सरकार का दावा- देश में अब एक भी नक्सल प्रभावित ज़िला नहीं, राज्यसभा में दी जानकारी

राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि देश का अब कोई भी ज़िला वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित नहीं है. गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार, झारखंड का पश्चिमी सिंहभूम फिलहाल एकमात्र विशेष निगरानी वाला ज़िला है, जहां नक्सली हिंसा पर काबू पा लिया गया है, लेकिन एहतियात के तौर पर विशेष निगरानी जारी रहेगी.

केंद्र सरकार ने दो राज्यों में खनन के लिए दो हज़ार हेक्टेयर से अधिक वन भूमि के डायवर्जन को मंज़ूरी दी

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिकार प्राप्त समिति ने ओडिशा की अलकनंदा कोल माइंस, छत्तीसगढ़ के पुरुंगा भूमिगत कोयला ब्लॉक और पेलमा ओपन कास्ट कोयला खदान परियोजना को स्टेज-1 मंज़ूरी की सिफ़ारिश की है. इन तीन परियोजनाओं के लिए कुल 1,737 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन का प्रस्ताव है. अलकनंदा कोल माइंस परियोजना के लिए 3.30 लाख से अधिक पेड़ काटे जाने की संभावना जताई गई है.

छत्तीसगढ़: बस्तर में लंबित बोधघाट परियोजना को फिर से शुरू करने ख़िलाफ़ उतरे आदिवासी

हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर में आदिवासियों के विरोध के कारण पिछले पांच दशक से लंबित प्रस्तावित बोधघाट परियोजना के लिए सर्वे शुरू किया है. अब क्षेत्र के 56 गांवों के लोगों ने कहा कि वे अपनी ज़मीन, जंगल और पवित्र जगहों को ऐसी परियोजनाओं के लिए नहीं छोड़ेंगे. उन्होंने चेताया है कि अगर स्थानीय सहमति के बिना सर्वे या परियोजना से जुड़ा काम हुआ, तो प्रभावित गांव पूरे बस्तर में बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे.

बीते तीन सालों में वन भूमि पर 28 लाख से ज़्यादा पेड़ों को काटने की मंज़ूरी दी गई: रिपोर्ट

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को जुलाई 2023 से मई 2026 के बीच वन भूमि डायवर्जन के 288 अलग-अलग प्रस्ताव मिले थे, जिनमें से उसने 242 को मंज़ूरी दी है. एक रिपोर्ट के अनुसार, खनन परियोजनाओं के तहत सबसे ज़्यादा पेड़ काटने की मंज़ूरी दी गई या पेड़ काटे गए.

छत्तीसगढ़: स्कूलों में दिन में तीन बार प्रार्थना, गायत्री मंत्र के साथ राष्ट्रगान अनिवार्य; विरोध शुरू

छत्तीसगढ़ सरकार ने एक आदेश जारी में सभी सरकारी और निजी स्कूलों में दिन में तीन बार राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, गायत्री मंत्र, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र का सामूहिक पाठ अनिवार्य किया है. विपक्षी कांग्रेस ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि सरकार आरएसएस के एजेंडा को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है. एसोसिएशन फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स ने इस आदेश को वापस लेने की मांग की है.

झारखंड: सीएम ने प्रधानमंत्री से की जनगणना में आदिवासियों के लिए ‘सरना’ धर्म कोड शामिल करने की अपील

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि आदिवासियों की अलग पहचान सुनिश्चित करने और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए 'सरना धार्मिक कोड' ज़रूरी है. वहीं, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में आदिवासी समुदाय आगामी जनगणना में अलग आदिवासी कॉलम की मांग कर रहे हैं.

भारत की आदिवासी-लोक चित्रकला: लोक कलाओं की उजली यात्रा

पुस्तक समीक्षा: मुश्ताक ख़ान ने 'भारत की आदिवासी-लोक चित्रकला' में लिखते हैं ये लोक-कलाचित्र मात्र प्रदर्शन की वस्तु नहीं आदिवासी लोक जीवन का महत्वपूर्ण अंग हैं. परंपरा का सबसे प्रमुख कार्य यही है. वह लोककला को केवल प्रदर्शनीय वस्तु न रहने देकर उसे जीवन का अंग बना देती है. इस प्रकार कलाकृति उस समाज की मान्यताओं का दर्पण बन जाती है.

