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(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

केंद्र की कोविड वैक्सीन नीति जैसी बनाई गई है, उससे स्वास्थ्य के अधिकार को क्षति पहुंचेगी: कोर्ट

शीर्ष अदालत ने कहा कि विभिन्न वर्गों के नागरिकों के बीच भेदभाव नहीं किया जा सकता है, जो समान हालात का सामना कर रहे हैं. केंद्र सरकार 45 साल और उससे अधिक उम्र की आबादी के लिए मुफ़्ते कोविड टीके प्रदान करने का भार वहन करेगी, राज्य सरकारें 18 से 44 आयु वर्ग की ज़िम्मेदारी का निर्वहन करेंगी, ऐसी शर्तों पर बातचीत कर सकते हैं. केंद्र को अपनी मौजूदा टीका नीति पर फिर से ग़ौर करना चाहिए.

(फोटो: रॉयटर्स)

13 विपक्षी नेताओं ने केंद्र से बड़े पैमाने पर मुफ़्त टीकाकरण अभियान शुरू करने की मांग की

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत 13 दलों के नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि केंद्र सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करें.

(फोटो: पीटीआई)

कोविड: सुप्रीम कोर्ट ने चेताया, इंटरनेट पर मदद मांग रहे लोगों पर कोई रोक नहीं लगा सकते

कोविड-19 प्रबंधन पर राष्ट्रीय नीति बनाने के लिए स्वत: संज्ञान मामले पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने साफ किया कि सोशल मीडिया पर लोगों से मदद के आह्वान सहित सूचना के स्वतंत्र प्रवाह को रोकने के किसी भी प्रयास को न्यायालय की अवमानना माना जाएगा.

(फोटो: रॉयटर्स)

राष्ट्रीय संकट पर मूकदर्शक बने नहीं रह सकते, हाईकोर्ट को दबाने का उद्देश्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

कोविड-19 मामलों में बेतहाशा वृद्धि को ‘राष्ट्रीय संकट’ बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि हाईकोर्ट क्षेत्रीय सीमाओं के भीतर महामारी की स्थिति पर नज़र रखने के लिए बेहतर स्थिति में है और सुप्रीम कोर्ट पूरक भूमिका निभा रहा है तथा उसके ‘हस्तक्षेप को सही परिप्रेक्ष्य में समझना चाहिए’ क्योंकि कुछ मामले क्षेत्रीय सीमाओं से भी आगे हैं.

योगी आदित्यनाथ. (फोटो साभार: फेसबुक/MYogiAdityanath)

यूपी में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं, अफ़वाह फैलाने वालों पर एनएसए के तहत हो कार्रवाई: योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा कि प्रदेश के किसी भी कोविड अस्पताल में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है. समस्या कालाबाज़ारी और जमाखोरी की है, जिससे सख़्ती से निपटा जाएगा. मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य सरकार की कोविड प्रबंधन की तैयारी पहले से बेहतर है.

(प्रतीकात्मक फोटोः पीटीआई)

उत्तर प्रदेश: परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद के पुत्र की इलाज में कथित लापरवाही से मौत

साल 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तान के खतरनाक पैटन टैंक तबाह करने वाले परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद के बेटे अली हसन की कानपुर के एक अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई. उनके बेटे ने दावा किया कि डॉक्टरों ने उनके पिता की कोविड जांच कराने की जहमत भी नहीं उठाई कि पता लग पाता कि वह संक्रमित थे या नहीं.

जीटीबी अस्पताल में भर्ती होने का इंतज़ार करता एक कोविड संक्रमित शख़्स. (फोटो: रॉयटर्स)

ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित करने वाले को लटका देंगे, हम किसी को नहीं बख़्शेंगे: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों द्वारा दायर ऑक्सीजन की कमी संबंधी मामले सुनते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से महामारी की चरम स्थिति आने पर इंफ्रास्ट्रक्चर, अस्पताल, चिकित्साकर्मियों, दवाई, टीका और ऑक्सीजन के आशय में तैयारियों को लेकर सवाल करते हुए कहा कि हम इसे लहर कह रहे हैं, यह असल में एक सुनामी है.

