LG Manoj Sinha

जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा. (फोटो: पीटीआई)

जम्मू कश्मीर: राज्य की सुरक्षा को ख़तरा बताते हुए दो और सरकारी कर्मचारी बर्ख़ास्त

इससे पहले जम्मू कश्मीर प्रशासन ने बीते 30 अप्रैल को कुपवाड़ा के एक सरकारी शिक्षक को राज्य की सुरक्षा को ख़तरा बताते हुए बर्ख़ास्त कर दिया था. केंद्र शासित जम्मू कश्मीर प्रशासन ने एक नया क़ानून लागू किया गया है, जिसके तहत ‘राज्य की सुरक्षा’ के ख़िलाफ़ संदिग्ध गतिविधियों वाले सरकारी कर्मचारियों को बिना जांच किए बर्ख़ास्त किया जा सकता है.

New Delhi: Telecom Minister Manoj Sinha addresses a press conference regarding the achievements of his ministry in the four years of NDA government, in New Delhi on Tuesday, June 12, 2018. (PTI Photo/Shahbaz Khan) (PTI6_12_2018_000053B)

जम्मू कश्मीर: पहली बार एक शिक्षक को राज्य की सुरक्षा के हित में बर्ख़ास्त किया गया

जम्मू कश्मीर के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद यह देखा कि कुपवाड़ा के सरकारी स्कूल के शिक्षक इदरीस जान की गतिविधियां राज्य की सुरक्षा के हित में सेवा से उनकी बर्ख़ास्तगी की मांग करती हैं और इस मामले में जांच करना उचित नहीं है.

Srinagar: Policemen patrolling at Lal Chowk after restrictions were lifted, in Srinagar, Tuesday, Aug. 20, 2019. Barricades around the Clock Tower in Srinagar's city centre Lal Chowk were removed after 15 days, allowing the movement of people and traffic in the commercial hub, as restrictions eased in several localities while continuing in others. (PTI Photo/S. Irfan)(PTI8_20_2019_000114B)

जम्मू कश्मीर: क्या है नई टास्क फोर्स, जो सरकारी कर्मचारियों को बिना जांच बर्ख़ास्त कर सकती है

केंद्र शासित जम्मू कश्मीर प्रशासन ने ‘राज्य की सुरक्षा’ के ख़िलाफ़ संदिग्ध गतिविधियों वाले सरकारी कर्मचारियों के मामलों की जांच के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है. संविधान के अनुच्छेद 311 (2)(सी) के अंतर्गत पारित इस आदेश के तहत सरकार को हक़ है कि वो बिना जांच समिति का गठन किए किसी भी कर्मचारी को बर्ख़ास्त कर दे.

ddc member protest

जम्मू कश्मीर: डीडीसी सदस्यों का दर्जा घटाने पर सभी दलों ने विरोध जताया, कहा- जनता का अपमान

जम्मू कश्मीर प्रशासन के नए आदेश के तहत जिला विकास परिषद यानी डीडीसी के अध्यक्ष का दर्जा सचिव के बराबर कर दिया गया है. भाजपा समेत सभी पार्टियों के डीडीसी सदस्यों ने इस आदेश को वापस लेने की मांग की है.

द कश्मीर वाला के संपादक फहाद शाह और रिपोर्ट यशराज शर्मा. (फोटो: फेसबुक/ट्विटर)

जम्मू कश्मीर: शोपियां स्कूल मामले में अदालत का पत्रकारों को अग्रिम ज़मानत देने से इनकार

जम्मू कश्मीर के न्यूज़ पोर्टल द कश्मीर वाला के दो पत्रकारों के ख़िलाफ़ यह मामला सेना की शिकायत पर उनकी एक रिपोर्ट के लिए दर्ज किया गया है. रिपोर्ट में बताया गया था कि शोपियां ज़िले के एक मदरसे को गणतंत्र दिवस समारोह आयोजित करने के लिए सेना द्वारा मजबूर किया गया था.

Srinagar: National Conference (NC) candidate Salmaan Sagar flashes victory sign after his lead in the municipality election results, in Srinagar, Tuesday, Dec. 22, 2020. (PTI Photo/S. Irfan)(PTI22-12-2020 000123B)

जम्मू कश्मीर डीडीसी चुनाव: गुपकर गठबंधन को 110 सीटें, भाजपा 74 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी

जम्मू कश्मीर में जिला विकास परिषद (डीडीसी) की 280 सीटों के लिए आठ चरण में चुनाव कराए गए थे. इस चुनाव में 2,178 उम्मीदवार मैदान में थे. जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्ज़ा ख़त्म किए जाने के बाद इस केंद्र शासित प्रदेश में यह पहला चुनाव था.

(फोटोः पीटीआई)

जम्मू कश्मीर: डीडीसी चुनाव मतगणना की पूर्व संध्या पर कम से कम 20 नेता हिरासत में

डीडीसी चुनाव नतीजे आने के एक दिन पहले जम्मू कश्मीर में अधिकारियों ने बताया कि कम से कम 20 राजनीतिक नेताओं को हिरासत में लिया है. इनमें महबूबा मुफ़्ती की पार्टी पीडीपी के तीन वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं. मुफ़्ती ने आरोप लगाया कि भाजपा पर चुनाव नतीजों से छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रही है.

महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला. (फोटो: पीटीआई)

डीडीसी चुनाव: फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने कहा- गुपकर अलायंस के उम्मीदवारों को प्रचार से रोका जा रहा

पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकर डिक्लरेशन की ओर से कहा गया है कि प्रचार से रोककर उनके उम्मीदवारों को सुरक्षा के नाम पर सुरक्षित स्थानों पर ले जाया रहा है. अलायंस में शामिल पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने आरोप लगाया कि डीडीसी चुनावों में ग़ैर-भाजपा दलों की भागीदारी को भारत सरकार ने नुकसान पहुंचा रही है. माकपा नेता मोहम्मद यूसुफ़ तारिगामी ने भी प्रचार न करने देने की बात कही है.