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11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कोई नेत्र बैंक नहीं है: आरटीआई

आरटीआई आवेदन से मिले आधिकारिक आकड़ों के मुताबिक, देश में अभी कुल 320 नेत्र बैंक हैं. त्रिपुरा, उत्तराखंड तथा मिजोरम जैसे राज्यों में महज एक नेत्र बैंक है. महाराष्ट्र में सबसे अधिक 77 नेत्र बैंक हैं. इसके बाद उत्तर प्रदेश में 41, कर्नाटक में 32 और गुजरात में 25 नेत्र बैंक हैं.

अस्पतालों को जारी सरकार के आदेश के ख़िलाफ़ 30,000 डॉक्टरों ने हड़ताल की: गुजरात आईएमए

गुजरात हाईकोर्ट ने अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा और अन्य पहलुओं को लेकर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाल में राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि निजी अस्पतालों में आईसीयू भूतल पर स्थित होने चाहिए और अस्पतालों के आगे के हिस्सों में लगे कांच को हटाया जाना चाहिए.

25 किलो से कम वज़नी पैकेटबंद आटा, दाल और अनाज महंगे हुए, केंद्र ने 5 प्रतिशत जीएसटी लगाया

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने अनाज से लेकर दालों और दही से लेकर लस्सी तक खाद्य पदार्थों पर जीएसटी लगाए जाने से संबंधित बार-बार पूछे जाने वाले सवालों पर स्पष्टीकरण जारी किया है. इसमें कहा गया है कि जीएसटी उन उत्पादों पर लगेगा जिनकी आपूर्ति पैकेटबंद सामग्री के रूप में की जा रही है और इन पैकेटबंद सामान का वज़न 25 किलोग्राम से कम होना चाहिए. इससे पहले केवल ब्रांडेड अनाज-दालें ही जीएसटी के दायरे में आती थीं.

उत्तराखंड में नवजात शिशुओं की मौत के मामले बढ़े: आरटीआई

आरटीआई के तहत मिले आंकड़ों के मुताबिक, उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में 2016-17 से 2020-21 तक मातृ मृत्यु दर में 122.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और इसी अवधि में नवजात मृत्यु दर में 238 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

कोविड​​​​ से मौत पर मुआवज़े के लिए डॉक्टरों, स्वास्थ्य​कर्मियों के बीच भेद उचित नहीं: कोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट एक डॉक्टर की पत्नी की याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिनकी मौत जून 2020 में महामारी की पहली लहर के दौरान कोविड-19 से हुई थी. दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि वर्तमान में सरकार का निर्णय ऐसे मामलों में केवल सरकारी अस्पतालों या उन अन्य अस्पतालों में सेवारत डॉक्टरों और अन्य पैरामेडिकल कर्मचारियों के संबंध में अनुग्रह राशि प्रदान करने का प्रावधान करता है.

एक तिहाई मुस्लिम, 20 फ़ीसदी से अधिक दलित-आदिवासियों के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं में भेदभाव: सर्वे

ऑक्सफैम इंडिया ने भारत में कोविड-19 टीकाकरण अभियान के साथ चुनौतियों पर अपने त्वरित सर्वेक्षण के परिणामों को जारी किया है, जिसमें दावा किया गया है कि कुल जवाब देने वालों में से 30 फ़ीसदी ने धर्म, जाति या बीमारी या स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर अस्पतालों में या स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों की ओर से भेदभाव किए जाने की जानकारी दी है.

ज़िला अस्पतालों में प्रति एक लाख आबादी पर 24 बिस्तर उपलब्ध; पुदुचेरी सबसे आगे, बिहार सबसे पीछे

नीति आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि ज़िला अस्पतालों को प्रति एक लाख आबादी पर कम से कम 22 बिस्तर की सिफ़ारिश की गई है. हालांकि 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ज़िला अस्पतालों में बिस्तरों की औसत संख्या 22 से कम थी. इसमें उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल आदि राज्य शामिल हैं. पुदुचेरी में सर्वाधिक औसतन 222 बिस्तर और बिहार में सबसे कम छह बिस्तर उपलब्ध हैं.

