Cyber Crime

राष्ट्रीय राजधानी में वर्ष 2021 में साइबर अपराध में 111 प्रतिशत की वृद्धि: रिपोर्ट

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में पिछले साल साइबर अपराध के 356 से अधिक मामले सामने आए. इनमें से अधिकतर मामले ऑनलाइन धोखाधड़ी, ऑनलाइन उत्पीड़न, कामुक सामग्री के प्रकाशन आदि से जुड़े थे.

किसी मुस्लिम का जवाबदेही मांगना और बतौर पत्रकार काम करना जुर्म नहीं है: मोहम्मद ज़ुबैर

साक्षात्कार: चार साल पुराने एक ट्वीट के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर ने क़रीब तीन हफ्ते जेल में बिताए. इस बीच यूपी पुलिस द्वारा उन पर कई मामले दर्ज किए गए. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें ज़मानत देते हुए कहा कि उनकी लगातार हिरासत का कोई औचित्य नहीं है. उनसे बातचीत.

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी में दर्ज सभी मामलों में ऑल्ट न्यूज़ के मोहम्मद ज़ुबैर को ज़मानत दी

फैक्ट चेक वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ के सह संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर को ज़मानत देते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि उन्हें लगातार हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं है. अदालत ने उन्हें बुधवार को ही रिहा करने का आदेश दिया. साथ ही उनके ख़िलाफ़ उत्तर प्रदेश में दर्ज सभी मामले दिल्ली पुलिस को जांच के लिए सौंप दिए और यूपी सरकार द्वारा गठित एसआईटी को भी समाप्त करने का निर्देश दिया.

‘मोहम्मद ज़ुबैर को सच बोलने का ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ रहा है’

वीडियो: साल 2018 में किए गए एक ट्वीट को लेकर ‘धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने’ के आरोप में ‘ऑल्ट न्यूज’ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर बीते 27 जून को दिल्ली पुलिस ने गिरफ़्तार किया था. इसके अलावा वह उत्तर प्रदेश के विभिन्न ज़िलों में एक साथ छह मुक़दमों का सामना कर रहे हैं. इस मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान का नज़रिया.

2018 ट्वीट मामले में मोहम्मद ज़ुबैर को ज़मानत, कोर्ट ने कहा- राजनीतिक दल आलोचना से परे नहीं

दिल्ली पुलिस द्वारा ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक और पत्रकार मोहम्मद ज़ुबैर के ख़िलाफ़ दर्ज चार साल पुराने ट्वीट संबंधी मामले में ज़मानत देते हुए दिल्ली की अदालत ने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए असहमति की आवाज़ ज़रूरी है. किसी भी राजनीतिक दल की आलोचना के लिए आईपीसी की धारा 153ए और 295ए लागू करना उचित नहीं है.

मोहम्मद ज़ुबैर ने सुप्रीम कोर्ट से उत्तर प्रदेश में दर्ज छह एफ़आईआर रद्द करने की अपील की

फैक्ट चेक वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर के ख़िलाफ़ उत्तर प्रदेश के हाथरस ज़िले में दो और सीतापुर, लखीमपुर खीरी, ग़ाज़ियाबाद और मुज़फ़्फ़रनगर ज़िलों में एक-एक केस दर्ज किए गए हैं. उत्तर प्रदेश पुलिस ने बीते 12 जुलाई को इन मामलों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन भी किया है.

सीतापुर मामले में मोहम्मद ज़ुबैर की अंतरिम ज़मानत अवधि अगले आदेश तक बढ़ाई गई

ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर ने कथित तौर पर कट्टर हिंदुत्ववादी नेताओं यति नरसिंहानंद, महंत बजरंग मुनि और आनंद स्वरूप को ‘घृणा फैलाने वाला’ कहा था. इस संबंध में उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज़िले के ख़ैराबाद थाने में बीते एक ​जून को उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया था. 

ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक ज़ुबैर को लखीमपुर कोर्ट ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा

फैक्ट चेक वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर को उत्तर प्रदेश के सीतापुर में दर्ज एक मामले में सुप्रीम कोर्ट से पांच दिन की अंतरिम ज़मानत मिलने के तुरंत बाद लखीमपुर खीरी पुलिस ने एक अन्य मामले में उसी दिन एक वॉरंट तामील कराया था. बीते साल के एक ट्वीट में ज़ुबैर ने सुदर्शन टीवी के ट्विटर हैंडल से साझा की गई मदीना मस्जिद की छेड़छाड़ की गई तस्वीर पर सवाल उठाया था. इसे लेकर लखीमपुर के सुदर्शन टीवी के एक रिपोर्टर ने उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज करवाया है.

