Environment

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सूखाताल में सौंदर्यीकरण एवं निर्माण कार्यों पर रोक लगाई

सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने अदालत को बताया कि जल-वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि नैनीताल स्थित सूखाताल झील, नैनी झील को 40 से 50 प्रतिशत तक रिचार्ज (पानी की पूर्ति) करती है. झील के आधार पर कंक्रीट बिछाया जा रहा है, जो दोनों झीलों के लिए ख़तरनाक है.

उत्तराखंड के पर्यावरणीय ख़तरे समूचे हिमालय के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं

उत्तराखंड में हाल ही में घटी लगातार आपदाएं हिमालयी जनजीवन के अस्तित्व पर आगामी सदियों के ख़तरों की आहट दे रही हैं. सरकार व नौकरशाही के कामचलाऊ रुख़ से जलवायु परिवर्तन समेत मानव निर्मित गंभीर विषम स्थितियों का सामना करना दुष्कर हो चला है.

एनजीटी ने दिल्ली सरकार पर ठोस कचरे के अनुचित प्रबंधन के लिए 900 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया

एनजीटी ने कहा कि दिल्ली के तीन लैंडफिल स्थल ग़ाज़ीपुर, भलस्वा और ओखला में क़रीब 80 फीसदी कचरा पुराना है और इसका अब तक निपटान नहीं किया गया है. नागरिकों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन हुआ है और संबंधित अधिकारी पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए उपाय करने में नाकाम रहे हैं.

उत्तराखंड: कार्बेट रिज़र्व में टाइगर सफारी के लिए अवैध तौर पर छह हज़ार से अधिक पेड़ काटे गए

उत्तराखंड सरकार द्वारा कार्बेट टाइगर रिज़र्व में प्रस्तावित टाइगर सफारी परियोजना के लिए 163 पेड़ काटे जाने की अनुमति थी, लेकिन भारतीय वन सर्वेक्षण की एक रिपोर्ट बताती है कि काटे गए पेड़ों की संख्या 6,000 से अधिक है.

मीट विज्ञापनों पर रोक की मांग पर कोर्ट ने पूछा- अन्य लोगों के अधिकारों का अतिक्रमण क्यों चाहिए

तीन धार्मिक परमार्थ न्यासों और मुंबई के एक जैन शख़्स ने एक याचिका में मांसाहारी पदार्थों के विज्ञापनों को प्रतिबंधित करने के लिए दिशानिर्देश तैयार करने की मांग करते हुए दावा किया था कि उनके बच्चों और परिजनों को इस तरह के विज्ञापन देखने के लिए बाध्य किया जा रहा है. कोर्ट ने इस याचिका को ख़ारिज कर दिया.

पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के लिए एनजीटी ने राजस्थान सरकार पर 3,000 करोड़ का जुर्माना लगाया

राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने राजस्थान सरकार को ठोस और तरल कचरे के अनुचित प्रबंधन के लिए पर्यावरण संबंधी मुआवजे के रूप में 3,000 करोड़ रुपये का भुगतान करने को कहा है. वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार को तरल कचरे के अपर्याप्त प्रबंधन के लिए सौ करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है.

अपशिष्ट प्रबंधन में ख़ामी के लिए 12,000 करोड़ रुपये मुआवज़ा दे महाराष्ट्र सरकार: एनजीटी

राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने अपशिष्ट प्रबंधन में कमियों के कारण पर्यावरण को लगातार हो रहे नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए महाराष्ट्र सरकार को मुआवज़ा देने का आदेश देते हुए कहा है कि यदि उल्लंघन जारी रहा तो राज्य के ख़िलाफ़ अतिरिक्त हर्जाना लगाने पर विचार किया जा सकता है.

देश को बांटना बंद करें, विभाजनकारी गतिविधियों पर रोक का प्रयास करे सरकार: गोदरेज अध्यक्ष

गोदरेज इंडस्ट्रीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक नादिर गोदरेज ने कहा, ‘मुझे लगता है कि देश को बांटना बंद कर इसे एकजुट करने की कोशिश करनी चाहिए. मुझे भरोसा है कि सरकार भी आर्थिक वृद्धि के लिए इसे ज़रूरी मानती है, हमें इस पर ध्यान देना चाहिए.’

