन चुकी हैं. अब सवाल यह है कि क्या नई सरकार उन महिलाओं के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला पाएगी, जिनके भरोसे वह सत्ता तक पहुंची है?
पुस्तक अंश: अलक़ाज़ी और पद्मसी परिवारों के आईने से आप भारतीय समकालीन रंगमंच के इतिहास को देख सकते हैं. कुछ बरस पहले इब्राहीम अलक़ाज़ी के बेटे और एलेक पद्मसी के भांजे फ़ैसल अलक़ाज़ी ने एक किताब लिखी, 'एंटर स्टेज राईट'. भारतीय रंगमंच की अनूठी दास्तान इस किताब का अनुवाद युवा नाट्य आलोचक अमितेश कुमार ने किया है. पढ़िए इसका एक अंश.
कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: अगर हम साहित्य के पास जाते और उससे प्रतिकृत होते हैं तो उसमें जीवन के स्पंदन की बड़ी भूमिका है. किसी कृति में जीवन का स्पंदन हमें आकर्षित करता है और स्पंदन की अनुपस्थिति साहित्य से अपनापा नहीं जगाती.
बिहार विधानसभा चुनाव में राजद ने 2010 के अपवाद को छोड़कर इतिहास का अपना सबसे ख़राब प्रदर्शन किया है. 143 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए पार्टी ने केवेल 25 सीट पर जीत दर्ज की है. ऐसे में सवाल के घेरे में पार्टी नेता और महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव हैं.