भारतीय ज़मीन पर चीनी अतिक्रमण को ख़ारिज करने वाला अमित शाह का दावा तथ्यों से कोसों दूर है

बीते दिनों एक चुनावी सभा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह में दावा किया कि 'चीन भारत की एक इंच ज़मीन पर भी अतिक्रमण नहीं कर सकता.' हालांकि, तथ्यों की पड़ताल बताती है कि साल 2020 में गलवान घाटी में भारतीय-चीनी सेना के बीच झड़प के बाद से सीमा पर 2020 से पहले की स्थिति बनाए रखने के लिए भारत ने चीन के साथ कम से कम 21 दौर की कोर कमांडर स्तर की वार्ता की है.

लोकसभा चुनाव की तैयारी में है आदिवासी समुदाय की राजनीतिक एकता के लिए गठित नया दल

भारत आदिवासी पार्टी ने स्थापना के मात्र ढाई महीने बाद हुए राजस्थान और मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में 35 निर्वाचन क्षेत्रों (27 राजस्थान और 8 मध्य प्रदेश) में चुनाव लड़कर 4 सीटों पर जीत हासिल की.

विपक्ष को भ्रष्टाचारी बताकर क्या लोकसभा चुनाव जीतने की तैयारी में हैं नरेंद्र मोदी?

वीडियो: भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों की जांच के दायरे में रहे ग़ैर-भाजपा या विपक्षी दलों के नेताओं के भाजपा में पहुंचने पर वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान का नज़रिया.

‘लोकतंत्र की जननी’ को अपना अलग डेमोक्रेसी इंडेक्स बनाने की ज़रूरत क्यों आन पड़ी है?

अपनी जनतांत्रिक छवि चमकाने के लिए ‘मदर आफ डेमोक्रेसी’ होने के दावों से शुरू हुई भारत सरकार की यात्रा फिलवक्त डेमोक्रेसी रेटिंग गढ़ने के मुक़ाम तक पहुंची है. अभी वह किन-किन मुकामों से गुजरेगी इसके बारे में भविष्यवाणी नहीं की जा सकती.

क्या संस्कृति राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल हिंदी के लेखक भी हैं?

बीते एक अप्रैल को वरिष्ठ मलयालम लेखक सी. राधाकृष्णन ने साहित्य अकादमी के एक समारोह में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए इस्तीफ़ा दे दिया. इसके बाद अकादमी ने मेघवाल की लेखकीय उपस्थिति का बचाव किया है.

कांग्रेस को आयकर विभाग से नए नोटिस मिले, अब तक कुल 3,567 करोड़ रुपये टैक्स की मांग

आयकर विभाग द्वारा शुक्रवार शाम को जारी दो नए नोटिस में कांग्रेस से वर्ष 2014-15 से 2016-17 के लिए 1,745 करोड़ रुपये की मांग की गई है. यह नोटिस कांग्रेस द्वारा केंद्र सरकार पर 'टैक्स टेररिज़्म' का आरोप लगाने के कुछ घंटों बाद भेजे गए हैं.

भारत में कौन जनतंत्र को ज़िंदा रखना चाहता है

चुनाव के साफ़ सुथरा और निष्पक्ष होने में विपक्ष के अलावा जनता को दिलचस्पी होनी चाहिए. आशा की जाती है कि जब शासक दल निरंकुश होने लगे तो राज्य की बाक़ी संस्थाएं मिलकर जनतांत्रिक प्रक्रियाओं की हिफ़ाज़त करेंगी. लेकिन जान पड़ता है राज्य की सभी संस्थाओं ने भाजपा में अपना विलय कर दिया है.

‘एनडीए अब गठबंधन नहीं भाजपा के वर्चस्व वाला जमावड़ा है, जिसमें अधिकतर घटक दल मजबूरी में हैं’

साक्षात्कार: डाॅ. रामबहादुर वर्मा जाने-माने राजनीति विज्ञानी, लेखक व स्तंभकार हैं, जो राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय राजनीति के दो टूक विश्लेषण के लिए जाने जाते हैं. 2024 लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र उनसे बातचीत.

अगर विश्वविद्यालय सार्वजनिक तौर पर विचारों की अभिव्यक्ति रोके तो वह अपने उद्देश्य से विमुख है

सार्वजनिक हित और सत्ता में हमेशा तनाव रहता है. बल्कि कई बार सत्ता अपने हित को ही सार्वजनिक हित मानने के लिए बाध्य करती है. जनता को इस द्वंद्व के प्रति सजग रखना ज्ञान के क्षेत्र में काम करने वालों का काम है. उनका सार्वजनिक बोलना या लिखना उनके लिए नहीं जनता के हित के लिए ज़रूरी है.

क्या चुनाव आयोग वाकई में निष्पक्ष है?

वीडियो: 18वीं लोकसभा के लिए चुनावों की घोषणा करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कई बार दोहराया कि लोकतंत्र के लिए निष्पक्षता ज़रूरी है, लेकिन क्या देश के सभी राजनीतिक दलों के लिए आगामी लोकसभा चुनाव 'लेवल प्लेयिंग फील्ड' है? इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान का नज़रिया.

चुनावी बॉन्ड: मोदी सरकार ने नियमों से छेड़छाड़ कर भाजपा को एक्सपायर बॉन्ड भुनाने की अनुमति दी

भारतीय स्टेट बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, 23 मई 2018 को कुछ चुनावी बॉन्ड धारक 20 करोड़ रुपये के बॉन्ड के साथ नई दिल्ली में बैंक की मुख्य शाखा पहुंचे थे. आधे बॉन्ड 3 मई 2018 और बाकी आधे 5 मई 2018 को खरीदे गए थे. दोनों ही तारीखों पर खरीदे गए बॉन्ड की उन्हें भुनाने की 15 दिन की अवधि समाप्त होने के बावजूद भुनाया गया.

असम और पश्चिम बंगाल की राजनीति और समाज पर सीएए का क्या प्रभाव होगा?

वीडियो: लोकसभा चुनावों से ठीक पहले नागरिकता संशोधन अधिनियम के नियम अधिसूचित होने के बाद से असम में इसका ख़ासा विरोध हो रहा है, वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इसे विभाजनकारी बताते हुए लागू न करने की बात कह चुकी है. इसी विषय पर द वायर की ब्यूरो चीफ संगीता बरुआ पिशारोती से बात कर रही हैं द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी.

झारखंडः कल्पना सोरेन का चुनावी कमान थामना झामुमो के लिए कितना फायदेमंद होगा

हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद कल्पना सोरेन के सार्वजनिक जीवन में आने के बाद यह आकलन शुरू हो गया है कि लोकसभा चुनाव में वे भाजपा के लिए कितनी बड़ी चुनौती बन सकती हैं. निगाहें इस ओर भी हैं कि इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कल्पना क्या झामुमो की खेवनहार बनेंगी.

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