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हैदरपोरा एनकांउटर में मृत तीसरे नागरिक के शव निकालने की याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने बीते 27 मई को अधिकारियों से मोहम्मद लतीफ़ माग्रे की मौजूदगी में हैदरपोरा एनकाउंटर में मृत उनके बेटे आमिर के अवशेषों को निकालने का आदेश दिया था. हालांकि छह जून को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस पर रोक लगा दी थी. आमिर उन चार लोगों में से एक थे, जो नवंबर 2021 को श्रीनगर के हैदरपोरा में एनकाउंटर में मारे गए थे. इनमें से दो लोगों के शव विरोध के बाद उनके परिजनों को उसी समय सौंप दिए गए थे.

नगालैंड फायरिंग: पुलिस ने 30 सैन्यकर्मियों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर की

दिसंबर 2021 में मोन ज़िले के ओटिंग और तिरु गांवों के बीच सेना की गोलीबारी में 14 नागरिकों की मौत हो गई थी. नगालैंड पुलिस ने मेजर रैंक के एक अधिकारी समेत 21 पैरा स्पेशल फोर्स के 30 जवानों के ख़िलाफ़ आरोपपत्र दायर करते हुए कहा कि उन्होंने मानक संचालन प्रक्रिया और नियमों का पालन नहीं किया था, न ही फायरिंग से पहले नागरिकों की पहचान सुनिश्चित की गई थी.

हैदरपोरा एनकाउंटर: जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने तीसरे नागरिक का शव क़ब्र से निकालने का आदेश दिया

आमिर लतीफ़ माग्रे उन चार लोगों में से एक थे, जो 15 नवंबर 2021 को श्रीनगर के बाहरी इलाके हैदरपोरा में एनकाउंटर में मारे गए थे. एनकाउंटर की प्रमाणिकता को लेकर जनाक्रोश और विरोध के कुछ दिन बाद जम्मू कश्मीर प्रशासन ने दो मृतकों- अल्ताफ़ अहमद भट और डॉ. मुदासिर गुल के शवों को उनके परिवारों को सौंप दिया था. हाईकोर्ट ने आमिर का शव उनके परिजनों के सुपुर्द न करने के जम्मू कश्मीर पुलिस के फैसले को संविधान के अनुच्छेद 14 के उल्लंघन क़रार दिया है.

नगालैंड: ग़लत पहचान के चलते सेना द्वारा 14 नागरिकों की हत्या मामले में कोर्ट ऑफ इंक्वायरी पूरी

सेना के पूर्वी कमान के प्रमुख पी. कलीता ने कहा कि यह ग़लत पहचान और निर्णय की त्रुटि का मामला था. सेना की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी पूरी हो गई है और अभी इसकी पड़ताल की जा रही है. हमें एसआईटी की रिपोर्ट भी मिली है और दोनों का विश्लेषण किया जा रहा है. नगालैंड के मोन जिले में पिछले साल दिसंबर में सैनिकों की गोलीबारी में 14 नागरिकों के मौत हो गई थी.

नगालैंड, असम और मणिपुर में आफ़स्पा के तहत आने वाले क्षेत्रों को घटाने का ऐलान

गृह मंत्रालय के अनुसार, नगालैंड के सात ज़िलों के 15 थाना क्षेत्र, मणिपुर के छह ज़िलों में 15 थाना क्षेत्र और असम के 23 ज़िलों में पूरी तरह से और एक ज़िले में आंशिक रूप से आफ़स्पा हटाया जा रहा है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा उग्रवाद ख़त्म करने के लिए किए गए कई समझौतों के फलस्वरूप आफ़स्पा के तहत आने वाले इलाकों को घटाया जा रहा है.

14 नागरिकों की हत्या पर एसआईटी रिपोर्ट केंद्र की मंज़ूरी के बाद सार्वजनिक की जाएगी: नगालैंड सीएम

पिछले साल चार और पांच दिसंबर को नगालैंड के मोन जिले के ओटिंग और तिरु गांवों के बीच सेना की गोलीबारी में कम से कम 14 नागरिकों के मौत हो गई थी. मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने कहा कि सेना के पैरा-कमांडो द्वारा 14 नागरिकों की कथित हत्या की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) के नतीजे केंद्र से दोषियों पर मुक़दमा चलाने की मंज़ूरी मिलने के बाद सार्वजनिक किए जा सकते हैं.

हैदरपोरा मुठभेड़ः पुलिस के हलफ़नामे में पता चले ख़ुफ़िया इनपुट से जुड़े सेना के विरोधाभासी दावे

15 नवंबर 2021 को श्रीनगर के हैदरपोरा इलाके में हुए ‘एनकाउंटर’ में हुई चार लोगों की मौत के बाद इस पर कई सवाल उठे थे. सेना के श्रीनगर स्थित 15 कॉर्प्स के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए ट्वीट में दावा किया गया था कि इस संयुक्त ऑपरेशन को जम्मू कश्मीर पुलिस के ख़ुफ़िया इनपुट के आधार पर अंजाम दिया गया था.

