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क्या विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के जीवन में अपनी निर्धारित भूमिका निभाने में विफल हो रहे हैं

विश्वविद्यालयों की स्थापना के पीछे सैद्धांतिक रूप से यह विचार कहीं न कहीं ज़रूर था कि ये ऐसी नई पीढ़ी के विकास में सक्षम होंगे, जो सामाजिक बुराइयों व कुरीतियों से मुक्त होगी. पर व्यावहारिक रूप से सामने यह आया कि विश्वविद्यालय इन बुराइयों को समाज से हटा तो नहीं सके, साथ ही ख़ुद इसका शिकार बन गए.

क्या छात्रों को प्रधानमंत्री द्वारा आपदा में प्रचार का अवसर खोज लेने के लिए थैंक्यू कहना चाहिए

बीते दिनों यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों को 18 वर्ष से अधिक आयु समूह के लिए मुफ़्त टीकाकरण शुरू करने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देने वाले बैनर लगाने कहा है.

अकादमिक स्वतंत्रता: निजी बनाम सार्वजनिक विश्वविद्यालय

प्रताप भानु मेहता के इस्तीफ़े के बाद हुई बहस के दौरान एक अध्यापक ने कहा कि निजी के मुक़ाबले सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में अधिक आज़ादी है. शायद वे सोचते हैं कि यहां अध्यापकों को उनकी सार्वजनिक गतिविधि के लिए कुलपति तम्बीह नहीं करते. पर इसकी वजह बस यह है कि इन विश्वविद्यालयों के क़ानून इसकी इजाज़त नहीं देते.

फाइनल ईयर परीक्षाएं: विद्यार्थी की जान और यूजीसी की शान

अगर यूजीसी को अंतिम परीक्षा लेने का अपना निर्णय इतना उचित लग रहा है तो वह इसके तर्क विस्तार से क्यों नहीं बता रहा और उसमें जो विकल्प हो सकते हैं उन पर विचार क्यों नहीं कर रहा? हड़बड़ी में सिर्फ अपनी सत्ता स्थापित करने के लिए छात्रों के स्वास्थ्य की परवाह किए बिना शिक्षा की गुणवत्ता पर ज़ोर देना अमानवीयता है.

ऑनलाइन शिक्षा: राज्य ने अपनी ज़िम्मेदारी जनता के कंधों पर डाल दी है

संरचनात्मक रूप से ऑनलाइन शिक्षण में विश्वविद्यालय की कोई भूमिका नहीं है, न तो किसी शिक्षक और न ही किसी विद्यार्थी को इसके लिए कोई संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं. यानी शिक्षा, जो सार्वजनिक और सांस्थानिक ज़िम्मेदारी थी वह इस ऑनलाइन मॉडल के चलते व्यक्तिगत संसाधनों के भरोसे है.

अपने पुराने शोध कार्य को फिर से प्रकाशित करना साहित्यिक चोरी के समान होगा: यूजीसी

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से कहा गया है कि वह जल्द ही शोध कार्यों की साहित्यिक चोरी करने और उसे नए प्रारूप में पेश करने के मामलों के आकलन के लिए नए मापदंड जारी करेगा.

विश्वविद्यालयों को किसी उत्पादन इकाई की तरह काम नहीं करना चाहिए: सीजेआई बोबडे

सीजेआई शरद अरविंद बोबडे ने राष्ट्रसंत तुकादोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के 107वें दीक्षांत समारोह में कहा कि नागरिकता सिर्फ लोगों के अधिकारों के बारे में ही नहीं बल्कि समाज के प्रति उनके कर्तव्यों के बारे में भी है.

यूजीसी ने विश्वविद्यालयों से कहा, 29 सितंबर को मनाएं ‘सर्जिकल स्ट्राइक दिवस’

यूजीसी ने विशेष परेड, प्रदर्शनियों का आयोजन और सेना को ग्रीटिंग कार्ड भेजने की बात कही है. यूजीसी ने कहा है कि विश्वविद्यालय सेना के बलिदान के बारे में छात्र-छात्राओं को संवेदनशील बनाने के लिए पूर्व सैनिकों से संवाद सत्र का आयोजन कर सकते हैं.

यूजीसी का विश्वविद्यालयों को निर्देश, कैंपस में जंक फूड की बिक्री पर प्रतिबंध लगाएं

यूजीसी ने कहा है, ‘यह क़दम छात्र-छात्राओं के जीवन को बेहतर बनाएगा, सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बनाएगा और उनमें मोटापे को कम करेगा. यह जीवनशैली के रोगों को रोकेगा, जिसका अत्यधिक वजन से सीधा संबंध है.’

यूजीसी ने विश्वविद्यालयों से यौन उत्पीड़न के मामलों का आंकड़ा मांगा

विश्वविद्यालयों को 31 जुलाई तक यूजीसी को बताना है कि बीते एक साल में उन्हें यौन उत्पीड़न की कितनी शिकायतें मिलीं और इन पर क्या कदम उठाया गया.