बंगाल सरकार पर एनजीटी ने अपशिष्ट प्रबंधन में ख़ामी के चलते 3,500 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया

राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों को लंबे समय के लिए टाला नहीं जा सकता. प्रदूषण मुक्त वातावरण प्रदान करना राज्य और स्थानीय निकायों की संवैधानिक ज़िम्मेदारी है. पश्चिम बंगाल सरकार सीवेज और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाओं की स्थापना को प्राथमिकता देती नज़र नहीं आ रही है.

सेंट्रल विस्टा परियोजना: उखाड़कर कहीं और लगाए गए 402 पेड़ों में से केवल 30 फीसदी जीवित बचे

वन विभाग ने दिल्ली हाईकोर्ट को एक हलफनामा सौंपा है, जिसमें बताया गया है कि निर्माण के दौरान केंद्र सरकार की बहुप्रतीक्षित ‘सेंट्रल विस्टा परियोजना’ में उखाड़े गए 400 से अधिक पेड़ों में से केवल 121 जीवित बचे हैं.

पंजाब सरकार ने विरोध के चलते मटेवारा वन-सतलुज नदी के पास टेक्सटाइल पार्क परियोजना रद्द की

पंजाब के लुधियाना में मटेवारा जंगल और सतलुज नदी के पास 1,000 एकड़ ज़मीन में टेक्सटाइल पार्क बनाना प्रस्तावित था. पिछली कांग्रेस सरकार की इस परियोजना का आम आदमी पार्टी ने विपक्ष में रहते हुए विरोध किया था लेकिन सत्ता में आते ही उसने इस पर आगे बढ़ने का फैसला किया, जिसके ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया था.

महाराष्ट्र: आरे में मेट्रो कारशेड बनाने के सरकारी फैसले के बाद पर्यावरणविद नई लड़ाई को तैयार

मुंबई के आरे वन क्षेत्र में मेट्रो-3 कारशेड परियोजना को 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण लेकर आए थे. जिसे बाद में आई देवेंद्र फडणवीस सरकार ने भी आगे बढ़ाया था, जबकि पर्यावरण कार्यकर्ता लगातार इसके विरोध में थे. 2019 में जब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महाविकास अघाड़ी सरकार सत्ता में आई तो उसने इस परियोजना पर रोक लगा दी, लेकिन अब सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार ने फिर से आरे वन क्षेत्र में मेट्रो परियोजना को आगे बढ़ाने का ऐलान किया है.

हिमाचल प्रदेश: मेगा सोलर पार्क परियोजना से स्पिति पर मंडराए ख़तरे के बादल

हिमाचल प्रदेश के स्पिति में प्रस्तावित 880 मेगावॉट का सोलर पार्क विश्व बैंक द्वारा वित्तपोषित परियोजना है, जो इस संवेदनशील इलाके की जनजातीय जनता और दुर्लभ वन्य जीवों के लिए जोखिमभरा साबित हो सकता है.

छत्तीसगढ़: हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई का विरोध, आदिवासियों-कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज

छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने परसा कोयला खनन परियोजना के लिए हसदेव अरण्य क्षेत्र में पेड़ों की कटाई और खनन गतिविधि को अंतिम मंज़ूरी दे दी है, जिसके ख़िलाफ़ आदिवासी और कार्यकर्ता ​‘चिपको आंदोलन’ जैसा प्रदर्शन कर रहे हैं. कार्यकर्ताओं का कहना है कि पेड़ों की कटाई और खनन से 700 से अधिक लोगों के विस्थापित होने की संभावना है. इससे आदिवासियों की स्वतंत्रता और आजीविका को ख़तरा है.

वन क्षेत्र बढ़ा, लेकिन 10 सालों में 52 बाघ अभयारण्यों का हिस्सा 22.62 वर्ग किलोमीटर घटा: सरकार

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव द्वारा जारी इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, शेरों को रहने के लिहाज़ से उपयुक्त वन क्षेत्र में पिछले 10 वर्षों के दौरान 33.43 वर्ग किलोमीटर की कमी आई है. हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के कुल वन क्षेत्र में साल 2019 के मुक़ाबले 2,261 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है.