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भारत में धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी मानवाधिकार ख़तरे में हैं: अमेरिकी आयोग

यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम का कहना है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता और संबंधित मानवाधिकारों पर लगातार ख़तरा बना हुआ है. इस साल अप्रैल में भी कमीशन ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में सिफ़ारिश की थी कि अमेरिकी विदेश विभाग भारत को ‘विशेष चिंता वाले’ देशों की सूची में डाले.

गृह मंत्रालय ने राजीव गांधी फाउंडेशन का एफसीआरए लाइसेंस रद्द किया

राजीव गांधी फाउंडेशन के अलावा राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट का एफसीआरए लाइसेंस भी गृह मंत्रालय ने रद्द कर दिया है. साल 2020 में भाजपा ने आरोप लगाया था कि फाउंडेशन को पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के दूतावास से धन प्राप्त हुआ था. इसके बाद गृह मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन किया था.

ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पत्रकार राना अयूब के ख़िलाफ़ आरोप-पत्र दाख़िल किया

ईडी ने आरोप लगाया है कि अप्रैल, 2020 से पत्रकार राना अयूब ने धर्मार्थ कार्यों के लिए धन एकत्र करने के मकसद से तीन चैरिटी अभियान शुरू किए और कुल 2.69 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा की थी. बाद में यह यह धनराशि अयूब के पिता एवं बहन के खातों में भेजी गई थी और इसे उनके व्यक्तिगत खातों में ट्रांसफर कर दिया गया था.

आयकर सर्वे: सीपीआर और आईपीएसएमएफ ने कहा- किसी भी क़ानून का उल्लंघन नहीं किया

आयकर विभाग द्वारा इंडिपेंडेंट एंड पब्लिक-स्पिरिटेड मीडिया फाउंडेशन और सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के कार्यालयों में ‘सर्वे’ के बाद दोनों संस्थानों ने नियमों के दायरे में काम करने की बात कही है. वहीं, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए आलोचकों की आवाज़ दबाने का सरकारी प्रयास क़रार दिया है.

मीडिया संस्थानों में हुए आयकर ‘सर्वे’ दिखाते हैं कि सरकार स्वतंत्र मीडिया से डरी हुई है: डिजीपब

बुधवार को आयकर विभाग द्वारा इंडिपेंडेंट एंड पब्लिक-स्पिरिटेड मीडिया फाउंडेशन, सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च और ऑक्सफैम इंडिया के कार्यालयों में किए गए ‘सर्वे’ की निंदा करते हुए विभिन्न स्वतंत्र डिजिटल मीडिया संस्थानों के संगठन डिजीपब ने कहा कि यह स्वतंत्र पत्रकारिता पर लगाम कसने की दमनकारी प्रवृत्ति है.

किसी मुस्लिम का जवाबदेही मांगना और बतौर पत्रकार काम करना जुर्म नहीं है: मोहम्मद ज़ुबैर

साक्षात्कार: चार साल पुराने एक ट्वीट के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर ने क़रीब तीन हफ्ते जेल में बिताए. इस बीच यूपी पुलिस द्वारा उन पर कई मामले दर्ज किए गए. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें ज़मानत देते हुए कहा कि उनकी लगातार हिरासत का कोई औचित्य नहीं है. उनसे बातचीत.

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी में दर्ज सभी मामलों में ऑल्ट न्यूज़ के मोहम्मद ज़ुबैर को ज़मानत दी

फैक्ट चेक वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ के सह संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर को ज़मानत देते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि उन्हें लगातार हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं है. अदालत ने उन्हें बुधवार को ही रिहा करने का आदेश दिया. साथ ही उनके ख़िलाफ़ उत्तर प्रदेश में दर्ज सभी मामले दिल्ली पुलिस को जांच के लिए सौंप दिए और यूपी सरकार द्वारा गठित एसआईटी को भी समाप्त करने का निर्देश दिया.

‘मोहम्मद ज़ुबैर को सच बोलने का ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ रहा है’

वीडियो: साल 2018 में किए गए एक ट्वीट को लेकर ‘धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने’ के आरोप में ‘ऑल्ट न्यूज’ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर बीते 27 जून को दिल्ली पुलिस ने गिरफ़्तार किया था. इसके अलावा वह उत्तर प्रदेश के विभिन्न ज़िलों में एक साथ छह मुक़दमों का सामना कर रहे हैं. इस मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान का नज़रिया.

