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हमारा संविधान: न्याय की देवी और मौलिक अधिकार

वीडियो: हमारा संविधान की इस कड़ी में अधिवक्ता अवनि बंसल न्याय की देवी के बारे में जानकारी दे रही हैं. उनके हाथ में तलवार, तराजू और आंख पर काली पट्टी बंधी होना क्या दर्शाता है? मौलिक अधिकार क्यों संविधान द्वारा लाई गई सामाजिक क्रांति का प्रतीक हैं और क्यों इनकी बहुत महत्ता है?

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हमारा संविधान: अनुच्छेद 13- कोई भी क़ानून जो मौलिक अधिकारों से विरोधाभास है अमान्य हो जाएगा

वीडियो: भारत के संविधान का अनुच्छेद 13 कहता है कि कोई भी क़ानून, अध्यादेश, आदेश, नियम, प्रथा- जो संविधान के लागू होने से पहले से अस्तित्व में है या बाद में बनाया गया हो- यदि वह भाग तीन में दिए गए मौलिक अधिकारों से किसी भी प्रकार से विरोधाभास दर्शाता है या उनका हनन करता है तो ऐसे क़ानून को अमान्य माना जाएगा.

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हमारा संविधान: क्या कहता है संविधान का अनुच्छेद 12

वीडियो: संविधान का अनुच्छेद 12 भाग तीन के लिए ‘राज्य’ को परिभाषित करता है. संसद, विधानसभा, नगर निकायों के साथ कौन-सी अन्य संस्थाएं है, जिनके ख़िलाफ़ नागरिक मौलिक अधिकारों के हनन के लिए अदालत जा सकते है. इस अनुच्छेद और संबंधित फैसलों के बारे में बता रही हैं अवनि बंसल.

A Hindu devotee takes a ritual dip in the polluted Yamuna river in New Delhi March 21, 2010. The Earth is literally covered in water, but more than a billion people lack access to clean water for drinking or sanitation as most water is salty or dirty. March 22 is World Water Day. REUTERS/Danish Siddiqui (ENVIRONMENT)

साफ़ जल नागरिकों का मौलिक अधिकार, शासन यह सुनिश्चित करने को बाध्य: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने यमुना नदी में प्रदूषण से संबंधित दिल्ली जल बोर्ड की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान देशभर की नदियों में प्रदूषण की न्यायिक समीक्षा का दायरा बढ़ाते हुए केंद्र सरकार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दिल्ली तथा हरियाणा सहित पांच राज्यों को नोटिस जारी किया है.

(फोटो साभार: seelatest.com)

हिमाचल प्रदेशः नए धर्मांतरण क़ानून में वहीं प्रावधान, जिन्हें 2012 में हाईकोर्ट ने ख़ारिज किया था

साल 2012 में हिमाचल प्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार बीते दिनों लागू हुए नए धर्मांतरण विरोधी क़ानून जैसा एक क़ानून लाई थी, जिसे हाईकोर्ट द्वारा असंवैधानिक और मौलिक अधिकारों का हनन बताते हुए उस पर रोक लगा दी गई थी.

जस्टिस मदन बी. लोकुर. (फोटो साभार: फेसबुक/National Commission for Protection of Child Rights)

यूपी के धर्मांतरण रोधी क़ानून में कई ख़ामियां हैं, ये अदालत में नहीं टिक पाएगाः जस्टिस लोकुर

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मदन बी. लोकुर ने सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली की आलोचना करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस साल जैसा कार्य किया, उससे निश्चित तौर पर कहीं बेहतर किया जा सकता था. पिछले कुछ वर्षों में सामाजिक न्याय का विचार ठंडे बस्ते में चला गया है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन हमें इसके साथ जीना होगा.

अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर. (फोटो: पीटीआई)

मौजूदा वक्त में धार्मिक स्थलों पर प्रतिबंध लगाना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं: हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर सभी धार्मिक स्थलों को खोलने और कोरोना संक्रमण के चलते धार्मिक प्रतिष्ठानों पर लगाए गए प्रतिबंधों को असंवैधानिक करार देने की मांग की गई थी.