नगालैंड से आफ़स्पा हटाने की मांग को लेकर 70 किलोमीटर लंबा पैदल मार्च निकाला गया

आफ़स्पा के विरोध और सुरक्षाबलों की गोलीबारी में मारे गए 14 आम नागरिकों के लिए इंसाफ़ की मांग करते हुए सैकड़ों की संख्या में नगा लोगों ने नगालैंड के दीमापुर शहर से 70 किलोमीटर दूर राज्य की राजधानी कोहिमा तक पैदल मार्च किया.

हैदरपोरा मुठभेड़ को लेकर लगाए गए आरोपों से आहतः जम्मू एवं कश्मीर डीजीपी

बीते 15 नवंबर को श्रीनगर के हैदरपोरा इलाके में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान तीन व्यक्तियों- व्यापारी मोहम्मद अल्ताफ़ भट, दंत चिकित्सक डॉ. मुदसिर गुल और आमिर मागरे की मौत हो गई थी. राजनीतिक दलों ने पुलिस द्वारा की गई वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सवाल उठाए थे, जिसमें इस मुठभेड़ में शामिल अधिकारियों को एक तरह से ‘क्लीनचिट’ दी गई थी. 

मणिपुर को ‘अशांत क्षेत्र’ का दर्जा देना अब ज़रूरी नहीं: राज्य मानवाधिकार आयोग

राज्य से आफ़स्पा हटाने को लेकर दर्ज एक स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान मणिपुर मानवाधिकार आयोग ने कहा कि यह क़ानून सशस्त्र बलों को क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर गोली मारने तक का अधिकार देता है. यह संविधान के तहत मिले जीवन के अधिकार का उल्लंघन है.

नगालैंड: नगा संगठनों और आदिवासी समूहों ने आफ़स्पा की अवधि बढ़ाए जाने की निंदा की

केंद्र सरकार ने नगालैंड की स्थिति को अशांत और ख़तरनाक क़रार देते हुए विवादास्पद आफ़स्पा के तहत छह और महीने के लिए पूरे राज्य को अशांत क्षेत्र घोषित कर दिया है. सुरक्षा बलों की गोलीबारी में 14 नागरिकों की मौत के बाद नगालैंड से विवादास्पद आफ़स्पा को वापस लेने की संभावना की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति के गठन के कुछ दिनों बाद केंद्र द्वारा यह क़दम उठाया गया है. 

हैदरपोरा मुठभेड़: आमिर की मां ने ख़ुदकुशी की धमकी दी, परिवार ने पुलिस जांच को ख़ारिज किया

बीते 15 नवंबर को हैदरपोरा मुठभेड़ में मारे गए चार लोगों में से एक आमिर मागरे के माता-पिता ने पुलिस की उस जांच को ख़ारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि उनके बेटे आतंकी थे. इसके अलावा इस गोलीबारी में एक आतंकी सहित जिन लोगों की मौत हुई उनमें शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के मालिक मोहम्मद अल्ताफ़ भट और दंत चिकित्सक डॉ. मुदसिर गुल शामिल हैं. 

आफ़स्पा हटाए जाने की मांग के बीच केंद्र सरकार ने नगालैंड में इसकी अवधि बढ़ाई

गृह मंत्रालय ने कहा है कि केंद्र सरकार की राय है कि पूरे नगालैंड राज्य का क्षेत्र इतनी अशांत और ख़तरनाक स्थिति में है कि नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए सशस्त्र बलों का उपयोग आवश्यक है. बीते चार और पांच दिसंबर को मोन ज़िले में सेना की गोलीबारी में कम से कम 14 नागरिकों के मौत के बाद आफ़स्पा को वापस लेने की मांग हो रही है.

हैदरपोरा मुठभेड़: एसआईटी ने सुरक्षाबलों की किसी साज़िश से किया इनकार

बीते 15 नवंबर को श्रीनगर के हैदरपोरा इलाके में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान तीन व्यक्तियों- व्यापारी मोहम्मद अल्ताफ़ भट, दंत चिकित्सक डॉ. मुदसिर गुल और आमिर मागरे की मौत हो गई थी. गुपकर गठबंधन ने घटना की न्यायिक जांच की मांग की. है. वहीं पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि एसआईटी द्वारा सुरक्षाबलों को दी गई क्लीनचिट आश्चर्यचकित नहीं करती है. यह जांच एक ग़लत अभियान की लीपापोती करने के लिए की गई थी.

नगालैंड: राज्य से आफ़स्पा हटाने की संभावना पर गौर करने के लिए केंद्र ने समिति गठित की

सेना की गोलीबारी में 14 लोगों की मौत के बाद बढ़े तनाव के मद्देनज़र केंद्र ने दशकों से नगालैंड में लागू विवादास्पद आफ़स्पा हटाने की संभावना पर गौर करने के लिए भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त विवेक जोशी की अगुवाई ने पांच सदस्यीय समिति गठित की है, जो 45 दिन में अपनी रिपोर्ट देगी.