छत्तीसगढ़: नसबंदी अभियान में पंद्रह महिलाओं की मौत के 12 साल बाद डॉक्टर को दो साल की सज़ा

यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

छत्तीसगढ़: अफीम की खेती के आरोप में भाजपा नेता गिरफ्तार, पार्टी ने किया निलंबित

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अफीम खेती के आरोप में भाजपा किसान मोर्चा से जुड़े नेता विनायक ताम्रकार को उनके दो साथियों के साथ गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के अनुसार मक्का की फसल के बीच अफीम उगाई जा रही थी और जब्त फसल की कीमत करीब 8 करोड़ रुपये आंकी गई है.

जनजातीय कार्य मंत्रालय वनाधिकार प्रकोष्ठों में बदलाव की तैयारी में, ‘वन-स्टॉप’ समन्वय इकाइयां बनाने का फैसला

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने 4 फरवरी को राज्यों के साथ हुई समीक्षा बैठक में ‘वन-स्टॉप’ परियोजना निगरानी इकाइयां (पीएमयू) बनाने का प्रस्ताव रखा, जो सभी नीतिगत मामलों में समन्वय का कार्य करेंगी. इस कदम से उन कई राज्यों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है जो पहले से ही वनाधिकार अधिनियम प्रकोष्ठ सेल गठित कर चुके हैं.

छत्तीसगढ़: ग्राम सभा के जिस आदेश से ‘धर्मांतरित ईसाइयों’ के प्रवेश पर रोक लगाई गई, वही नदारद

जून 2025 में छत्तीसगढ़ के कांकेर ज़िले के कई आदिवासी इलाक़ों के गांवों में ग्राम सभा में पारित एक प्रस्ताव का हवाला देते हुए ईसाई पादरियों और ‘धर्मांतरित ईसाइयों’ के प्रवेश पर रोक लगाने वाले होर्डिंग लगाए गए थे. हाईकोर्ट ने इस रोक को असंवैधानिक नहीं माना. बीते हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फ़ैसले को चुनौती देने वाली याचिका ख़ारिज करते हुए याचिकाकर्ता को पेसा नियमों के तहत सक्षम प्राधिकरण के पास जाने की सलाह दी.

छत्तीसगढ़: आदिवासी नेता की हिरासत में मौत पर विधानसभा में हंगामा, राज्य की जेलों में 13 महीनों में 66 क़ैदियों की मौत

छत्तीसगढ़ विधानसभा में एक आदिवासी नेता की हिरासत में हुई मौत को लेकर विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया. सरकार ने बताया था कि जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 तक 13 महीनों के दौरान राज्य की केंद्रीय और ज़िला जेलों में दोषियों सहित 66 क़ैदियों की मौत हुई है.

छत्तीसगढ़: आदिवासी ईसाइयों के शव कब्र से निकाल गांवों से दूर दफनाने पर कोर्ट की अंतरिम रोक

सुप्रीम कोर्ट में छत्तीसगढ़ में आदिवासी ईसाइयों के शवों को जबरन कब्र से निकालने और उन्हें गांव की सीमाओं से बाहर अन्य स्थानों पर दफ़नाने पर रोक लगाने की मांग करते हुए एक जनहित याचिका दायर की गई थी. अदालत ने नोटिस जारी करते हुए कहा कि इस बीच दफनाए गए शवों के किसी भी प्रकार के उत्खनन की अनुमति नहीं दी जाएगी.

छत्तीसगढ़ में पादरियों, धर्मांतरित लोगों के प्रवेश निषेध संबंधी बोर्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप से इनकार

छत्तीसगढ़ के कुछ आदिवासी गांवों में पेसा क़ानून के तहत ग्राम सभाओं ने प्रस्ताव पारित कर धर्मांतरित ईसाइयों और पादरियों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए होर्डिंग लगाए थे, जिसे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सही ठहराया था. अब उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दी है.

छत्तीसगढ़: वेतन को लेकर धरना के दौरान मिड-डे मील की दो रसोइयों की मौत, आंदोलन और तेज़

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील बनाने वाली कई रसोइया रोज़ाना हजारों बच्चों के लिए भोजन तैयार करती हैं, लेकिन उन्हें मात्र 66 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं, जो दिहाड़ी मज़दूरों की मज़दूरी से भी कम है. अधिकांश रसोइयों के पास न तो स्वास्थ्य बीमा है और न ही पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाएं, जिससे उनकी नौकरी की असुरक्षा और भी बढ़ जाती है.

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