(फोटो: पीटीआई)

कोविड-19: ऑक्सीजन संकट के बीच दिल्ली के जयपुर गोल्डन अस्पताल में 20 मरीज़ों की मौत

राष्ट्रीय राजधानी के रोहिणी इलाके के जयपुर गोल्डन अस्पताल को उन्हें आवंटित ऑक्सीजन का कोटा शुक्रवार शाम को मिल जाना था, लेकिन यह आधी रात में पहुंचा. अस्पताल के निदेशक ने बताया कि उनके पास उपलब्ध ऑक्सीजन का भंडार कम होने के कारण फ्लो घट गया था, जिसके बाद मरीज़ों को नहीं बचाया जा सका.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

सरकार ने कोविड बेड बढ़ाए, पर उतनी ऑक्सीजन आपूर्ति नहीं, हम कैसे काम करें: गंगाराम अस्पताल

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के प्रमुख डॉ. डीएस राणा ने कहा कि उन्हें ऑक्सीजन की केवल 500 से 1500 घन मीटर की आपूर्ति मिल रही है और अस्पताल में 516 कोविड मरीज़ हैं, जिनमें से 129 आईसीयू और 29 वेंटिलेटर पर हैं. आपूर्ति की कमी के कारण इन 29 मरीज़ों को आधी रात से से हाथों के ज़रिये वेंटिलेशन दिया जा रहा है लेकिन यह लंबे समय तक नहीं किया जा सकता.

योगी आदित्यनाथ. (फोटो साभार: फेसबुक/MYogiAdityanath)

उत्तर प्रदेश: विरोध के बाद योगी सरकार ने मरीज़ों को भर्ती करने के नियम में किया बदलाव

उत्तर प्रदेश के निजी कोविड-19 अस्पतालों में मरीज़ों की भर्ती उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर हो सकेगी, जिसके बाद अस्पताल को इसकी सूचना फ़ौरन सरकार के पोर्टल को देनी होगी. हालांकि सरकारी अस्पतालों में भर्ती के लिए इंटीग्रेटेड कोविड कमांड सेंटर द्वारा रेफर किए जाने का नियम लागू रहेगा.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

पंजाब: अमृतसर के निजी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से छह मरीज़ों की मौत

पंजाब के अमृसर स्थित नीलकंठ अस्पताल ने दावा किया कि उसके तीन प्रमुख ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ताओं ने कहा कि आपूर्ति के मामले में सरकारी अस्पतालों को प्राथमिकता दी जा रही है. उसने कहा कि ज़िला प्रशासन से बार-बार मदद की गुहार लगाने के बावजूद किसी ने मदद नहीं की. दो महिलाओं सहित छह मरीज़ों की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई है.

महामारी के दूसरी लहर के दौरान कानपुर का एक अस्पताल. (फोटो: पीटीआई)

मध्य प्रदेश: कथित तौर पर ऑक्सीजन ख़त्म होने से पांच कोरोना संक्रमितों की मौत

घटना जबलपुर के गैलेक्सी अस्पताल की है. परिजनों का आरोप है कि ऑक्सीजन की कमी के कारण कोरोना संक्रमित मरीज़ों की जान गई, वहीं अस्पताल प्रबंधन और ज़िला प्रशासन ने ऑक्सीजन कमी के आरोपों से इनकार किया है.

(फोटो: द वायर)

सुप्रीम कोर्ट ने कोविड प्रबंधन मुद्दे की सुनवाई आगे बढ़ाई, मामले से हटे हरीश साल्वे

देश में कोरोना महामारी की स्थिति पर स्वतः संज्ञान लेने के मामले को लेकर कुछ वरिष्ठ वकीलों की टिप्पणियों से नाख़ुश शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई टालते हुए कहा कि उसने देश में कोविड-19 प्रबंधन से जुड़े मामलों की सुनवाई करने से उच्च न्यायालयों को नहीं रोका है.

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दिल्ली: गंगाराम अस्पताल में गंभीर रूप से बीमार 25 मरीज़ों की मौत, ऑक्सीजन की कमी का संदेह

सर गंगाराम अस्पताल के चिकित्सा निदेशक ने कहा है कि अस्पताल का ऑक्सीजन का भंडार कुछ घंटे और चलेगा, वेंटिलेटर और बीआईपीएपी मशीनें भी प्रभावी रूप से काम नहीं कर रही हैं. अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, बीते चौबीस घंटों में हुई 25 मौतों में से कुछ का संभावित कारण ऑक्सीजन का कम दबाव हो सकता है.

(फोटो: पीटीआई)

दिल्ली में ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति और परिवहन सुनिश्चित करे केंद्र: हाईकोर्ट

मैक्स अस्पताल की ऑक्सीजन आपूर्ति संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में ऑक्सीजन आपूर्ति केंद्र के ज़िम्मे है और उसके आवंटन आदेश का पालन न किए जाने पर स्थानीय अधिकारियों के ख़िलाफ़ आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है.