Mehbooba Mufti

कश्मीर: सीआरपीएफ की गोली से मज़दूर की मौत, परिवार ने कहा- जानबूझकर की गई हत्या

शोपियां जिले में हुई इस घटना में मारे गए व्यक्ति की पहचान शाहिद अहमद राथर के रूप में हुई है, जो एक दिहाड़ी मज़दूर थे. सीआरपीएफ ने दावा किया है कि आतंकियों की ओर से हुई गोलीबारी का जवाब देते वक़्त यह वाक़या हुआ. घटना पर घाटी के मुख्यधारा के दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है.

कश्मीर में परिसीमन प्रक्रिया और विधानसभा चुनाव के बाद पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल होगा: अमित शाह

कश्मीर के विपक्षी दलों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की इस टिप्पणी पर हैरानी जताई और कुछ महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई सर्वदलीय बैठक में दिए उनके बयान ‘दिल जीतकर दिल्ली और जम्मू कश्मीर के अंतराल को पाटना होगा’ का हवाला देते हुए कहा कि सूबे के दर्जे को कमज़ोर करके दिलों को नहीं जीता जा सकता है.

रिश्वत आरोप के बाद मलिक ने कहा- सबको पता है कि कश्मीर में आरएसएस प्रभारी कौन था

मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा था कि जब वे जम्मू कश्मीर के राज्यपाल थे तो उन्हें ‘अंबानी’ और ‘आरएसएस से संबद्ध’ एक व्यक्ति की दो फाइलों को मंज़ूरी देने के बदले में 300 करोड़ रुपये की पेशकश की गई थी, हालांकि उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया था. जब आरएसएस नेता राम माधव से कहा गया कि वह उस समय जम्मू कश्मीर में थे, तो उन्होंने कहा कि आरएसएस का कोई भी व्यक्ति ऐसा कुछ नहीं करेगा. 

महबूबा ने अपमानजनक टिप्पणी को लेकर राज्यपाल सत्यपाल मलिक को क़ानूनी नोटिस भेजा

जम्मू कश्मीर के पूर्व और वर्तमान में मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कथित तौर पर कहा था कि पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती को रोशनी योजना का लाभ मिला था. मुफ़्ती ने एक क़ानूनी नोटिस भेजकर 10 करोड़ रुपये के मुआवजे़ की मांग की हैं. साल 2001 में लागू रोशनी योजना का उद्देश्य राज्य की ज़मीन पर क़ब्ज़ा रखने वाले लोगों को शुल्क के एवज में उसका मालिकाना हक़ देना था. हालांकि हाईकोर्ट ने इसे असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया था.

अंबानी और संघ से जुड़ी फाइलों को मंज़ूरी के लिए 300 करोड़ रुपये रिश्वत की पेशकश हुई थी: मलिक

जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि कश्मीर जाने के बाद उनके सामने मंज़ूरी के लिए दो फाइलें लाई गई थीं. एक अंबानी और दूसरी आरएसएस से जुड़े व्यक्ति की थी, जो महबूबा मुफ़्ती के नेतृत्व वाली तत्कालीन पीडीपी-भाजपा सरकार में मंत्री थे और प्रधानमंत्री के बहुत करीबी थे, लेकिन उन्होंने सौदों को रद्द कर दिया था.

कश्मीर: सीआरपीएफ की गोली से शख़्स की मौत, परिवार ने कहा- मामला दबाना चाहती है पुलिस

सात अक्टूबर को अनंतनाग में एक सीमा चौकी के पास रुकने का संकेत देने के बावजूद एक कार के न रुकने पर सीआरपीएफ जवानों ने गोलियां चला दीं, जिसमें परवेज़ अहमद नाम के एक शख़्स की मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने उनकी सहमति के बिना ही शव दफ़ना दिया. परवेज़ के परिवार के साथ घाटी के कई नेताओं ने इस घटना की जांच की मांग की है.

जहां भी मानवाधिकारों को ठेस पहुंचे, वहां धारा 144 लागू करना केंद्र का पसंदीदा काम: महबूबा मुफ़्ती

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब रविवार को लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा में चार किसानों सहित आठ लोगों की मौत हो गई. इस घटना के बाद विपक्षी दलों के कई नेताओं ने रात में उत्तर प्रदेश जाने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें जाने से रोक दिया.

