violence

जनरल बिपिन रावत (फोटो: पीटीआई)

नागरिकता क़ानून: सेना प्रमुख के बयान की विपक्ष ने की निंदा, कहा- ऐसा लगा वह भाजपा नेता हैं

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए गुरुवार को कहा था कि नेता वे नहीं हैं जो ग़लत दिशा में लोगों का नेतृत्व करते हैं, जैसा कि हम बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय और कॉलेज छात्रों को देख रहे हैं, जिस तरह वे शहरों और कस्बों में आगज़नी और हिंसा करने में भीड़ की अगुवाई कर रहे हैं. यह नेतृत्व नहीं है.

(फोटो: द वायर)

झारखंड: अफ़वाहों के चलते सात लोगों की लिंचिंग हुई, एनसीआरबी रिपोर्ट में कहा- कोई मामला नहीं

राज्य में बीते तीन साल में गोकशी, चोरी, बच्चा चोरी और अफ़वाहों के चलते 21 लोगों की मौत हुई है. जनवरी 2017 से लेकर अब तक राज्य में जादू-टोना करने के शक के आधार पर हुई भीड़ की हिंसा में 90 से अधिक लोगों की मौत हुई है.

दक्षिण एवं मध्य एशिया मामलों की कार्यवाहक सहायक विदेश मंत्री एलिस जी वेल्स. (फोटो: ट्विटर)

अल्पसंख्यकों को क़ानूनी संरक्षण के बावजूद भारत में हो रहीं हिंसा-भेदभाव की घटनाएं: अमेरिका

दक्षिण और मध्य एशिया के मामलों के लिए अमेरिका के विदेश मंत्रालय की राजदूत एलिस वेल्स ने अमेरिकी सदन में कहा कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव की घटनाएं, स्वयंभू गो-रक्षकों द्वारा दलितों और मुस्लिमों पर हमले जैसी घटनाएं भारत द्वारा अल्पसंख्यकों को प्रदत्त कानूनी संरक्षण के अनुरूप नहीं हैं.

Jehanabad

बिहार: जहानाबाद में फिर सांप्रदायिक हिंसा, एक व्यक्ति की जान गई, धारा 144 लागू

बीते बृहस्पतिवार को भी जहानाबाद के अरवाल मोड़ के पास जब मूर्तियां विसर्जन के लिए ले जाई जा रही थीं, तब जुलूस पर पत्थर फेंका गया था. इसके बाद दोनों पक्ष में भारी पथराव हुआ और 14 लोग घायल हो गए थे.

koderma

झारखंड: चोरी के संदेह में युवक की पीट-पीटकर हत्या

मामला झारखंड के कोडरमा जिले का है. रेलवे कॉलोनी में चोरी के शक में स्थानीय लोगों ने करीब 30 वर्षीय सुनील कुमार यादव की कथित तौर पर पिटाई कर दी. इसके बाद अस्पताल में इलाज के दौरान सुनील की मौत हो गई.

फोटो साभार: thierry ehrmann/Flickr CC BY 2.0

बापू के नाम: आज आप जैसा कोई नहीं, जो भरोसा दिला सके कि सब ठीक हो जाएगा

जयंती विशेष: जिस दौर में गांधी को ‘चतुर बनिया’ की उपाधि से नवाज़ा जाए, उस दौर में ये लाज़िम हो जाता है कि उनकी कही बातों को फिर समझने की कोशिश की जाए और उससे जो हासिल हो, वो सबके साथ बांटा जाए.

Mahatma-Gandhi-HD-Wallpapers

अभी गांधी की बात करना क्यों ज़रूरी है?

आज हमारे सामने ऐसे नेता हैं जो केवल तीन काम करते हैं: वे भाषण देते हैं, उसके बाद भाषण देते हैं और फिर भाषण देते हैं. सार्वजनिक राजनीति से करनी और कथनी में केवल कथनी बची है. गांधी उस कथनी को करनी में तब्दील करने के लिए ज़रूरी हैं.

(फोटो: पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट में किए बदलाव का फ़ैसला वापस लिया, होगी तुरंत गिरफ़्तारी

सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम पर केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका स्वीकार करते हुए यह फ़ैसला दिया है. मार्च 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इसमें बदलाव करते हुए कहा था कि इस एक्ट में मामला दर्ज होने पर फौरन गिरफ़्तारी नहीं होगी और प्रारंभिक जांच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी.

भगत सिंह (फोटो: द वायर)

भगत सिंह को गांधी या नेहरू का विकल्प बताना भगत सिंह के साथ अन्याय करना है

ऐसा लगता है कि भगत सिंह के प्रति श्रद्धा वास्तव में गांधी-नेहरू से घृणा का दूसरा नाम है. जिनके वैचारिक पूर्वज ख़ुद को बचाते हुए अपने अनुयाइयों को भगत सिंह से दूर रहने की सलाह देते हुए दिन गुज़ारते रहे, उन्होंने अपनी कायर हिंसा को उचित ठहराने के लिए आज भगत सिंह को एक ढाल बना लिया है.

Khunti

झारखंड में फिर से मॉब लिंचिंग, एक युवक की हत्या, दो की हालत गंभीर

यह घटना झारखंड के खूंटी जिले की है. पुलिस का कहना है कि रविवार सुबह लगभग 10 बजे के आसपास भीड़ ने तीन लोगों पर उस वक्त हमला किया, जब ये लोग कथित तौर पर एक जानवर के शव से मांस निकाल रहे थे.

New Delhi: A view of the Supreme Court of India in New Delhi, Monday, Nov 12, 2018. (PTI Photo/ Manvender Vashist) (PTI11_12_2018_000066B)

सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी क़ानून संबंधी पुनर्विचार याचिका तीन जजों की पीठ को सौंपी

शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका पर अपना फैसला एक मई को सुरक्षित रखते हुए टिप्पणी की थी कि देश में कानून जातिविहीन और एकसमान होने चाहिए.

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह. (फोटो साभार: फेसबुक)

असहिष्णुता और हिंसा की घटनाओं से राजनीतिक व्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है: मनमोहन सिंह

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 75वीं जयंती के मौके पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में असिहष्णुता, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण, कुछ समूहों द्वारा पैदा की गई घृणा तथा भीड़ द्वारा कानून अपने हाथ में लेने से जुड़ी हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं.

Partition_of_Punjab_India_1947

नकली इतिहास भारत पर प्रेतात्मा बन कर छाया हुआ है

आज़ादी के 72 साल: स्मृति के रूप में जीवित विभाजन एक मौखिक संसार है, जो चुप्पियों में दबा हुआ है, नाउम्मीदी की भाषा में फंसा हुआ है. 72 सालों के बाद भी जिसके ज़ख़्म भरने का नाम नहीं लेते.