‘कोई मजिस्ट्रेट उन मुलज़िमों के साथ इंसाफ़ नहीं कर सकता जिनके साथ ख़ुद सरकार ऐसा करना न चाहे’

कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: मौलाना अबुल कलाम आज़ाद द्वारा बग़ावत के इल्ज़ाम में उन पर चलाए गए एक मुक़दमे में क़रीब सौ साल पहले कलकत्ते की एक अदालत में पेश लिखित बयान ‘क़ौल-ए-फ़ैसल: इंसाफ़ की बात’ शीर्षक से किताब की शक्ल में सामने आया है.

केरल के स्कूलों में एनसीईआरटी किताबों से हटाए गए अंशों को पढ़ाया जाएगा: रिपोर्ट

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) कक्षा 11वीं की किताब से भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के सभी संदर्भों को भी हटा दिया है. जम्मू कश्मीर के भारत में विलय से जुड़ी शर्त हटाने के साथ इतिहास की किताब से मुग़ल, गुजरात दंगों और महात्मा गांधी पर कुछ संदर्भ हटाए गए हैं.

विपक्षी दलों ने एनसीईआरटी की किताब से मौलाना आज़ाद का संदर्भ हटाने की निंदा की

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद कक्षा 11वीं की किताब से भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद के सभी संदर्भों को भी हटा दिया है. कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा इतिहास को फिर से लिखने और झूठ और असत्य पर बनी मनगढ़ंत, विकृत विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए एक ठोस प्रयास किया जा रहा है.

एनसीईआरटी ने 11वीं की किताब से जम्मू कश्मीर के विलय की शर्त और मौलाना आज़ाद के संदर्भ हटाए

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी ) ने कक्षा 11वीं की राजनीति विज्ञान की नई किताब से जम्मू कश्मीर के भारत में विलय से जुड़ी वह शर्त हटा दी है, जिसमें इसे स्वायत्त बनाए रखने की बात कही गई थी. इससे पहले एनसीईआरटी इतिहास की किताब से मुग़ल, गुजरात दंगों और महात्मा गांधी पर कुछ संदर्भ हटा चुका है.

‘मौलाना आज़ाद के विचारों को आम करने की ज़रूरत है’

वीडियो: स्वतंत्रता सेनानी और भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के विचारों, योगदान, आज के समय में उन्हें याद रखने और उनकी परंपरा को आगे ले जाने की ज़रूरत पर हाल ही में आज़ाद पर प्रकाशित किताब के लेखक और प्रसिद्ध इतिहासकार प्रोफ़ेसर एस. इरफ़ान हबीब से महताब आलम की बातचीत.

क्यों डराते हो ज़िंदां की दीवार से…

किसी भी आम नागरिक के लिए जेल एक ख़ौफ़नाक जगह है, पर देवांगना, नताशा और आसिफ़ ने बहुत मज़बूती और हौसले से जेल के अंदर एक साल काटा. उनके अनुभव आज़ादी के संघर्ष के सिपाहियों- नेहरू और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के जेल वृतांतों की याद दिलाते हैं.

वह चुनाव अभियान जिसने सांप्रदायिक राजनीति को बदल दिया

वर्ष 2002 में नरेंद्र मोदी के पहले राजनीतिक चुनाव प्रचार ने सबकुछ बदल दिया. पहली बार किसी पार्टी के नेता और उसके मुख्य चुनाव प्रचारक ने मुस्लिमों के ख़िलाफ़ नफ़रत भरा प्रचार अभियान चलाया.