कश्मीरः प्राचीन मंदिर में तोड़-फोड़, पुलिस ने केस दर्ज किया

दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग ज़िले में शनिवार को अज्ञात लोगों ने मट्टन इलाके में पहाड़ पर स्थित माता बरघशिखा भगवती मंदिर में तोड़-फोड़ की. यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब केंद्र सरकार 1990 के दशक के शुरुआत में घाटी छोड़कर गए कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास को लेकर क़दम उठा रही है.

भारतीय प्रेस परिषद ने कश्मीर में पत्रकारों के उत्पीड़न की जांच के लिए फैक्ट-फाइंडिंग टीम बनाई

भारतीय प्रेस परिषद ने जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती द्वारा इस मामले को लेकर लिखे गए एक पत्र के बाद ये कदम उठाया है. मुफ़्ती ने कहा था कि पत्रकारों का बेवजह उत्पीड़न करना एक नियम बन गया है. उनके घरों पर छापा मारकर, उन्हें तलब करके और बेहूदा ट्वीट्स जैसे तुच्छ आधारों पर पूछताछ करके, सीआईडी ​​द्वारा पत्रकारों और उनके परिवार के सदस्यों की पृष्ठभूमि की जांच करके, उनका उत्पीड़न किया जा रहा है.

कश्मीर: महबूबा का पत्रकारों की प्रताड़ना का आरोप, कहा- फैक्ट-फाइंडिंग टीम भेजे प्रेस परिषद

पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि लोगों को उम्मीद थी कि भारतीय प्रेस परिषद इन मामलों पर संज्ञान लेगा, लेकिन ऐसा लगता है कि अदालतों सहित किसी भी निगरानी संस्था की जम्मू कश्मीर में पैदा हुई दर्दनाक परिस्थितियों में कोई दिलचस्पी नहीं है.

पीडीपी जम्मू कश्मीर का आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेगी: महबूबा मुफ़्ती

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती ने आगामी जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में पूर्व सहयोगी भाजपा से किसी भी तरह का गठबंधन करने की संभावना से इनकार किया. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर संकट में है और यही हाल देश का है. भाजपा कहती है कि हिंदू ख़तरे में हैं, लेकिन असल में भाजपा की वजह से भारत और लोकतंत्र ख़तरे में हैं.

जम्मू कश्मीर: मुहर्रम का जुलूस कवर कर रहे पत्रकारों पर पुलिस का लाठीचार्ज

जम्मू कश्मीर के श्रीनगर के जहांगीर चौक पर मुहर्रम के 10 दिनों की शोक अवधि के आठवें दिन जुलूस निकालने की कोशिश कर रहे कुछ शिया मुसलमानों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया. वर्ष 1990 के दशक में आंतकवाद की शुरुआत होने के बाद से जुलूस पर रोक लगी है, क्योंकि अधिकारियों का मानना है कि धार्मिक समागम का इस्तेमाल अलगाववादी राजनीति को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है.

जम्मू कश्मीर का विशेष दर्ज़ा हटाए जाने के बाद से स्थिति बिगड़ रही है: गुपकर गठबंधन

पांच अगस्त, 2019 को मोदी सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जे़ को समाप्त कर दिया था. इसकी दूसरी वर्षगांठ पर गुपकर गठबंधन की ओर से कहा गया कि सरकार ने कहा है कि राज्य का दर्जा उचित समय आने पर तभी बहाल होगा, जब हालात सामान्य होंगे. इसका मतलब है कि स्थिति असामान्य बनी हुई है और शांति बहाल करने के दावे के साथ पांच अगस्त 2019 को लिए गए इस दुर्भाग्यपूर्ण फैसले से कुछ हासिल नहीं हुआ.

जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म करने के दो साल पूरे, विभिन्न दलों ने मनाया काला दिवस

5 अगस्त, 2019 को केंद्र की मोदी सरकार ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू और कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जे़ को समाप्त कर दिया था और तत्कालीन राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया था. गुपकर गठबंधन ने कहा कि भाजपा का ‘नया कश्मीर’ का झांसा एक मज़ाक बन गया है. 

फॉरेंसिक प्रमाण दिखाते हैं कि कश्मीर के फोन नंबरों की भी निगरानी की कोशिश हुई थी

बिलाल लोन और मीरवाइज़ जैसे अलगाववादियों के अलावा निगरानी के संभावित लक्ष्यों की सूची में सरकार की नीतियों की आलोचना करने वाले दिल्ली के एक प्रमुख कार्यकर्ता, कई पत्रकार और मुख्यधारा के कुछ नेताओं के परिवार के सदस्य शामिल हैं.