ज़ुबैर केस: एएसजी द्वारा ‘सम्मानित’ कहे गए बजरंग मुनि ने किया था मुस्लिम महिलाओं से रेप का आह्वान

सुप्रीम कोर्ट में पत्रकार मोहम्मद ज़ुबैर की याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि बजरंग मुनि ‘सम्मानित’ धार्मिक नेता हैं, जिनके बहुत अनुयायी हैं. बजरंग मुनि का मुस्लिमों के ख़िलाफ़ हेट स्पीच का एक लंबा इतिहास रहा है, जिसके चलते वे एक बार गिरफ़्तार भी हुए थे.

यूपी पुलिस ने मोहम्मद ज़ुबैर के ख़िलाफ़ दर्ज एक और एफआईआर के सिलसिले में वॉरंट जारी किया

यह नया वॉरंट लखीमपुर पुलिस ने सुदर्शन न्यूज़ के एक रिपोर्टर की शिकायत पर मोहम्मद ज़ुबैर के ख़िलाफ़ साल 2021 में दर्ज एक एफआईआर के सिलसिले में जारी किया है. लखीमपुर पुलिस का यह वॉरंट शुक्रवार को सीतापुर पुलिस द्वारा दर्ज मामले में ज़ुबैर को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम ज़मानत मिलने के बाद सामने आया है.

यूपी में दर्ज मामले में ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर को पांच दिन की अंतरिम ज़मानत

ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर ने कथित तौर पर कट्टर हिंदुत्ववादी नेताओं यति नरसिंहानंद, महंत बजरंग मुनि और आनंद स्वरूप को ‘घृणा फैलाने वाला’ कहा था. इस संबंध में उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज़िले के ख़ैराबाद थाने में बीते एक ​जून को उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया था. धार्मिक भावनाएं आहत करने के एक अन्य मामले में ज़ुबैर को बीते 27 जून को दिल्ली पुलिस ने गिरफ़्तार किया है. इस मामले के चलते वह फिलहाल हिरासत में ही रहेंगे.

ज़ुबैर की ज़मानत ख़ारिज होने पर क़ानूनविदों ने उठाए सवाल, कहा- और कितना नीचे गिरेगी न्याय व्यवस्था

दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ़्तार किए गए फैक्ट-चेकर मोहम्मद ज़ुबैर पर दर्ज मामले और उनकी हिरासत को लेकर नज़र आ रहीं स्पष्ट ख़ामियों पर सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश, एक उच्च न्यायालय के जज और वकीलों ने सवाल उठाए हैं.

‘मोहम्मद ज़ुबैर जैसे पत्रकार रास्ते से हट जाएं तो भाजपा बेरोक-टोक झूठ फैला सकती है’

वीडियो: फैक्ट-चेक वेबसाइट ‘ऑल्ट न्यूज़’ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर को बीते 27 जून को धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया था. उनके ख़िलाफ़ एक अज्ञात ट्विटर एकाउंट के ज़रिये शिकायत दर्ज कराई गई थी. द वायर की पड़ताल में सामने आया है कि उस एकाउंट का संबंध भारतीय जनता युवा मोर्चा के एक पदाधिकारी और टेक फॉग नेटवर्क से है. इस पड़ताल को अंजाम देने वाले देवेश कुमार और नाओमी बार्टन से दीपक गोस्वामी की बातचीत.

हिंदुत्ववादी नेताओं को ‘घृणा फैलाने वाला’ बताने पर मोहम्मद ज़ुबैर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत

पत्रकार मोहम्मद ज़ुबैर ने अपने एक ​ट्वीट में कट्टर हिंदुत्ववादी नेता यति नरसिंहानंद, बजरंग मुनि और आनंद स्वरूप को ‘घृणा फैलाने वाला’ कहा था, जिसे लेकर बीते एक जून को उत्तर प्रदेश में सीतापुर ज़िले के ​खैराबाद में उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया था. ऐसे ही एक अन्य मामले में ​दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ़्तार किए जाने के बाद वह पहले से ही 14 दिन की न्यायिक हिरासत में हैं.

ज़ुबैर के ख़िलाफ़ शिकायत करने वाला ट्विटर एकाउंट टेक फॉग ऐप और भाजयुमो नेता से संबद्ध

एक्सक्लूसिव: द वायर की पड़ताल में गुजरात के एक भाजयुमो नेता से जुड़े ट्विटर एकाउंट्स का एक नेटवर्क सामने आया है, जिसका इस्तेमाल ऑल्ट न्यूज़ के ख़िलाफ़ संगठित हमले करने के लिए किया गया था.