2018 ट्वीट मामले में मोहम्मद ज़ुबैर को ज़मानत, कोर्ट ने कहा- राजनीतिक दल आलोचना से परे नहीं

दिल्ली पुलिस द्वारा ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक और पत्रकार मोहम्मद ज़ुबैर के ख़िलाफ़ दर्ज चार साल पुराने ट्वीट संबंधी मामले में ज़मानत देते हुए दिल्ली की अदालत ने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए असहमति की आवाज़ ज़रूरी है. किसी भी राजनीतिक दल की आलोचना के लिए आईपीसी की धारा 153ए और 295ए लागू करना उचित नहीं है.

केंद्र सरकार ने एफसीआरए की वेबसाइट से एनजीओ संबंधी डेटा डिलीट किया

गृह मंत्रालय ने अपनी विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम वेबसाइट से वो डेटा हटा दिया है, जिसमें एनजीओ के वार्षिक रिटर्न और उन एनजीओ की सूची शामिल है जिनके लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं. मंत्रालय ने इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि ये डेटा जनता के देखने के लिए ‘गैर-ज़रूरी’ माना गया था.

ऑल्ट न्यूज़ सिर्फ़ घरेलू भुगतान ही ले सकता था: ऑनलाइन भुगतान मंच रेज़रपे

ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर के धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में गिरफ़्तार किए जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने कहा था कि इस वेबसाइट की तरफ से विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम (एफसीआरए) का कथित रूप से उल्लंघन किए जाने की जांच की जा रही है. संस्थान पर विदेशों से चंदा प्राप्त करने का आरोप लगा था, जिसका उसने खंडन किया था.

एफसीआरए उल्लंघन: गृह मंत्रालय के अधिकारियों समेत सीबीआई ने 14 लोगों को गिरफ़्तार किया

सीबीआई के अनुसार, गृह मंत्रालय के एफ़सीआरए डिवीज़न के कुछ अधिकारियों ने विभिन्न गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के प्रमोटरों/प्रतिनिधियों, बिचौलियों के साथ साज़िश में निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करने के बावजूद दान प्राप्त करना जारी रखने के उद्देश्य से इन संगठनों को पिछले दरवाजे से एफसीआरए पंजीकरण/नवीनीकरण प्राप्त कराने की भ्रष्ट गतिविधियों में लिप्त थे.

केंद्र सरकार ने एनजीओ सीएचआरआई, एएडब्ल्यूडब्ल्यू का एफसीआरए लाइसेंस रद्द किया

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दो ग़ैर सरकारी संगठनों- ‘कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनीशिएटिव’ और ‘अपने आप विमेन वर्ल्डवाइड’ का एफसीआरए लाइसेंस रद्द करते हुए दावा किया है कि उन्होंने क़ानून का उल्लंघन किया है और विदेशी चंदे के रूप में प्राप्त धन की कथित तौर पर हेराफेरी की.

केंद्र ने सीबीआई को आकार पटेल, एमनेस्टी इंडिया के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने की अनुमति दी

एफसीआरए के कथित उल्लंघन मामलों की दो साल की जांच के बाद 31 दिसंबर, 2021 को एजेंसी ने दिल्ली की एक विशेष सीबीआई अदालत में आकार पटेल और एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के ख़िलाफ़ अधिनियम की धारा 35, 39 और 11 के तहत आरोप पत्र दायर किया था.

ब्रिटेन ने द्विपक्षीय बैठक में उठाया ऑक्सफैम के एफसीआरए लाइसेंस रिन्यू से इनकार का मुद्दा

31 दिसंबर 2021 को 5,932 अन्य एनजीओ के साथ ऑक्सफैम इंडिया का एफसीआरए पंजीकरण समाप्त हो गया था, जिनमें से 5,789 ने पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया था. बाकी बचे आवेदन विभिन्न अनियमितताओं की वजह से ख़ारिज कर दिए गए थे. ऑक्सफैम इंडिया इन्हीं में से एक था.