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कोरोना संकट के दौरान सुप्रीम कोर्ट का रवैया निराश करने वाला रहा है: जस्टिस मदन बी. लोकुर

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मदन बी. लोकुर ने एक साक्षात्कार में कहा कि शीर्ष अदालत अपने संवैधानिक कर्तव्यों को सही तरह से नहीं निभा रही है. भारत का सर्वोच्च न्यायालय अच्छा काम करने में सक्षम है, लेकिन मुझे लगता है कि उन्हें आत्मनिरीक्षण करने की आवश्यकता है.

लॉकडाउन दौरान के बिहार के रांची में पुलिस एक व्यक्ति सजा देते हुए. (फोटो: पीटीआई)

लॉकडाउन: लोगों के ख़िलाफ़ पुलिस ज़्यादती पर केंद्र और केरल सरकार को नोटिस जारी किया

केरल हाईकोर्ट ने कथित रूप से देशव्यापी लॉकडाउन का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के ख़िलाफ़ पुलिस ज़्यादती की कथित घटनाओं का स्वत: संज्ञान लिया ​है.

(फोटो: रॉयटर्स)

केरल के बाद राजस्थान ने नागरिकता संशोधन कानून की संवैधानिकता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी

राजस्थान सरकार की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नागरिकता संशोधन कानून संविधान की मूल भावना के विपरीत है और ये मौलिक अधिकारों का हनन करता है. इस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अब तक 160 से अधिक याचिकायें दायर की जा चुकी हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: रॉयटर्स)

विवाहित बेटी भी अनुकंपा नियुक्ति की हक़दार, राज्य की नीति असंवैधानिक: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश के सतना ज़िले की एक महिला द्वारा अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन को राज्य की बिजली कंपनी ने यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया था कि सरकार की नीति के तहत अनुकंपा नियुक्ति का लाभ सिर्फ पुत्र, अविवाहित पुत्री, विधवा पुत्री या तलाक़शुदा पुत्री को ही दिया जा सकता है.

New Delhi: Protestors hold placards during a  protest march from Mandi House to Jantar Mantar against the amended Citizenship Act, NRC and NPR, in New Delhi, Monday, Feb. 10, 2020. (PTI Photo/Kamal Singh) (PTI2_10_2020_000064B)

सीएए विरोधी शांतिपूर्ण आंदोलन करने वाले राष्ट्रद्रोही और गद्दार नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ होने वाले एक प्रदर्शन पर धारा 144 के तहत रोक लगाने वाले आदेश को रद्द करते हुए कहा कि देश को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता विरोध प्रदर्शनों के ज़रिये ही मिली थी.

(फोटो: पीटीआई)

अगर मौलिक अधिकारों की रक्षा नहीं की गई तो संविधान का महत्व खत्म हो जाएगा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ इस समय सरकारी पदों पर बैठे लोगों/अधिकारियों के बोलने की आजादी पर प्रतिबंधों को लेकर सुनवाई कर रही है.

प्रतीकात्मक तस्वीर. (फोटो: रॉयटर्स)

इंटरनेट का इस्तेमाल संविधान में मिले मौलिक अधिकारों का हिस्सा है: केरल हाईकोर्ट

केरल के कालीकट विश्वविद्यालय के एक कॉलेज की बीए की छात्रा ने हॉस्टल में मोबाइल इस्तेमाल न करने के आदेश को चुनौती दी थी. हॉस्टल में रात 10 बजे से सुबह छह बजे तक लड़कियों को मोबाइल के इस्तेमाल की अनुमति नहीं थी.

Chennai: Lesbian, Gays, Bi-Sexual and Transgenders (LGBT) people along with their supporters take part in Chennai Rainbow Pride walk to mark the 10th year celebrations, in Chennai on Sunday, June 24, 2018. (PTI Photo)(PTI6_24_2018_000128B)

यदि कोई क़ानून मौलिक अधिकार का हनन करता है तो उसे निरस्त करना अदालत का कर्तव्य है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 मामले में अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है. कोर्ट ने कहा अगर हमें लगता है कि कहीं मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है, तो ये मौलिक अधिकार अदालत को अधिकार देते हैं कि ऐसे क़ानून को निरस्त किया जाए.