प्रत्येक नागरिक की विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने की ज़रूरत: वीके पॉल

देश के ज़िला अस्पतालों की प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट जारी करने के बाद नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने कहा कि सेहतमंद समाज के निर्माण में ऐसे अस्पतालों की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो बड़ी आबादी की स्वास्थ्य सेवा की ज़रूरतों को पूरा करते हैं. हालांकि उनकी अहम भूमिका के बावजूद दुर्भाग्य से कुछ कमियां भी हैं.

दवा जमाखोरी: हाईकोर्ट ने गौतम गंभीर फाउंडेशन के ख़िलाफ़ आपराधिक कार्रवाई पर रोक लगाई

कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच दिल्ली में ‘फैबीफ्लू’ नाम की दवाई की किल्लत होने पर पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने 21 अप्रैल को घोषणा की थी कि उनके संसदीय क्षेत्र के लोग उनके दफ़्तर से निशुल्क यह दवा ले सकते हैं. इसके बाद सोशल मीडिया सहित राजनीतिक हलकों में हुए विरोध और दवा की जमाखोरी के आरोपों के बाद उनके ख़िलाफ़ अदालत में याचिका दायर की गई थी.

अस्पताल मानवता की सेवा करने के बजाय बड़े उद्योग की तरह हो गए हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 रोगियों के उचित इलाज पर स्वत: संज्ञान लिए गए मामले को सुनते हुए कहा कि अस्पताल कठिनाई के समय में राहत प्रदान करने के लिए होते हैं न कि नोट छापने की मशीन। साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि आवासीय इलाकों में दो-तीन कमरे में चलने वाले ‘नर्सिंग होम’ सुरक्षा पर ध्यान नहीं देते, इसलिए उन्हें बंद किया जाना चाहिए.

आपात ट्रॉमा केयर सेंटर का संचालन न करने को लेकर कैग ने असम सरकार को फटकार लगाई

कैग ने असम के पांच अस्पतालों में आठ साल से भी ज्यादा वक्त से ट्रॉमा केयर केंद्रों का संचालन न करने को लेकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की खिंचाई की. विधानसभा में पेश कैग रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा पूर्ण रूप से वित्तपोषित ये सेंटर सिर्फ आवश्यक मानव संसाधन की कमी के कारण नहीं चल रहे हैं.

कोविड-19 से प्रभावित उत्तर और मध्य भारत के ग्रामीण क्षेत्र क्या अनदेखी का शिकार हुए हैं

कोरोना महामारी की दूसरी लहर के प्रकोप से देश के गांव भी नहीं बच सके हैं. इस दौरान मीडिया में प्रकाशित ख़बरें बताती हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड-19 का प्रभाव सरकारी आंकड़ों से अलहदा है.

यूपी: मुख्यमंत्री द्वारा गोद लिए गए अस्पताल खस्ताहाल स्वास्थ्य सुविधाओं का नमूना भर हैं

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते दिनों गोरखपुर के दो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को गोद लेने की घोषणा की थी. स्थापना के कई साल बाद भी इन केंद्रों में न समुचित चिकित्साकर्मी हैं, न ही अन्य सुविधाएं. विडंबना यह है कि दोनों अस्पतालों में एक्स-रे टेक्नीशियन हैं, पर एक्स-रे मशीन नदारद हैं.

तमिलनाडु में सरकारी आंकड़ों से कई गुना अधिक है कोविड-19 से हुई मौतों की संख्या: एनजीओ

चेन्नई के एक ग़ैर सरकारी संगठन अरप्पोर इयक्कम ने छह अस्पतालों के आंकड़ों पर आधारित एक रिपोर्ट में दावा किया कि इस साल अप्रैल और मई में सरकार के 863 मौतों के आंकड़े के मुकाबले राज्य में मृत्यु दर 13.5 गुना अधिक रही है.

कोविड-19 और उत्तर प्रदेश: साक्षात नरक में वो छह सप्ताह…

कोरोना महामारी की घातक दूसरी लहर के दौरान जहां जनता तमाम संकटों से जूझ रही थी, वहीं योगी आदित्यनाथ की सरकार एक अलग वास्तविकता की तस्वीर पेश कर रही थी.